बढ़ती उम्र के साथ शरीर को स्वस्थ और सक्रिय रखना कई लोगों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रेवतीपुर क्षेत्र में आने वाले रामपुर उर्फ साधोपुर गांव के रहने वाले ऑनरेरी कैप्टन बब्बन राम की जीवनशैली इन सबसे बिल्कुल अलग है। आज 68 वर्ष से अधिक की आयु पार कर चुके होने के बाद भी वह सुबह बेहद जल्दी उठते हैं, लंबी दौड़ लगाते हैं और नियमित तौर पर तैराकी करते हैं। उनका साफ तौर पर यह मानना है कि शरीर को फिट बनाए रखने के लिए किसी भी तरह के महंगे खानपान या विशेष डाइट की कोई आवश्यकता नहीं होती, बल्कि इसके लिए केवल एक नियमित दिनचर्या और कड़ा अनुशासन होना सबसे ज्यादा जरूरी है।
सुबह चार बजे उठकर शुरू होती है कसरत
अपनी इस अनोखी और अनुशासित दिनचर्या के बारे में बात करते हुए कैप्टन बब्बन राम बताते हैं कि वह हर रोज सुबह ठीक चार बजे बिस्तर छोड़ देते हैं। उनकी इस रूटीन में दौड़ और तैराकी को एक विशेष और मुख्य स्थान प्राप्त है। वह प्रतिदिन सुबह उठकर लगभग दो से चार किलोमीटर तक की दौड़ लगाते हैं। इसके अलावा, सुबह साढ़े चार से छह बजे के बीच वह लगातार आधे घंटे से एक घंटे तक तैराकी भी करते हैं। अपनी मुख्य दौड़ शुरू करने से पहले वह छोटी दूरी की रेस भी पूरी करते हैं। उनके मुताबिक, इस तरह की नियमित शारीरिक गतिविधियां उनकी जिंदगी का एक अटूट हिस्सा बन चुकी हैं। भारतीय सेना में बिताए अपने लंबे सेवाकाल के दौरान जो अनुशासन उन्होंने सीखा था, वह आज भी उनकी रोजमर्रा की जिंदगी में साफ झलकता है।
सादा भोजन और खानपान के पुराने नियम
खानपान को लेकर कैप्टन बब्बन राम की सोच बेहद सरल और स्पष्ट है। उनका कहना है कि भोजन को लेकर किसी भी प्रकार के विशेष पकवानों की जिद नहीं करनी चाहिए। घर में जो भी दाल, रोटी और हरी सब्जी आसानी से उपलब्ध होती है, वह उसी को बड़े चाव से खाते हैं। उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वह सुबह आठ बजे तक अपना नाश्ता हर हाल में पूरा कर लें। इसके बाद वह शाम को लगभग सात बजे अपना रात का खाना खाते हैं और उनका यह भी मानना है कि रात्रि के समय हमेशा हल्का भोजन ही करना चाहिए। सही समय पर खाना खाना और खाने को लेकर किसी भी तरह के अनावश्यक नखरे न करना उनके जीवन का मूल मंत्र रहा है। कैप्टन बब्बन राम यह भी साझा करते हैं कि पिछले 20 से 30 वर्षों के दौरान जब भी उन्होंने भारतीय रेलवे से सफर किया है, तो उन्होंने कभी भी बोतलबंद पानी खरीदने के बजाय रेलवे स्टेशनों पर लगे नलों से ही पानी पिया है। हालांकि, केवल इसी एक आदत को उनकी शानदार फिटनेस का एकमात्र कारण नहीं माना जा सकता है, क्योंकि पीने के पानी की सुरक्षित गुणवत्ता की जांच करना भी हर किसी के लिए उतना ही जरूरी है।
भारतीय सेना से मिला जीवन का कड़ा अनुशासन
कैप्टन बब्बन राम ने देश की सेवा करते हुए भारतीय सेना की 150 फील्ड रेजिमेंट में करीब 30 साल तक अपनी सेवाएं दीं और अंत में वह ऑनरेरी कैप्टन के पद से सेवानिवृत्त हुए। सेना की नौकरी के दौरान ही उन्हें तैराकी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में अपनी गहरी रुचि विकसित करने का पूरा मौका मिला। वर्ष 2009 में सेना से रिटायरमेंट लेने के बाद उन्होंने कुछ वर्षों का अंतराल लिया और फिर साल 2021 में एक बार फिर से प्रतिस्पर्धी खेलों की दुनिया में धमाकेदार वापसी की। इसके बाद से लगातार वह राष्ट्रीय स्तर की वेटरन्स एथलेटिक्स और तैराकी प्रतियोगिताओं में पूरी सक्रियता के साथ भाग ले रहे हैं। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वह अपने खेल करियर में अब तक लगभग 50 पदक अपने नाम कर चुके हैं। हाल ही में कोयंबटूर में आयोजित हुई एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने तैराकी और एथलेटिक्स की विभिन्न स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल पांच पदक जीते थे।
स्वास्थ्य और फिटनेस को लेकर खास संदेश
अपनी फिटनेस के सफर को लेकर बब्बन राम का यही कहना है कि हर व्यक्ति को हमेशा अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही नियमित रूप से कोई न कोई शारीरिक गतिविधि जरूर करनी चाहिए और अपने खानपान में हमेशा सादगी बनाए रखनी चाहिए। वह यह भी बताते हैं कि इस उम्र में भी उन्हें आज तक कभी ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या घुटनों के दर्द जैसी कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या नहीं हुई है और न ही उन्होंने कभी अपने जीवन में कोई टैबलेट या दवा ली है। हालांकि, यह उनका पूरी तरह से व्यक्तिगत अनुभव है और इसे किसी दूसरे व्यक्ति के स्वास्थ्य की गारंटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि व्यायाम की मात्रा हमेशा इंसान की उम्र, उसकी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखकर ही तय की जानी चाहिए। किसी भी नए या कठिन फिटनेस रूटीन को शुरू करने से पहले चिकित्सीय सलाह लेना भी बेहद आवश्यक होता है। कैप्टन बब्बन राम की यह पूरी कहानी हम सभी को नियमितता, एक सक्रिय जीवनशैली और अनुशासन का असली महत्व सिखाती है।



















