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असम के कारबी आंगलोंग में महिलाओं ने सीखा हस्तनिर्मित चाय का हुनर, बढ़ेगी गांव की कमाईसक्सेस स्टोरी
19 अग॰ 2026, 8:29 pm (25 दिन पहले)· 2

असम के कारबी आंगलोंग में महिलाओं ने सीखा हस्तनिर्मित चाय का हुनर, बढ़ेगी गांव की कमाई

असम के कारबी आंगलोंग जिले में नौ महिलाओं को हरी चाय की पत्तियों से हैंडमेड ग्रीन टी और ऑर्थोडॉक्स टी तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे वे कच्ची पत्तियां बेचने के बजाय बेहतर दाम हासिल कर सकें।

असम के कारबी आंगलोंग जिले के ग्रामीण इलाकों की नौ महिलाओं ने हस्तनिर्मित चाय बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भरता की ओर एक अहम कदम बढ़ाया है। अपने खेतों से तोड़ी गई हरी चाय की पत्तियों को कम दामों में बेचने के बजाय, ये महिलाएं अब अपने घरों में ही प्रीमियम क्वालिटी की ग्रीन टी और ऑर्थोडॉक्स टी तैयार कर रही हैं। टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करने और पारंपरिक ज्ञान को सहेजने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए स्थानीय महिलाओं को कृषि उत्पादों का मूल्यवर्धन करने का तरीका सिखाया गया है।

मूल्यवर्धन के जरिए ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की पहल

कारबी आंगलोंग के छोटे चाय उत्पादकों के लिए कच्ची पत्तियां बेचना अक्सर कम मुनाफे का सौदा होता है, क्योंकि बाजार में पत्तियों के दाम घटते-बढ़ते रहते हैं और परिवहन पर भी खर्च होता है। इसी चुनौती से निपटने के लिए जैव विविधता संरक्षण संस्था आरण्यक ने एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस प्रशिक्षण में चार पड़ोसी गांवों, चंद्रसिंह रोंगपी, बारकिंग एंग्ती, सेम एंग्ती और हेमाई लेकथे की महिलाओं ने हिस्सा लिया। ये महिलाएं पहले से ही चाय की खेती और घरेलू किसानी से जुड़ी हुई हैं।

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इस पहल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को केवल कच्चा माल बेचने तक सीमित न रखकर उन्हें हस्तनिर्मित चाय की कुशल कारीगर बनाना है। आयोजकों के अनुसार, हाथ से चाय प्रसंस्करण करने के लिए बहुत कम शुरुआती पूंजी की आवश्यकता होती है, जबकि तैयार की गई स्पेशलिटी टी बाजार में काफी अच्छी कीमत पर बिकती है। हाथ से पत्तियों को रोल करने और सुखाने की सही विधि सीखकर ग्रामीण परिवार अपनी जमीन से मिलने वाली उपज का बेहतर आर्थिक लाभ उठा सकते हैं।

चाय बागान में व्यावहारिक प्रशिक्षण और प्रसंस्करण के चरण

प्रशिक्षण कार्यशाला का संचालन चंद्रसिंह रोंगपी गांव की अनुभवी चाय विशेषज्ञ मनई तेरांगपी ने किया, जो लंबे समय से ग्रीन टी और ऑर्थोडॉक्स टी तैयार कर रही हैं। मुख्य प्रशिक्षक के रूप में मनई तेरांगपी ने भाग लेने वाली महिलाओं को चाय प्रसंस्करण की पूरी प्रक्रिया को बारीकी से समझाया। इस प्रशिक्षण की शुरुआत पास के ही एक चाय बागान से हुई, जहां महिलाओं को पत्तियों के चयन और उन्हें तोड़ने का सही तरीका सिखाया गया।

बागान में पत्तियों की चुनाई के बाद महिलाओं को हाथ से रोल की जाने वाली ग्रीन टी बनाने का प्रत्यक्ष प्रदर्शन और अभ्यास कराया गया। इसमें पत्तियों को उबालने, हाथ से सही तरीके से रोल करने और धूप में सुखाने की तकनीक शामिल थी। इसके बाद प्रतिभागियों को उच्च गुणवत्ता वाली ऑर्थोडॉक्स टी तैयार करने की विशेष प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

प्रतिभागियों के अनुभव और कौशल विकास

इस व्यावहारिक प्रशिक्षण से महिलाओं को चाय प्रसंस्करण के सूक्ष्म पहलुओं को समझने में मदद मिली। कार्यशाला में शामिल महिलाओं ने उम्मीद जताई कि इन नई तकनीकों की मदद से वे बाजार में अपनी चाय का बेहतर मूल्य हासिल कर सकेंगी।

चंद्रसिंह रोंगपी गांव की निवासी रिबेका रोंगपीपी ने बताया कि चाय प्रसंस्करण की इन तकनीकों को सीखने से उनका कौशल बढ़ा है, जिससे वे अब कम कीमत पर कच्ची पत्तियां बेचने के बजाय बेहतर गुणवत्ता की ग्रीन टी और ऑर्थोडॉक्स टी तैयार कर सकेंगी। वहीं सेम एंग्ती गांव की कुसुम तेरोंपी ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें समझ आया कि पत्तियों के सही चयन, तुड़ाई, रोलिंग और सुखाने जैसी छोटी-छोटी सावधानियां चाय की गुणवत्ता और रूप-रंग को कितना बेहतर बना देती हैं, जिससे बाजार में अच्छे दाम मिलने की उम्मीद जगी है।

गुणवत्ता के मानक और पीआईआरबीआई नेटवर्क

प्रशिक्षण के दौरान निर्मित उत्पाद को बाजार के अनुकूल बनाने के लिए गुणवत्ता मानकों पर विशेष जोर दिया गया। आरण्यक की मोरोमी नाथ ने स्थानीय पीआईआरबीआई पहल के तहत चाय की खरीद के लिए तय किए गए मानकों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं द्वारा तैयार की गई चाय की खरीद पत्तियों के आकार, सही रोलिंग और उचित सुखाने जैसे गुणवत्ता मानकों के आधार पर की जाएगी और उसी के अनुसार भुगतान किया जाएगा।

मोरोमी नाथ ने महिलाओं को शुरुआत में छोटी मात्रा में चाय तैयार करने और नियमित अभ्यास के जरिए गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए प्रेरित किया। इसी क्रम में आरण्यक की लरबीन तेरोंपी ने पीआईआरबीआई के बारे में विस्तार से बताया, जो गांव में संचालित एक सामुदायिक व्यवसाय और खाद्य प्रसंस्करण इकाई है।

लरबीन तेरोंपी ने रेखांकित किया कि मूल्यवर्धन का यह मॉडल केवल चाय तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अन्य कृषि उत्पादों जैसे अदरक का पाउडर बनाने, टैपिओका से आटा तैयार करने, सहजन (मोरिंगा) की पत्तियों का पाउडर बनाने और हल्दी के प्रसंस्करण जैसे विकल्पों के बारे में भी महिलाओं को जानकारी दी। इस तरह के प्रसंस्करण से ग्रामीण परिवार अपने आसपास उपलब्ध संसाधनों से अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं।

पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन

आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ यह पहल पूर्वोत्तर भारत की जनजातीय परंपराओं को बचाने में भी सहायक है। बदलते दौर में आजीविका के बदलते तरीकों के कारण चाय बनाने का पारंपरिक ज्ञान धीरे-धीरे लुप्त होने का खतरा बना हुआ था। महिलाओं को इस पारंपरिक हुनर में दक्ष बनाकर आयोजकों का प्रयास है कि इस सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखा जाए।

यह कार्यक्रम आरण्यक के प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसे अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं जैसे IUCN-KfW, यूएस फिश एंड वाइल्डलाइफ सर्विस और डिज्नी कंजर्वेशन फंड का सहयोग प्राप्त है। आरण्यक ने दोहराया कि वह स्थानीय समुदायों को प्रकृति आधारित समाधानों और टिकाऊ आजीविका के माध्यम से समृद्ध बनाने और क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सवाल-जवाब

कारबी आंगलोंग में महिलाओं को किस चीज का प्रशिक्षण दिया गया?
महिलाओं को चाय की कच्ची पत्तियों से हस्तनिर्मित ग्रीन टी और ऑर्थोडॉक्स टी तैयार करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किसने किया था?
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जैव विविधता संरक्षण संस्था आरण्यक द्वारा आयोजित किया गया था।
प्रशिक्षण में किन गांवों की महिलाओं ने हिस्सा लिया?
इसमें चंद्रसिंह रोंगपी, बारकिंग एंग्ती, सेम एंग्ती और हेमाई लेकथे गांवों की कुल नौ महिलाओं ने भाग लिया।
महिलाओं द्वारा तैयार की गई चाय की खरीद किस आधार पर की जाएगी?
पीआईआरबीआई के तहत चाय की खरीद उसकी गुणवत्ता, पत्तियों के आकार, सही रोलिंग और उचित सुखाने के मानकों के आधार पर होगी।
चाय के अलावा किन अन्य स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण की जानकारी दी गई?
महिलाओं को हल्दी, अदरक पाउडर, टैपिओका आटा और सहजन (मोरिंगा) पाउडर तैयार करने के बारे में भी बताया गया।
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