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बिहार के इंजीनियरिंग छात्रों का साइबर शील्ड, ईमेल घोटालों की पहले ही पोल खोलेगा थ्रेट लेंस ऐपसक्सेस स्टोरी
14 अक्तू॰ 2026, 7:21 pm (36 मिनट पहले)· 0

बिहार के इंजीनियरिंग छात्रों का साइबर शील्ड, ईमेल घोटालों की पहले ही पोल खोलेगा थ्रेट लेंस ऐप

जहानाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने मशीन लर्निंग से लैस थ्रेट लेंस ऐप तैयार किया है, जो संदिग्ध ईमेल, फर्जी सेंडर और छुपे हुए आईपी पते की पहचान कर साइबर ठगी से बचाएगा।

डिजिटल दुनिया में लगातार बढ़ रहे ऑनलाइन घोटालों के बीच आम इंटरनेट उपभोक्ताओं की मेहनत की कमाई पर सबसे बड़ा खतरा फर्जी ईमेल के जरिए मंडराता है। इसी गंभीर चुनौती का तकनीकी हल ढूंढते हुए बिहार के जहानाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक विशेष सुरक्षा कवच तैयार किया है। छात्र पीयूष कुमार और उनकी टीम द्वारा विकसित यह खास सॉफ्टवेयर मशीन लर्निंग तकनीक पर आधारित है, जिसका नाम थ्रेट लेंस रखा गया है। यह एप्लीकेशन इनबॉक्स में आने वाले संदिग्ध संदेशों का बारीकी से विश्लेषण करके यह सुनिश्चित करता है कि कहीं कोई उपभोक्ता किसी शातिर साइबर जालसाज के बिछाए जाल में न फंस जाए। इस पूरे प्रोजेक्ट का मूल विचार छात्रों को प्रतिष्ठित स्मार्ट इंडिया हैकथॉन के दौरान मिला था, जहां ईमेल सुरक्षा से जुड़ी जटिल समस्याओं को सुलझाने के लिए व्यावहारिक समाधान तलाशने की प्रेरणा मिली।

संदिग्ध संदेशों की पहचान और तकनीकी जांच की व्यवस्था

थ्रेट लेंस एप्लीकेशन की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और बहुस्तरीय है। जब कोई उपभोक्ता किसी ईमेल को इस प्लेटफॉर्म पर जांच के लिए डालता है, तो सिस्टम उसमें छिपे सुरक्षा जोखिमों का तुरंत विश्लेषण करता है। यह टूल केवल सामान्य चेतावनी ही नहीं देता, बल्कि संदेश को अलग-अलग श्रेणियों में बांटता है, जिससे यह साफ हो जाता है कि पत्र स्पैम की श्रेणी में आता है या फिर किसी खतरनाक धोखाधड़ी का हिस्सा है। इसके अलावा, एप्लीकेशन संदेश भेजने वाले की वास्तविक पहचान उजागर करने में सक्षम है। यह ईमेल के मूल लोकेशन और उसके आईपी एड्रेस को ट्रैक करके यह स्पष्ट कर देता है कि संदेश असल में किस भौगोलिक स्थान और नेटवर्क से भेजा गया है। ऐसे कई तकनीकी फीचर्स एक साथ जुड़ने से आम लोगों के लिए फर्जी ईमेल पहचानना बहुत आसान हो जाता है।

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वैश्विक साइबर अपराधों से बचाव का नया रास्ता

साइबर अपराध की व्यापकता को रेखांकित करते हुए पीयूष कुमार ने साझा किया कि दुनिया भर में लगभग 4 बिलियन अपराध ईमेल के जरिए अंजाम दिए जाते हैं। इतनी बड़ी संख्या में होने वाली धोखाधड़ी से निपटने के लिए यह टूल काफी मददगार साबित हो सकता है। डिजिटल अपराधी अक्सर अनचाहे पैसे मांगने, वित्तीय झांसा देने या उत्पीड़न और डराने-धमकाने वाले संदेश भेजकर लोगों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान करते हैं। थ्रेट लेंस का एल्गोरिदम ऐसे हर दुर्भावनापूर्ण प्रयास को पहले ही पकड़ लेता है, जिससे उपभोक्ता बिना किसी भय या धोखे के अपने दैनिक डिजिटल काम पूरे कर सकते हैं।

स्मार्टफोन में इस्तेमाल और लॉगिन करने की पूरी प्रक्रिया

आम उपयोगकर्ताओं के लिए इस एप्लीकेशन को बेहद सरल और सुलभ बनाया गया है। मोबाइल पर इसका लाभ उठाने के लिए उपयोगकर्ताओं को सबसे पहले थ्रेट लेंस एप्लीकेशन को डाउनलोड करना होगा। इसके बाद इसे अपने जीमेल खाते से जोड़ना होता है। जैसे ही ईमेल खाता इस ऐप से लिंक हो जाता है, उपयोगकर्ता का पूरा इनबॉक्स एप्लीकेशन के सुरक्षित इंटरफेस में प्रदर्शित होने लगता है। यदि उपभोक्ता को किसी विशेष ईमेल पर संदेह होता है, तो वह उस पर टैप करके जांच शुरू कर सकता है। प्रणाली कुछ ही सेकंड में उस संदेश का विस्तृत सुरक्षा ब्योरा स्क्रीन पर पेश कर देती है, जिससे किसी भी अनजाने लिंक पर क्लिक करने से पहले ही संभावित साइबर खतरे को टाला जा सकता है।

सवाल-जवाब

थ्रेट लेंस एप्लीकेशन का मुख्य काम क्या है?
यह एप्लीकेशन मशीन लर्निंग तकनीक से ईमेल का विश्लेषण करता है, स्पैम और फ्रॉड की पहचान करता है तथा भेजने वाले का आईपी एड्रेस बताता है।
इस एप्लीकेशन को किन छात्रों ने तैयार किया है?
इसे जहानाबाद इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र पीयूष कुमार और उनकी टीम के विद्यार्थियों ने विकसित किया है।
छात्रों को इस ऐप को बनाने की प्रेरणा कहां से मिली?
छात्रों को थ्रेट लेंस ऐप बनाने का विचार स्मार्ट इंडिया हैकथॉन के दौरान ईमेल सुरक्षा समस्याओं को हल करने से मिला।
विश्व भर में ईमेल से जुड़े अपराधों का क्या आंकड़ा बताया गया है?
छात्रों के अनुसार पूरी दुनिया में लगभग 4 बिलियन अपराध ईमेल के माध्यम से अंजाम दिए जाते हैं।
उपयोगकर्ता अपने फोन में इस ऐप का इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?
उपयोगकर्ताओं को थ्रेट लेंस ऐप डाउनलोड करके उसे अपने जीमेल खाते से जोड़ना होता है, जिसके बाद किसी भी ईमेल की जांच की जा सकती है।
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