सीमित संसाधनों और मामूली आर्थिक पृष्ठभूमि के बीच जब बड़े लक्ष्य तय किए जाते हैं, तो राह में चुनौतियां आना स्वाभाविक है. उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के लालगंज कस्बे में दो कमरों के एक साधारण मकान में रहने वाले परिवार ने इस बात को पूरी तरह झुठला दिया कि सिविल सेवा में शीर्ष पद पाने के लिए सिर्फ बड़े शहरों या महंगे संस्थानों की ही दरकार होती है. ग्रामीण बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत अनिल मिश्रा और उनकी पत्नी ने अपने चारों बच्चों पर कभी अपनी पसंद नहीं थोपी, बल्कि उन्हें अपने रास्ते खुद चुनने की पूरी आजादी दी. परिवार के चारों बच्चों योगेश, माधवी, लोकेश और क्षमा ने अपनी शुरुआती तालीम हिंदी माध्यम के साधारण स्कूलों से पूरी की थी.
बहनों के संघर्ष को देखकर इंजीनियर भाई ने लिया बड़ा फैसला
इस सफर की शुरुआत तब हुई जब परिवार की दो बेटियों माधवी और क्षमा ने संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने की ठानी. शुरुआती प्रयासों में जी-तोड़ मेहनत करने के बाद भी जब उन्हें कामयाबी नहीं मिली, तो घर के माहौल में मायूसी छाने लगी. उस दौरान बड़े भाई योगेश मिश्रा नोएडा में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे और उनका सिविल सेवा में जाने का पहले से कोई इरादा नहीं था. अपनी बहनों के गिरते मनोबल और उनके कठिन परिश्रम को बेकार जाते देख योगेश ने उनकी मदद करने का मन बनाया.
लाखों के पैकेज वाली नौकरी छोड़कर समझा परीक्षा का पैटर्न
बहनों की तैयारी में कहां कमी रह रही है, इसे गहराई से समझने के लिए योगेश ने साल 2013 में अपनी सुरक्षित और भारी वेतन वाली कॉरपोरेट नौकरी को अलविदा कह दिया. उनका मुख्य उद्देश्य परीक्षा के पूरे पाठ्यक्रम, सवालों के बदलते स्वरूप और चयन की बारीकियों को खुद अनुभव करके समझना था, ताकि वे अपनी बहनों को सही मार्गदर्शन दे सकें. उन्होंने खुद भी तैयारी शुरू की और साल 2013 की परीक्षा में अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल कर आईएएस अधिकारी बन गए.
साझे नोट्स और सटीक रणनीति से मिली लगातार सफलता
योगेश मिश्रा के आईएएस बनने के बाद पूरे परिवार में उत्साह की नई लहर दौड़ गई. उन्होंने अपनी पढ़ाई के दौरान तैयार किए गए नोट्स, समय प्रबंधन की योजना और परीक्षा के अहम नुस्खे अपने भाई-बहनों के साथ साझा किए. इसके बाद सभी भाई-बहनों ने एक टीम की भांति एकजुट होकर तैयारी शुरू की. इस सामूहिक प्रयास का असर अगले ही साल देखने को मिला, जब साल 2014 में माधवी मिश्रा ने यूपीएससी परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 62 हासिल की और परिवार की पहली महिला आईएएस अधिकारी बनीं.
2015 में रचा गया रिकॉर्ड, नाम दर्ज हुआ इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में
सफलता का यह सफर यहीं नहीं थमा, बल्कि साल 2015 के परीक्षा परिणामों ने इस परिवार को पूरे देश में चर्चित कर दिया. छोटे भाई लोकेश मिश्रा ने साल 2015 में ऑल इंडिया रैंक 44 हासिल कर आईएएस कैडर में प्रवेश किया. उसी वर्ष सबसे छोटी बहन क्षमा मिश्रा ने ऑल इंडिया रैंक 172 के साथ परीक्षा उत्तीर्ण कर भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस में अपनी जगह सुनिश्चित की. एक ही परिवार के चारों सगे भाई-बहनों के इस असाधारण कारनामे को ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में भी शामिल किया गया.



















