बिहार की माटी की जुझारू महिलाओं और बेटियों की लंबी लड़ाई को वैश्विक स्तर पर एक बहुत बड़ा मुकाम हासिल हुआ है। इटली की राजधानी रोम में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान ‘मदर्स ऑफ करेज’ नामक डॉक्यूमेंट्री फिल्म को संयुक्त राष्ट्र के एसडीजी एक्शन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर पुरस्कार प्राप्त करने के लिए बिहार की खुशबू अवस्थी विशेष रूप से रोम पहुंची थीं।
ग्रामीण महिलाओं के नाम किया गया सम्मान
पुरस्कार स्वीकार करने के पश्चात खुशबू अवस्थी ने इस पूरी सफलता का श्रेय मुजफ्फरपुर की पूनम दीदी, पटना की उर्मिला दीदी और उन तमाम अनगिनत ग्रामीण महिलाओं को समर्पित किया, जो अपनी बेटियों की बेहतर तालीम और उनके स्वावलंबन के लिए दिन-रात संघर्षरत हैं। इस अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के सामने आने के बाद मुजफ्फरपुर की पूनम दीदी ने अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और बताया कि खुशबू अवस्थी काफी लंबे समय से शिक्षा के प्रसार के लिए समर्पित भाव से कार्य कर रही हैं।
संगठनों के जरिए जमीनी स्तर पर प्रयास
विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से देश के कई राज्यों के साथ-साथ बिहार में भी शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्र फॉर चेंज और शिक्षालोकम जैसी पहलों के तहत राज्य सरकार के शिक्षा विभाग के साथ एक एमओयू संपन्न हुआ था। इस अनुबंध के अंतर्गत मीना मंच के जरिए किशोरियों के सशक्तीकरण से जुड़े मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया, जिसमें मुख्य रूप से बाल विवाह जैसी कुप्रथा और लड़कियों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाने जैसी गंभीर समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया था।
वर्ष 1994 से जारी है संघर्ष की लंबी यात्रा
पूनम दीदी ने अपने संघर्षों के दिनों को याद करते हुए साझा किया कि उन्होंने महिला समाख्या से जुड़कर मुजफ्फरपुर के बांद्रा प्रखंड और शिवहर के झूमरी क्षेत्र में जमीनी स्तर पर अभियान चलाए थे। साल 1994 में बिहार शिक्षा परियोजना से जुड़ने के बाद शुरुआती तीन वर्षों तक उन्होंने प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद वर्ष 1997 से लगातार मुजफ्फरपुर क्षेत्र में सक्रिय रहकर महिला सशक्तीकरण और शिक्षा की अलख जगाती रहीं, हालांकि महिला समाख्या का यह कार्यक्रम साल 2016 में बंद हो गया था।
शिक्षाग्राम अभियान के जरिए दूर हो रही हैं मुश्किलें
पूनम दीदी के अनुसार, जिस शिक्षाग्राम अभियान ने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान की नींव मजबूत की है, वह मुख्य रूप से ग्रामीण विद्यालयों की बुनियादी समस्याओं के समाधान पर केंद्रित है। इस अनूठी पहल में छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, अभिभावकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को एक ही मंच पर लाया जाता है, ताकि शिक्षा से जुड़ी बाधाओं पर खुलकर चर्चा हो सके और सामूहिक सहयोग से उनका स्थायी समाधान तलाशा जा सके।
ग्रामीण महिलाओं के सामूहिक प्रयासों की जीत
इस पूरी उपलब्धि पर बात करते हुए पूनम दीदी ने स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक सम्मान की असली हकदार वे ग्रामीण महिलाएं हैं जो हर दिन अपनी बेटियों की शिक्षा सुनिश्चित करने और बाल विवाह के खिलाफ डटी रहती हैं। खुशबू अवस्थी ने वैश्विक मंच पर इन महिलाओं का नाम लेकर पूरे समाज का मान बढ़ाया है। यह पुरस्कार किसी एक व्यक्ति या विशेष संस्था की उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन सभी महिलाओं के साझा प्रयासों का परिणाम है जिन्होंने इस कठिन मुहिम को आज इस मुकाम तक पहुंचाया है।



















