मध्य प्रदेश के सतना में यदि कोई सबसे किफायती और जायकेदार नाश्ते की तलाश में निकलता है, तो राजू भैया के समोसों का जिक्र जरूर सामने आता है। शहर में पिछले लगभग 20 साल से एक बेहद साधारण टपरा लोगों को ऐसा अनूठा स्वाद परोस रहा है कि वहां एक बार आने वाला व्यक्ति दोबारा खींचा चला आता है। इस छोटी सी दुकान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां केवल मजदूर वर्ग या आम लोग ही नहीं, बल्कि नौकरीपेशा लोग, बड़े कर्मचारी, छात्र और आसपास के स्थानीय दुकानदार भी नाश्ता करने पहुंचते हैं। जेब पर भारी न पड़ने वाली कीमत, गरमा-गरम समोसे और उनके साथ मिलने वाली खास चटनी इस जगह की पहचान बन चुके हैं।
शुरुआत से लेकर आज तक का सफर और कीमतें
दुकान चलाने वाले राजू कुशवाहा ने बताया कि जब उन्होंने यह काम शुरू किया था, तब बाजार में 5 रुपये के 2 समोसे मिलते थे। वक्त के साथ धीरे-धीरे महंगाई बढ़ी और कुछ साल पहले इसकी कीमतों में भी बदलाव करना पड़ा। हालांकि आज भी यहां 10 रुपये में 2 समोसे आसानी से मिल जाते हैं, जिसके चलते कम बजट में बढ़िया स्वाद चाहने वालों की लंबी कतारें लगती हैं। राजू भैया बताते हैं कि उन्होंने इस कारोबार की शुरुआत बहुत ही छोटे स्तर पर की थी। उस समय उनके पास केवल एक ठेला हुआ करता था और वे सीमित मात्रा में समोसे बनाकर बेचते थे। धीरे-धीरे स्थानीय लोगों को उनका स्वाद भाने लगा और ग्राहकों का दायरा लगातार बढ़ता चला गया।
रोजाना की बिक्री और परिवार का गुजारा
राजू के अनुसार उनके यहां हर रोज कम से कम 400 से 500 समोसे बिक जाते हैं। इस हिसाब से उनकी दैनिक बिक्री करीब 2500 रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि यह कमाई मौसम और ग्राहकों की भीड़ के आधार पर थोड़ी कम या ज्यादा भी होती रहती है। गौर करने वाली बात यह है कि इसी छोटे से समोसे के व्यापार ने उनके पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। राजू भैया साझा करते हैं कि शुरुआती दिनों में उनके पास आगे बढ़ने के लिए ज्यादा साधन मौजूद नहीं थे, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और ग्राहकों के अटूट भरोसे के दम पर उनका काम आगे बढ़ता गया। आज स्थिति यह है कि उनके बच्चों की पूरी पढ़ाई इसी कमाई के जरिए मुमकिन हो पाई है और परिवार का जीवन स्तर पहले से कहीं अधिक बेहतर हो चुका है।
गैस के बजाय अंगीठी पर तैयार होते हैं समोसे
राजू भैया के समोसे सिर्फ अपनी कम कीमत के कारण ही चर्चा में नहीं रहते हैं, बल्कि उनके पकने का तरीका भी बेहद अलग है। यहां समोसे आधुनिक गैस चूल्हों पर नहीं बल्कि पारंपरिक अंगीठी पर धीमी आंच में तैयार किए जाते हैं। यही वजह है कि इनके स्वाद में एक अलग ही सोंधापन और खासियत महसूस होती है। इन गरमा-गरम समोसों के साथ परोसी जाने वाली खास चटनी भी खाने वालों को बहुत पसंद आती है। इस दुकान पर नियमित तौर पर आने वाले पुराने ग्राहक बताते हैं कि यूं तो आसपास के इलाकों में समोसे बेचने वाले कई लोग हैं, लेकिन जो बात राजू भैया के यहां मिलती है वह अन्यत्र दुर्लभ है। यही खास स्वाद लोगों को बार-बार उनकी दुकान की तरफ खींच लाता है।
समोसे के साथ आलूबड़ा और ब्रेड पकोड़ा
यहां सिर्फ समोसों तक ही नाश्ते की वैरायटी सीमित नहीं है। राजू भैया के टपरे पर स्वादिष्ट आलूबड़ा भी बड़ी तन्मयता से तैयार किया जाता है। इसके अलावा सुबह के वक्त स्कूल-कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों की पसंद का विशेष ध्यान रखते हुए गरमा-गरम ब्रेड पकोड़े भी बनाए जाते हैं। ये अन्य चीजों की तरह 10 रुपये में 2 के हिसाब से मिल जाते हैं। सुबह के वक्त पढ़ाई या अपनी नौकरी पर निकलने वाले लोग जल्दी में हल्का और स्वादिष्ट नाश्ता करने के लिए इसी ठिकाने का रुख करते हैं।
9 साल से आ रहे हैं ग्राहक, दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग
राजू भैया के पुराने और निष्ठावान ग्राहकों में शामिल पंकज रावत बताते हैं कि वे पिछले करीब 9 वर्षों से लगातार यहां समोसे खाने आ रहे हैं। उन्हें और उनके साथियों को बचपन के दिनों से ही इस जगह पर आकर नाश्ता करने की आदत सी बन गई है। पंकज का कहना है कि यहां के समोसे और चटनी का मेल इतना बेहतरीन है कि बड़े-बड़े और महंगे रेस्टोरेंट में जाकर खाने का शौक रखने वाले लोग भी खिंचे चले आते हैं। ग्राहकों का यह विश्वास ही इस छोटी सी दुकान की सबसे बड़ी पूंजी बन चुका है।
सुबह से दोपहर तक रहता है ग्राहकों का तांता
राजू भैया का यह लोकप्रिय टपरा सुबह लगभग 8 बजे ग्राहकों के लिए खुल जाता है और दोपहर ढाई से 3 बजे के आसपास समोसे खत्म होने पर बंद कर दिया जाता है। शाम के वक्त यहां किसी प्रकार की दुकान नहीं लगाई जाती है। इसके बावजूद सुबह से लेकर दोपहर तक खरीदारों की लगातार आवाजाही बनी रहती है। कोई ग्राहक अकेले दो समोसे खाने आता है, तो कोई अपने घर के बच्चों के लिए पैक करवाकर ले जाता है। करीब दो दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे इस छोटे से टपरे ने इलाके में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान कायम कर ली है। राजू भैया के समोसों की सबसे बड़ी खूबी यही है कि वहां स्वाद से कोई समझौता किए बिना कीमत को आम आदमी की पहुंच में रखा गया है। शायद यही मुख्य कारण है कि 20 साल बीत जाने के बाद भी इस साधारण टपरे का स्वाद लोगों की जुबान पर पूरी शिद्दत से कायम है।



















