मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर पूजा-अर्चना के बाद चढ़ाए गए फूल अक्सर कचरे का हिस्सा बन जाते हैं या नदियों और नालों में बहा दिए जाते हैं। इस पर्यावरणीय समस्या से निपटने के लिए उत्तर प्रदेश के गाजीपुर स्थित पीजी कॉलेज की गृह विज्ञान की छात्राओं ने एक अनुकरणीय पहल की है। छात्राओं ने पूजा के बाद बेकार हो चुके गुलाब और गेंदे के फूलों का इस्तेमाल करके उच्च गुणवत्ता वाली सुगंधित धूप तैयार की है। यह प्रयोग न केवल धार्मिक अवशेषों का सम्मानपूर्वक पुनर्चक्रण करता है बल्कि शून्य-अपशिष्ट का एक व्यावहारिक संदेश भी देता है।
शिक्षिका की प्रेरणा से दिवाली से ठीक पहले हुई शुरुआत
गृह विज्ञान विभाग की छात्रा खुशी ने इस अभिनव प्रयोग की शुरुआत की। खुशी के अनुसार इस परियोजना का विचार उन्हें अपनी गृह विज्ञान की शिक्षिका से मिला था। दिवाली त्यौहार से लगभग एक सप्ताह पूर्व इस योजना पर काम शुरू किया गया। इस पूरी मुहिम में खुशी के साथ उनकी सहपाठी छात्राएं नाज इकबाल, इशिका, कंचन, लवली, जलसा, नेहा, निशा और नीलम भी बराबरी से शामिल रहीं। सभी छात्राओं का साझा लक्ष्य मंदिरों से निकलने वाले जैव-अपशिष्ट को सड़ने से बचाना और उसे एक उपयोगी उत्पाद में तब्दील करना था।
फूलों के संग्रह से धूप बनाने की पूरी चरणबद्ध प्रक्रिया
बेकार फूलों से धूप बनाने की प्रक्रिया काफी व्यवस्थित और प्राकृतिक है। सबसे पहले स्थानीय मंदिरों से चढ़ाए गए गुलाब और गेंदे के बासी फूलों को एकत्र किया जाता है। इसके बाद इन पंखुड़ियों को धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है। वातावरण और धूप की तीव्रता के अनुसार फूलों को पूरी तरह सूखने में लगभग एक दिन का समय लगता है। जब पंखुड़ियां पूरी तरह कड़क हो जाती हैं, तब उन्हें मिक्सर या ग्राइंडर की मदद से बारीक पीसकर पाउडर में बदल लिया जाता है।
तैयार फूल के पाउडर में विशिष्ट औषधीय और प्राकृतिक सामग्री मिलाई जाती है। इस मिश्रण में पारंपरिक हवन सामग्री, दालचीनी का पाउडर, लौंग और शुद्ध शहद की कुछ बूंदें शामिल की जाती हैं। दालचीनी और लौंग धूप जलते समय एक भीनी और प्राकृतिक सुगंध उत्पन्न करते हैं, जबकि कपूर का प्रयोग भी खुशबू और पवित्रता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। मिश्रण को आपस में जोड़ने और सही नमी देने का काम शहद करता है, जिससे धूप को मनचाहा आकार देना आसान हो जाता है।
उत्पादन समय और कचरा प्रबंधन पर प्रभाव
छात्राओं के अनुसार सामग्री मिलाने से लेकर अंतिम उत्पाद तैयार होने में कुल मिलाकर लगभग एक घंटे की समयावधि लगती है। एक बार मिश्रण तैयार हो जाने के बाद, धूप की एक बत्ती को हाथों से आकार देने में मात्र एक मिनट का समय लगता है। यह तरीका न केवल घर पर आसानी से अपनाया जा सकता है, बल्कि इससे घरेलू या कुटीर उद्योग के स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। धार्मिक स्थलों पर रोज़ाना टन के हिसाब से बर्बाद होने वाले फूलों को इस विधि से बचाकर उपयोगी धूप में बदला जा सकता है।



















