खेती किसानी के क्षेत्र में यदि थोड़ी सूझबूझ और आधुनिक तरीकों को अपनाया जाए, तो किसान एक ही जमीन से भारी मुनाफा कमा सकते हैं। आमतौर पर किसानों को देखा जाता है कि वे आम के बागान तो लगाते हैं, लेकिन जब तक आम के पेड़ पूरी तरह से फल देने लायक तैयार होते हैं, तब तक बागों के बीच की जमीन खाली पड़ी रहती है। इस खाली पड़ी जमीन का कोई उपयोग नहीं किया जाता है और वह यूं ही बंजर जैसी पड़ी रहती है। लेकिन झारखंड के देवघर जिले के एक प्रगतिशील किसान ने इसी खाली जमीन को अपनी आय का मुख्य स्रोत बना लिया है। उन्होंने आम के बागान के अंदर ही टमाटर की बंपर फसल उगाने की अनोखी शुरुआत की है। इस शानदार पहल से एक तरफ जहां आम के पौधे धीरे-धीरे बड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके बीच की खाली जगह पर टमाटर की फसल लहलहा रही है। इससे किसान को एक ही खेत से दो तरह के कृषि उत्पादों का उत्पादन मिलने की पूरी उम्मीद है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
दो एकड़ जमीन में की जा रही है टमाटर की खेती
देवघर के रहने वाले किसान वकील यादव ने कृषि क्षेत्र में यह बेहतरीन और नई तरकीब अपनाई है। उन्होंने अपनी खेती के अनुभव साझा करते हुए बताया कि आम के पौधों को लगाते समय उनके बीच आमतौर पर 30 से 60 फीट तक की पर्याप्त दूरी छोड़ी जाती है। ऐसी स्थिति में पौधों के बीच का यह विशाल क्षेत्र पूरी तरह खाली रह जाता है। अधिकांश किसान इस तरफ ध्यान नहीं देते और यह जमीन सालों-साल बिना किसी इस्तेमाल के खाली पड़ी रहती है। वकील यादव ने विचार किया कि जब तक आम के पौधे छोटे हैं और उनके बीच भरपूर जगह व धूप उपलब्ध है, तब तक इस भूमि का उपयोग सब्जियों की खेती के लिए किया जाना चाहिए। इसी दूरगामी सोच के साथ उन्होंने अपने आम के बागान में टमाटर की खेती का श्रीगणेश किया। उनका कुल आम का बागान करीब 5 एकड़ के विस्तृत क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें से लगभग 2 एकड़ जमीन पर उन्होंने विशेष रूप से टमाटर की फसल उगाई है। किसान के अनुसार वर्तमान में आम के पौधे इतने बड़े नहीं हुए हैं कि उनकी घनी छाया से टमाटर की फसल को किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचे। इस वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके से खेत की एक इंच जमीन भी बेकार नहीं जाती और एक ही भूखंड पर दो अलग-अलग तरह की फसलों का भरपूर लाभ मिल जाता है। उनका मानना है कि यदि कृषि संबंधी योजनाएं सही और सटीक तरीके से बनाई जाएं, तो बागवानी से जुड़े किसान अपनी आय में कई गुना बढ़ोतरी कर सकते हैं।
भविष्य के लिए भी तैयार की गई है खास रणनीति
वकील यादव ने केवल वर्तमान की ही नहीं बल्कि भविष्य की खेती को ध्यान में रखते हुए भी अपनी पूरी तैयारी कर रखी है। उनका स्पष्ट रूप से कहना है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे आम के पौधे बड़े होकर विशाल पेड़ों का रूप लेंगे, वैसे-वैसे पूरे बागान में पेड़ों की छाया का दायरा भी बढ़ता जाएगा। ऐसी परिस्थितियों में टमाटर जैसी फसलों को उगाना कठिन हो सकता है, जिन्हें बढ़ने के लिए भरपूर धूप की आवश्यकता होती है। लेकिन इसका यह कतई मतलब नहीं है कि उस समय बागान की जमीन बेकार हो जाएगी या उसका कोई उपयोग नहीं बचेगा। उस दौरान किसान भाई छाया में आसानी से और अच्छी तरह से तैयार होने वाली अन्य फसलों की खेती कर सकते हैं। इसके विकल्पों के रूप में हल्दी, जिमीकंद यानी ओल और अन्य छाया-सहिष्णु उपयुक्त फसलों को आसानी से लगाया जा सकता है। यानी साफ है कि आम के पौधों के पूरी तरह से बड़े होने के बाद भी बागान की खाली पड़ी जमीन का कृषि कार्यों के लिए लगातार प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे किसानों की आमदनी पर कभी कोई विराम नहीं लगेगा।
लागत से तीन गुना तक मुनाफे की मजबूत उम्मीद
किसी भी खेती में लागत और मुनाफे का गणित सबसे महत्वपूर्ण होता है। इस मामले में किसान वकील यादव ने बहुत कम लागत में बंपर मुनाफा कमाने का रास्ता निकाला है। उन्होंने लगभग 30 से 40 हजार रुपये की कुल लागत लगाकर 2 एकड़ की बंजर या खाली पड़ी जमीन में टमाटर की बंपर खेती की है। उन्हें पूरा भरोसा और उम्मीद है कि यदि मौसम का मिजाज अनुकूल रहा और फसल पूरी तरह सुरक्षित रही, तो उन्हें इस खेती से करीब 1 लाख से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो सकता है। हालांकि, कृषि क्षेत्र की अनिश्चितताओं को देखते हुए प्राकृतिक आपदाओं, अचानक बदलने वाले मौसम की मार और फसल में लगने वाली विभिन्न बीमारियों से होने वाले संभावित नुकसान की आशंका हमेशा बनी रहती है। इसके बावजूद किसान का दृढ़ विश्वास है कि आधुनिक खेती में केवल एक ही पारंपरिक फसल पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय एक ही जमीन पर विविधता अपनाते हुए अलग-अलग फसलों की बुवाई करना कहीं अधिक समझदारी भरा कदम है। इससे न केवल जोखिम कम होता है, बल्कि किसानों की आर्थिक तंगी भी दूर होती है और उन्हें साल भर नियमित आमदनी का साधन मिलता रहता है।



















