बिहार के दरभंगा की रहने वाली प्रिया ने बिना किसी कोचिंग के 70वीं बीपीएससी परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल कर मिथिला का नाम रोशन कर दिया है। सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर मिली यह कामयाबी अब कई अभ्यर्थियों के लिए मिसाल बन गई है।
फैक्चुअल सवालों पर रही सबसे ज्यादा पकड़
प्रिया के मुताबिक, इस बार बीपीएससी परीक्षा में फैक्चुअल यानी तथ्य आधारित सवालों की भरमार रही और ज्यादातर सवाल उन्हीं मुद्दों से जुड़े थे जो हाल के दिनों में करंट अफेयर्स में छाए रहे। उनका कहना है कि मेंस परीक्षा में पिछले सालों के प्रश्नों यानी PYQ की भूमिका बेहद अहम होती है, इसलिए उन्होंने सबसे पहले सिलेबस को ठीक से समझा और उसी के हिसाब से टॉपिक बांटकर तैयारी शुरू की। हर दिन करंट अफेयर्स पढ़ना और उसके नोट्स बनाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण जैसे विषय जब भी खबरों में आए, प्रिया ने उन पर खास ध्यान दिया, क्योंकि उन्हें अंदाजा था कि परीक्षा में इन्हीं मुद्दों से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं।
इंटरव्यू में पूछे गए सबरीमाला और महिला अधिकारों से जुड़े सवाल
प्रिया बताती हैं कि उनका इंटरव्यू काफी सहज माहौल में हुआ और बोर्ड ने उनसे पूछा कि अधिकारी बनने के बाद वे अपने पद पर क्या करना चाहेंगी। चूंकि प्रिया का जुड़ाव सामाजिक मुद्दों से रहा है, इसलिए बोर्ड ने उनसे सबरीमाला विवाद और महिलाओं से जुड़े सवाल भी किए। प्रिया ने हर सवाल का ईमानदारी से जवाब दिया और बोर्ड ने उनकी बातों को बड़े गौर से सुना।
रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई, सोशल मीडिया से दूरी
अपनी सफलता का राज बताते हुए प्रिया कहती हैं कि उन्होंने रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई की और इस दौरान सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली। हर हफ्ते मॉक टेस्ट देना उनकी तैयारी का अहम हिस्सा था, जिससे वे अपनी गलतियों को पहचानकर सुधार करती रहीं। प्रिया का कहना है कि गांव-कस्बे की लड़कियों के पास भले ही संसाधन सीमित हों, लेकिन हौसला बड़ा होना चाहिए। वे बताती हैं कि उनके मां-पापा ने कभी उन पर पढ़ाई का दबाव नहीं डाला, बल्कि हमेशा भरोसा जताया, और यही भरोसा उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
मिथिलांचल की बेटियों को प्रिया का संदेश
प्रिया मिथिलांचल की हर बेटी को खुद पर भरोसा रखने की सलाह देती हैं। उनका मानना है कि सफलता के लिए कोचिंग जरूरी नहीं, बल्कि सही दिशा जरूरी है। उन्होंने कहा, "सिलेबस आपका गुरु है और अनुशासन आपका दोस्त." प्रिया की सलाह है कि अभ्यर्थी फैक्चुअल जानकारी के साथ-साथ एनालिटिकल सोच भी विकसित करें और करंट अफेयर्स को अपने जवाबों में पिरोना सीखें, क्योंकि हार मानना कोई विकल्प नहीं है।
दरभंगा की इस बेटी की उड़ान यह साबित करती है कि मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनके सपनों में जान होती है। बिना किसी कोचिंग के सिर्फ सेल्फ स्टडी के दम पर अफसर बनने का प्रिया का यह सफर आज मिथिला के लिए गर्व का विषय बन चुका है।



















