सपनों को पूरा करने के लिए बड़े शहरों के संसाधन या महंगी कोचिंग होना ही अनिवार्य नहीं है, बल्कि मजबूत हौसला हो तो किसी भी मुश्किल परिस्थिति को मात दी जा सकती है। ओडिशा के मयूरभंज जिले के अंतर्गत आने वाले महुलापंखा गांव की रहने वाली दो सगी बहनों, यज्ञसेनी खतुआ और दिव्यसेनी खतुआ ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाली इन दोनों बेटियों ने किसी भी प्रकार की प्राइवेट कोचिंग की मदद लिए बिना देश की सबसे प्रतिष्ठित और कठिन मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक नीट को सफलतापूर्वक पास कर लिया है।
साधारण परिवार और असीमित संघर्ष
मयूरभंज जिले के कपतिपदा ब्लॉक में स्थित माझिगड़िया पंचायत के महुलापंखा गांव की यह कहानी हर किसी को प्रेरित करती है। इन दोनों होनहार बहनों के पिता गौरांग खतुआ खेती करते हैं और माता सुनीता आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका के रूप में अपनी सेवाएं देती हैं। बेहद सीमित आय के बल पर परिवार का भरण-पोषण करना ही एक बड़ी चुनौती था, ऐसे में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की भारी-भरकम फीस भरना और शहर जाकर महंगे संस्थानों में पढ़ाई करना इस परिवार के वश में नहीं था। आर्थिक तंगी के बावजूद बेटियों के हौसले में कोई कमी नहीं आई और उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर सफलता हासिल की।
नेटवर्क की तलाश में पहाड़ों पर बनती थी पाठशाला
कोचिंग के अभाव में दोनों बहनों ने पूरी तरह से स्व-अध्ययन और ऑनलाइन माध्यमों पर निर्भर रहने का फैसला किया, लेकिन उनके सामने एक और बड़ी तकनीकी बाधा खड़ी थी। उनके गांव में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब हुआ करती थी, जिसके कारण इंटरनेट चलाना या ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़ना असंभव सा प्रतीत होता था। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए उन्होंने एक अनोखा रास्ता निकाला। दोनों बहनें अपनी किताबें और मोबाइल लेकर रोज गांव के समीप स्थित पहाड़ियों पर चढ़ जाती थीं। पहाड़ी की चोटी पर जहां सिग्नल मिल जाता था, वे वहीं बैठकर घंटों पढ़ाई करती थीं और कठिन मौसम की परवाह किए बिना अपनी तैयारी जारी रखती थीं।
निरंतर प्रयास और शानदार सफलता
बड़ी बहन यज्ञसेनी खतुआ ने हार न मानते हुए लगातार प्रयास जारी रखा और अपने तीसरे प्रयास में आखिरकार नीट की परीक्षा क्रैक कर ली। वहीं छोटी बहन दिव्यसेनी खतुआ ने अपनी बड़ी बहन के संघर्षों और अनुभव से प्रेरणा लेते हुए अपने पहले ही प्रयास में इस कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। दोनों बहनों की एक साथ इस उपलब्धि ने उनके पूरे परिवार और पूरे इलाके का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है और उनकी यह कामयाबी अब दूर-दराज के छात्रों के लिए एक बड़ा उदाहरण बन चुकी है।
ग्रामीण छात्रों के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल
आज के दौर में जहां मेडिकल या इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोटा जैसे बड़े शैक्षणिक केंद्रों की ओर दौड़ लगाना एक आम चलन बन चुका है, वहीं यज्ञसेनी और दिव्यसेनी की यह अनूठी कहानी कुछ और ही बयां करती है। यह सफलता हमें सिखाती है कि यदि इरादे मजबूत हों और सही दिशा में मेहनत की जाए, तो बिना किसी भारी भरकम खर्च के भी बड़े से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा, यह इस बात को भी रेखांकित करती है कि देश के दूरदराज के इलाकों में डिजिटल तकनीक और इंटरनेट का किस तरह से सकारात्मक उपयोग किया जा सकता है।



















