झारखंड के बोकारो जिले में स्थित पेटरवार प्रखंड के अंबाडीह गांव के एक प्रगतिशील किसान युवराज महतो कृषि क्षेत्र में एक बेहतरीन मिसाल कायम कर रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती के ढर्रे को बदलकर नकदी फसलों को तरजीह दी है। अपने 70 डिसमिल खेत में मूंगफली उगाकर वे कम लागत और कम समय में शानदार मुनाफा हासिल कर रहे हैं। उनके इस सफल प्रयास ने आसपास के अन्य किसानों को भी व्यापारिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है।
पारंपरिक फसलों से नकदी खेती की तरफ बदलाव और पारिवारिक प्रेरणा
युवराज महतो पिछले 15 से 20 वर्षों से निरंतर मूंगफली की खेती करते आ रहे हैं। उन्हें खेती की प्रारंभिक प्रेरणा और सीख अपने बाप-दादा से मिली थी। पूर्वजों से मिले मार्गदर्शन से प्रेरित होकर उन्होंने कृषि को ही अपना मुख्य व्यवसाय बनाने का फैसला किया। शुरुआत में वे पारंपरिक अनाज की फसलें उगाते थे, लेकिन उससे होने वाली आमदनी काफी सीमित रहती थी। उन्होंने अनुभव किया कि केवल पारंपरिक खेती से परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव नहीं आ सकता। इसी सोच के साथ उन्होंने धीरे-धीरे नकदी फसलों पर ध्यान केंद्रित किया और मूंगफली की व्यावसायिक खेती शुरू की।
10 हजार रुपये की लागत और 60 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा
मूंगफली की खेती के वित्तीय पहलू को समझाते हुए युवराज महतो ने बताया कि उन्होंने जून महीने की शुरुआत में अपनी 70 डिसमिल जमीन पर मूंगफली की बुआई की थी। फसल की किस्म के अनुसार मूंगफली लगभग तीन से चार महीने की अवधि में पूरी तरह पककर तैयार हो जाती है। 70 डिसमिल क्षेत्रफल में मूंगफली बोने और उसकी देखरेख करने में कुल मिलाकर करीब 10 हजार रुपये का खर्च आता है।
इस 70 डिसमिल खेत से उन्हें लगभग 20 क्विंटल मूंगफली का कुल उत्पादन मिल जाता है। बाजार में मूंगफली की औसत कीमत लगभग 35 रुपये प्रति किलोग्राम रहती है। इस दर पर 20 क्विंटल (2000 किलोग्राम) मूंगफली बेचने से करीब 70 हजार रुपये की कुल बिक्री आय प्राप्त होती है। इसमें से 10 हजार रुपये की लागत घटाने पर लगभग 60 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा बचता है। इस प्रकार महज 3 से 4 महीनों में शुरुआती लागत पर 6 गुना तक की कमाई हो जाती है।
उन्नत किस्म के बीज और बुआई के सही समय का महत्व
मूंगफली की खेती से अधिक उपज और बढ़िया कमाई हासिल करने के लिए युवराज महतो ने किसानों के लिए कुछ जरूरी सलाह दी है। उनका कहना है कि बुआई के लिए हमेशा अच्छी गुणवत्ता और बड़े दाने वाले उन्नत किस्म के बीजों का चयन करना चाहिए। बीज का बेहतर चुनाव फसल की पैदावार और बाजार मूल्य को सीधा प्रभावित करता है।
इसके साथ ही बुआई के सही समय का चुनाव भी बेहद महत्वपूर्ण है। जून का महीना और मानसूनी बरसात का आगमन मूंगफली लगाने के लिए सबसे आदर्श समय माना जाता है। इस दौरान मिट्टी में प्राकृतिक नमी की प्रचुरता रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत बहुत कम पड़ती है और पौधे के शुरुआती विकास को मजबूती मिलती है। यदि किसान इन बुनियादी बातों का ध्यान रखें, तो कम समय और कम लागत में खेती से मोटी कमाई की जा सकती है।



















