मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक नगरी उज्जैन से निकलकर निकिता पोरवाल अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का परचम लहराने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड 2024 का प्रतिष्ठित ताज अपने नाम करने वाली निकिता 9 अगस्त को वियतनाम में आयोजित होने वाली 73वीं मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता में भाग लेंगी। दुनिया भर के 120 से अधिक देशों की सुंदरियों और प्रतिभागियों के बीच वह भारत की मजबूत दावेदारी पेश करेंगी। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए रवाना होने से पहले उन्होंने अपनी बहुआयामी तैयारियों, व्यक्तिगत सपनों और अपने सामाजिक मिशन को लेकर अहम जानकारियां साझा की हैं। मध्य प्रदेश के इतिहास में वह पहली ऐसी प्रतिभागी हैं जिन्होंने फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड का खिताब जीतकर यह अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है।
रंगमंच, अभिनय और 8 वर्ष की उम्र में पहली पुस्तक: निकिता का कलात्मक सफर
निकिता पोरवाल की पहचान केवल ग्लैमर जगत तक सीमित नहीं है, बल्कि कला, साहित्य और रंगमंच के क्षेत्र में भी उनका योगदान बेहद व्यापक रहा है। उन्होंने अभिनय और नाटक लेखन के क्षेत्र में अपनी गहरी छाप छोड़ी है। अब तक वह 60 से अधिक विविध नाटकों में बतौर अभिनेत्री अपने अभिनय का कौशल दिखा चुकी हैं। इसके अलावा, साहित्य के प्रति उनके रुझान का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने 350 पन्नों का एक भव्य नाटक 'कृष्णा लीला' खुद लिखा है। रचनात्मकता के प्रति उनका यह लगाव बेहद बचपन से ही दिखने लगा था, जब महज आठ वर्ष की छोटी सी उम्र में उन्होंने अपनी पहली पुस्तक 'स्माइल्स ऑल द वे' लिखकर सभी को चकित कर दिया था। रंगमंच की दुनिया में सक्रिय भूमिका निभाते हुए वह 'रंगरेज' थिएटर ग्रुप की क्रिएटिव डायरेक्टर के पद पर भी अपनी सेवाएं दे रही हैं।
राष्ट्रीय मंचों पर उपस्थिति, रेड कार्पेट और 'द फैब लिस्ट 2025'
फेमिना मिस इंडिया वर्ल्ड का ताज हासिल करने के बाद निकिता पोरवाल ने देश के कई प्रमुख राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मंचों पर अपनी मजबूत पहचान कायम की है। वह गुजरात टूरिज्म का मुख्य चेहरा बनीं और राज्य के पर्यटन को बढ़ावा देने वाले अभियानों में शामिल रहीं। इसके साथ ही उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के एक विशेष कैलेंडर शूट में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जहां उन्होंने पूर्वोत्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक सुंदरता को उजागर किया। निकिता ने विभिन्न TEDx मंचों पर एक प्रभावशाली वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए हैं और युवाओं को प्रेरित किया है। फैशन और ग्लैमर जगत की बात करें तो वह प्रतिष्ठित फेमिना मैगजीन के कवर पेज पर नजर आ चुकी हैं और फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के भव्य रेड कार्पेट पर भी अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। इतना ही नहीं, फेमिना द्वारा जारी की गई 'द फैब लिस्ट 2025' में भी उन्हें खास स्थान दिया गया है, जो उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।
सामाजिक मिशन 'माटी': आदिवासी महिलाओं और बच्चों का सशक्तीकरण
ग्लैमर और सौंदर्य प्रतियोगिताओं की चकाचौंध के बीच निकिता पोरवाल ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को भी प्राथमिकता दी है। मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता के महत्वपूर्ण अंग 'ब्यूटी विद ए पर्पस' के तहत उन्होंने 'माटी' नामक एक विशेष प्रोजेक्ट की शुरुआत की है। यह अभियान मुख्य रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं तथा बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र सशक्तीकरण पर केंद्रित है। इस सामाजिक पहल के जरिए उन्होंने अब तक दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचकर वाटर फिल्टर और दूध पाउडर जैसी बुनियादी और स्वास्थ्यवर्धक सामग्री उपलब्ध कराई है। निकिता का मानना है कि यदि उन्हें मिस वर्ल्ड का ताज मिलता है, तो वह इस 'माटी' अभियान को वैश्विक स्तर पर विस्तार देना चाहेंगी। उनका उद्देश्य है कि इस पहल का लाभ केवल भारत तक सीमित न रहे, बल्कि दुनिया भर के विभिन्न आदिवासी और वंचित समुदायों तक इसका सीधा फायदा पहुंच सके।
उज्जैन की विरासत और भारत का गौरव बढ़ाने का संकल्प
निकिता पोरवाल के अनुसार, मिस इंडिया से मिस वर्ल्ड तक की यह यात्रा उनके लिए कई महत्वपूर्ण सीखों और जीवन के गहरे अनुभवों से भरी रही है। गांवों का दौरा करना, जमीनी स्तर पर आदिवासी महिलाओं के बीच काम करना और हर नई चुनौती से सीखना, इन सभी प्रक्रियाओं ने उनके व्यक्तित्व को अत्यधिक मजबूत और संवेदनशील बनाया है। उनका कहना है कि वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है, और वह देश की समृद्ध विरासत और पहचान को पूरी निष्ठा के साथ दुनिया के सामने रखेंगी। वियतनाम में बेहतर जुड़ाव बनाने के उद्देश्य से उन्होंने वहां की स्थानीय संस्कृति, इतिहास और परंपराओं के बारे में भी गहन जानकारी जुटाई है।
निकिता अपनी सफलता का बड़ा श्रेय उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को देती हैं। उनका मानना है कि बचपन से सुनी पौराणिक कथाओं, धार्मिक इतिहास और उज्जैन के आध्यात्मिक वातावरण ने उनके सोचने के नजरिए को निखारा है और उन्हें एक बेहतर कथाकार बनाया है। जब वह मिस वर्ल्ड के मंच पर उतरेंगी, तो उनके साथ उज्जैन की पावन संस्कृति, भारत की महान परंपराएं और अपनी जड़ों का गौरव भी होगा। पूरे देश को उम्मीद है कि निकिता वियतनाम में भारत का नाम रोशन करेंगी और मिस वर्ल्ड का ताज देश वापस लेकर आएंगी।



















