कड़ी मेहनत और पक्का इरादा हो तो इंसान विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी तकदीर खुद लिख सकता है। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के रहने वाले 45 वर्षीय देउसराज यादव ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। उनकी यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक बड़ी मिसाल है जो कम संसाधनों में भी कुछ बड़ा करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने केवल हाई स्कूल तक की शिक्षा प्राप्त की है और अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उन्हें लंबे समय तक घर से दूर रहना पड़ा था। आज वे अपने ही इलाके में अपना छोटा सा कारोबार चलाकर आर्थिक रूप से पूरी तरह मजबूत बन चुके हैं।
दिल्ली में 15 साल की नौकरी और कोरोना का संकट
देउसराज यादव ने दसवीं की परीक्षा पास करने के बाद आगे की पढ़ाई जारी रखने की सोची थी, लेकिन घर की आर्थिक स्थिति इसके आड़े आ गई। पढ़ाई के लिए पर्याप्त धन न होने के कारण उन्हें मजबूरी में अपना घर, गांव और जिला छोड़कर देश की राजधानी दिल्ली का रुख करना पड़ा। आजीविका की तलाश में उन्होंने दिल्ली में रहकर लगातार 15 वर्षों तक नौकरी की और किसी तरह अपना जीवनयापन किया। हालांकि वक्त का पहिया तब घूमा जब साल 2020 में देश में कोरोना महामारी ने दस्तक दी। इस मुश्किल दौर में उनकी नौकरी छूट गई और वे पूरी तरह बेरोजगार होकर अपने गृह जनपद सुल्तानपुर लौटने को विवश हो गए। नौकरी जाने के बाद उनके पास जमा पूंजी के नाम पर कुछ ही रुपये बचे थे और उनका मन काफी निराश था, लेकिन भीतर का आत्मविश्वास अभी भी जिंदा था। उन्होंने हार मानने के बजाय खुद के पैरों पर खड़े होने का संकल्प लिया और दिल्ली वापस न जाकर अपने ही गांव में रहकर कुछ नया करने की योजना बनाई।
काछा भेटौरा चौराहे पर शुरू किया समोसे का काम
गांव लौटने के बाद देउसराज ने सुल्तानपुर के काछा भेटौरा चौराहे पर समोसा बनाने और बेचने का काम शुरू किया। इस व्यवसाय को शुरू किए हुए उन्हें 5 वर्ष हो चुके हैं और इन पांच सालों में उन्होंने अपनी मेहनत के दम पर एक अलग पहचान बना ली है। उनके बनाए समोसे का स्वाद इतना उम्दा है कि वहां केवल आसपास के गांवों के लोग ही नहीं खींचे चले आते, बल्कि खुद सुल्तानपुर शहर के लोग भी उनका समोसा खाने के लिए विशेष तौर पर वहां पहुंचते हैं। उनके समोसे का आकार बहुत ज्यादा बड़ा नहीं है, लेकिन उसका जायका ऐसा है कि खाने वाले उसकी तारीफ करते नहीं थकते। यदि कोई व्यक्ति उनके इन खास समोसों का स्वाद चखना चाहता है, तो उसे सुल्तानपुर शहर से लगभग 22 किलोमीटर की दूरी तय करके काछा भेटौरा पहुंचना होगा।
प्रतिदिन 300 से अधिक समोसों की बिक्री
समोसे के इस कारोबार में देउसराज की आमदनी काफी शानदार चल रही है। वे हर दिन 300 से अधिक समोसों की बिक्री करते हैं, जिससे उन्हें रोजाना 2000 से 3000 रुपये तक की शुद्ध कमाई हो जाती है। इस आमदनी से वे न केवल अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं, बल्कि अपने इस छोटे से व्यापार को लगातार और अधिक मजबूत बनाने में भी जुटे हुए हैं। उन्होंने भले ही इस काम की शुरुआत कुछ साल पहले ही की थी, लेकिन आज उनका समोसा पूरे इलाके में अपनी बेहतरीन क्वालिटी और स्वाद के लिए जाना जाता है। उनकी सफलता यह साबित करती है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता, बशर्ते उसे पूरी लगन और ईमानदारी के साथ किया जाए।



















