फिरोजाबाद के गांवों में अब महिलाएं सिर्फ घर के कामकाज तक सीमित नहीं रह गई हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर जिले की लाखों महिलाएं अब अपने दम पर कमाई कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बना रही हैं। पहले घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी अक्सर सिर्फ पुरुषों पर होती थी और गरीब परिवारों की माली हालत में मुश्किल से कोई सुधार दिखता था, लेकिन अब गांव-गांव बने महिला समूहों ने इस तस्वीर को बदलना शुरू कर दिया है।
गांव-गांव बन रहे महिलाओं के समूह
स्वतः रोजगार उपायुक्त तुलिका श्रीवास्तव ने बताया कि गांव में रहने वाली घरेलू महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए हर गांव में अलग-अलग समूह तैयार किए जाते हैं। हर समूह में करीब 20-20 महिलाओं को शामिल किया जाता है। इन्हीं समूहों के जरिए महिलाओं को आजीविका मिशन की योजनाओं और मदद तक पहुंच मिलती है, जिससे कमजोर आर्थिक हालत वाले परिवारों को सीधा फायदा पहुंच रहा है। धीरे-धीरे यह मॉडल जिले के ज्यादातर गांवों में फैल चुका है।
सिलाई से मधुमक्खी पालन तक मुफ्त ट्रेनिंग
सरकार की तरफ से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिलाओं को अलग-अलग हुनर सिखाने के लिए मुफ्त ट्रेनिंग दी जाती है। समूहों के जरिए महिलाओं को सिलाई, ब्यूटी पार्लर, मधुमक्खी पालन, धूपबत्ती और अगरबत्ती बनाने, अचार बनाने और कांच के खिलौने तैयार करने जैसे अलग-अलग कामों में प्रशिक्षित किया जाता है। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद कई महिलाएं इन्हीं हुनर के दम पर अपना खुद का छोटा कारोबार शुरू कर लेती हैं और घर बैठे कमाई करने लगती हैं। इससे उन्हें किसी और पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ती।
विद्युत सखी बनकर लाखों कमा रहीं महिलाएं
ट्रेनिंग के अलावा कुछ महिलाएं अलग-अलग सरकारी विभागों में सखी के तौर पर भी काम कर रही हैं। इनमें से कुछ महिलाएं विद्युत सखी बनी हैं, जो अब लाखों रुपये की कमाई कर रही हैं। तुलिका श्रीवास्तव के मुताबिक समूहों से जुड़ने के बाद अब तक जिले की लाखों महिलाओं के जीवन में बदलाव आया है, और विभाग लगातार नई महिलाओं को समूहों से जोड़ने का काम कर रहा है ताकि वे आत्मनिर्भर बनकर अपनी आजीविका खुद चला सकें। उन्होंने बताया कि यह सिलसिला लगातार जारी है और हर महीने नई महिलाएं इससे जुड़ रही हैं।
जिले में 8797 समूह, सवा लाख से ज्यादा महिलाएं जुड़ीं
आंकड़ों के मुताबिक फिरोजाबाद जिले में करीब 8797 समूह महिलाओं के जरिए चलाए जा रहे हैं, जिनसे एक लाख बाईस हजार महिलाएं जुड़कर काम कर रही हैं। इनमें से सात हजार से ज्यादा समूहों को डेढ़ लाख रुपये तक की धनराशि भी उपलब्ध कराई जा चुकी है, जिससे वे अपना काम आगे बढ़ा सकें। इसके अलावा समूहों से जुड़ी करीब 13620 महिलाएं अब तक लखपति दीदी बन चुकी हैं। इन समूहों से जुड़ने के बाद महिलाओं की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार देखने को मिला है और उनकी सामाजिक पहचान भी मजबूत हुई है।
वंचित परिवारों को जोड़ने के लिए चलेगा विशेष अभियान
अब विभाग की कोशिश उन गरीब परिवारों की महिलाओं तक पहुंचने की है, जो अब भी इस योजना से वंचित हैं। इसके लिए जगह-जगह कैंप लगाए जा रहे हैं ताकि ऐसी महिलाओं को चिन्हित कर समूहों से जोड़ा जा सके। आजीविका मिशन से जुड़ने के लिए महिला का राशन कार्ड धारक होना जरूरी शर्त है। तुलिका श्रीवास्तव ने बताया कि जिलाधिकारी के आदेश पर अब ग्राम पंचायत स्तर पर भी एक अभियान चलाया जाएगा, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाएं समूहों से जुड़ सकें और अपने जीवन में सामाजिक और आर्थिक दोनों तरह का बदलाव ला सकें।




















