उत्तर प्रदेश के अमेठी में महिलाओं की जिंदगी में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जो महिलाएं कभी केवल अपने घरों की चारदीवारी तक सीमित थीं, वे अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रही हैं। इन महिलाओं ने पारंपरिक हस्तशिल्प से लेकर रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले सामान और कपड़ों के निर्माण तक का काम संभाल रखा है। उनके बनाए उत्पाद न केवल स्थानीय दुकानों पर बिक रहे हैं, बल्कि अब ई-कॉमर्स और ऑनलाइन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी उनकी जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है।
विविध उत्पादों से तैयार हो रहा बड़ा कारोबार
अमेठी की महिलाएं 'एक जनपद एक उत्पाद' (ओडीओपी) योजना के तहत चयनित प्रसिद्ध मुंज क्राफ्ट तक ही सीमित नहीं हैं। उन्होंने अपने काम का दायरा काफी बढ़ा लिया है। अब वे मोटे अनाज से बने बिस्कुट, स्वादिष्ट नमकीन, झाड़ू, फिनायल और घर की सफाई के उत्पाद भी बड़े पैमाने पर तैयार कर रही हैं। इसके साथ ही, टेक्सटाइल और कपड़े के बिज़नेस में भी इन महिलाओं ने मजबूत पैठ बनाई है। ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से कपड़ों की बिक्री करके वे हर महीने लगभग 20,000 से 25,000 रुपये तक का मुनाफा कमा रही हैं। इसके अलावा, समूहों से जुड़ी कई अन्य महिलाएं अचार, मुरब्बा, चिप्स और पापड़ जैसे पारंपरिक खाद्य उत्पाद बनाकर भी अच्छी आय हासिल कर रही हैं।
रोजगार से बदली आर्थिक स्थिति और पारिवारिक सोच
स्वयं सहायता समूह से जुड़ी रूबी चौरसिया ने बताया कि उनका समूह मुख्य रूप से पोषाहार तैयार करने का कार्य करता है। पहले रोजगार की तलाश में घर से बाहर भटकना पड़ता था, लेकिन समूह के जरिए अब उन्हें घर पर ही कमाई का जरिया मिल गया है। रूबी का कहना है कि शुरुआत में परिजनों की ओर से थोड़ी रोक-टोक और मनाही थी, लेकिन जैसे-जैसे काम आगे बढ़ा और कमाई होने लगी, परिवार की स्थिति में सुधार आया और घर वालों का नज़रिया भी बदल गया।
स्थानीय महिलाओं को मिल रहा रोजगार का सहारा
समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं की जिंदगी में भी इस बदलाव का बड़ा असर दिखा है। समूह की सदस्य संतोषी का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद महिलाओं को बहुत बड़ा आर्थिक लाभ मिला है। वहीं फूलमती देवी ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि पहले कई तरह की आर्थिक परेशानियां हुआ करती थीं, लेकिन समूह का हिस्सा बनने के बाद से लगातार काम मिल रहा है। उनके काम वाली जगह पर 10 से 20 महिलाएं एक साथ मिलकर काम करती हैं। रोजगार मिलने से ये महिलाएं अब न केवल अपने पैरों पर खड़ी हो चुकी हैं, बल्कि अपने परिवार का दैनिक खर्च भी आसानी से उठा रही हैं।



















