चीन के व्यापारिक जगत में 56 वर्षीय उद्यमी झोउ कुनफेई की प्रेरक यात्रा फिर से चर्चा के केंद्र में आ गई है। कभी स्कूल छोड़कर कम उम्र में एक साधारण फैक्ट्री में मजदूरी करने वाली झोउ अब आधिकारिक तौर पर चीन की सबसे अमीर महिला बन चुकी हैं। हाल ही में बीजिंग में डोनाल्ड ट्रंप की मई यात्रा के दौरान आयोजित एक विशेष औपचारिक भोज में जब वह दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क और ऐपल के टिम कुक के ठीक बीच बैठी नजर आई थीं, तभी से उनकी शख्सियत ने दुनिया भर के उद्योगपतियों और विश्लेषकों का ध्यान खींचा था। सोशल मीडिया पर भी उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि की व्यापक चर्चा हो रही है।
11 साल बाद फिर बनीं देश की सबसे अमीर महिला
28 अक्टूबर को जारी 'हुरुन रिचेस्ट विमेन इन चाइना 2026' की नवीनतम सूची के अनुसार, झोउ कुनफेई की कुल व्यक्तिगत संपत्ति में बीते एक वर्ष के भीतर 15 फीसदी का जोरदार उछाल दर्ज किया गया है। वर्तमान में चीन की सबसे बड़ी ग्लास निर्माता कंपनी 'लेंस टेक्नोलॉजी' की संस्थापक और प्रमुख झोउ की कुल संपत्ति लगभग 14.20 अरब पाउंड यानी करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। संपत्ति में आई इस तेज बढ़त के दम पर उन्होंने पूरे 11 साल के लंबे अंतराल के बाद देश की सबसे अमीर महिला होने का प्रतिष्ठित मुकाम दोबारा अपने नाम कर लिया है।
इस सूची में झोउ ने 'हंसोह फार्मास्युटिकल' की संस्थापक झोंग हुइजुआन को बेहद करीबी अंतर से पीछे छोड़ दिया है। झोंग हुइजुआन की कुल संपत्ति का ताजा आकलन लगभग 124 अरब युआन यानी करीब 13.86 अरब पाउंड लगाया गया है। उल्लेखनीय है कि वैश्विक शोध समूह हुरुन वर्ष 1999 से चीन की सबसे अमीर महिलाओं का ब्योरा प्रकाशित करता आ रहा है। यह सूची विशेष रूप से महिलाओं की व्यक्तिगत संपत्ति के स्वतंत्र मूल्यांकन पर तैयार की जाती है।
110 रुपये की दिहाड़ी और घड़ी की ग्लास फैक्ट्री से शुरुआत
झोउ का जन्म साल 1970 में चीन के हुनान प्रांत में एक साधारण परिवार में हुआ था। पारिवारिक और व्यक्तिगत परिस्थितियों के चलते उन्हें अपनी किशोरावस्था में ही स्कूल छोड़ना पड़ा था। पढ़ाई छूटने के बाद उन्होंने आजीविका की तलाश में कम उम्र में ही शेन्जेन प्रांत की एक वॉच-ग्लास फैक्ट्री का रुख किया और वहां मजदूर के तौर पर काम शुरू किया। उस शुरुआती दौर में उन्हें कठिन शारीरिक श्रम के बदले प्रतिदिन करीब 110 रुपये की मामूली मजदूरी मिलती थी। हालांकि, इस कारखाने में काम करते हुए उन्होंने ग्लास निर्माण और उसकी पॉलिशिंग से जुड़े बुनियादी तकनीकी हुनर को बहुत बारीकी से सीखा।
23 साल की उम्र में वर्कशॉप और ऐपल का बड़ा ब्रेक
फैक्ट्री के जमीनी अनुभव ने झोउ के भीतर व्यावसायिक सूझबूझ भर दी थी। इसी आत्मविश्वास के चलते महज 23 साल की आयु में उन्होंने अपनी खुद की एक छोटी ग्लास प्रोसेसिंग वर्कशॉप शुरू करने का बड़ा फैसला लिया। उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ते हुए सबसे पहले एडवांस्ड स्क्रीन प्रिंटिंग और मुड़े हुए यानी कर्व्ड ग्लास बनाने की जटिल तकनीक में महारत हासिल की। इसके बाद उन्होंने लेंस टेक्नोलॉजी की नींव रखी, जो आगे चलकर स्मार्टफोन इंडस्ट्री को ग्लास स्क्रीन सप्लाई करने वाली एक दिग्गज बहुराष्ट्रीय सप्लायर बनकर उभरी।
झोउ के उद्यम के लिए ऐतिहासिक मोड़ साल 2007 में आया, जब मशहूर आईफोन निर्माता कंपनी ऐपल ने उनकी कंपनी को टचस्क्रीन ग्लास कवर सप्लाई करने का बड़ा अनुबंध दिया। इस साझेदारी ने लेंस टेक्नोलॉजी को वैश्विक पहचान दिलाई। स्थिति यह रही कि साल 2014 तक कंपनी की कुल आमदनी का आधा हिस्सा अकेले ऐपल के ऑर्डर्स से ही हासिल होता था। इससे पहले झोउ ने साल 2015 में भी चीन की सबसे अमीर महिला बनने का कीर्तिमान स्थापित किया था।



















