हरियाणा के करनाल में एक स्थानीय परिवार ने पारंपरिक पाक कला और खाद्य प्रसंस्करण की अपनी समझ को एक सफल व्यावसायिक मॉडल में तब्दील कर दिया है। सुशांत नामक एक युवा उद्यमी ने अपने पिता और भाई के साथ मिलकर प्राकृतिक तरीके से खाद्य उत्पाद तैयार करने की एक नई पहल शुरू की है। यह संयुक्त प्रयास लगभग 6 महीने पहले अस्तित्व में आया, जब उन्होंने बाज़ार में मिलने वाले मिलावटी और सीमित विकल्पों से अलग हटकर सेहतमंद उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला ग्राहकों के सामने पेश करने का फैसला किया।
मिलावट रहित प्राकृतिक उत्पादों की अनूठी श्रृंखला
बाज़ार में आम तौर पर बिकने वाले पैक्ड अचार और मुरब्बों में मिलावट या कृत्रिम रसायनों की भरमार देखी जाती है, वहीं इस परिवार ने बिना किसी मिलावट के पूरी तरह प्राकृतिक पद्धति से उत्पाद तैयार करने का नियम बनाया है। इनके उत्पादों में ऐसे कई दुर्लभ और सेहतमंद विकल्प शामिल हैं जो सामान्य बाज़ारों में आसानी से नहीं मिलते हैं। उदाहरण के तौर पर, इनके मेन्यू में चीकू का अचार, अमरूद से तैयार किए गए विशेष पापड़, तथा आंवला और इलायची के मेल से बने पौष्टिक लड्डू शामिल हैं। इन प्राकृतिक उत्पादों का नियमित सेवन करने वाले लोगों की सेहत भी अच्छी बनी रहती है और यह ग्राहकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष से मिली प्रेरणा और ब्रांड की स्थापना
इस कारोबार को शुरू करने का विचार अचानक नहीं आया, बल्कि इसके पीछे एक विशेष अवसर का योगदान रहा। सुशांत को इस उद्यम की प्रेरणा तब मिली जब उन्होंने पिछले साल अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था। उस आयोजन के अनुभवों से प्रेरित होकर उन्होंने तय किया कि उन्हें अपने परिवार के साथ मिलकर खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में कुछ सार्थक काम शुरू करना चाहिए। परिवार के साथ विस्तृत चर्चा के बाद पिता और भाई ने भी इस विचार का पूरा समर्थन किया और सभी ने मिलकर एक ब्रांड की नींव रखी, जिसका नाम पूषा एग्रो प्रोडक्ट्स रखा गया।
दो श्रेणियों में उत्पादों का विस्तार और मजबूत मुनाफा
अपने व्यवसाय को सुव्यवस्थित रूप से चलाने के लिए इस परिवार ने अपने ब्रांड पूषा एग्रो प्रोडक्ट्स को दो प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया है। पहला खंड मिलेट वैगन के नाम से संचालित होता है, जिसके अंतर्गत मोटे अनाज से बने बिस्किट, चिप्स और अन्य पौष्टिक नमकीन स्नैक्स तैयार किए जाते हैं। वहीं दूसरा खंड फ्रूटी अफेयर्स नाम से शुरू किया गया है, जिसके तहत प्राकृतिक तरीके से तरह-तरह के अचार, मुरब्बे और चटनी का उत्पादन किया जाता है। सुशांत के अनुसार, शुरुआत में ही सभी खर्चे निकालने के बाद उन्हें हर महीने 35 हज़ार से 40 हज़ार रुपए तक की शुद्ध बचत हो जाती है। ग्राहकों के बीच इन नवाचारी और गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को खूब पसंद किया जा रहा है, जिससे इस स्थानीय उद्यम का दायरा लगातार बढ़ रहा है।



















