मध्य प्रदेश में छतरपुर जिले के लवकुश नगर निवासी फईम खान ने सुरक्षित सरकारी नौकरी के पारंपरिक रास्ते से अलग हटकर अपनी राह खुद बनाई। शिक्षक पद पर चयन होने के बावजूद उन्होंने शिक्षण कार्य को अपनाने के बजाय कारोबारी क्षेत्र में कदम रखने का साहसिक फैसला किया। शुरुआत में उनके इस निर्णय को लेकर लोगों ने तरह-तरह के सवाल उठाए और आलोचना भी की, लेकिन उन्होंने अपने इरादे नहीं बदले। आज वे एक स्थापित कारोबारी बन चुके हैं और विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों के जरिए हर महीने 40 से 50 हजार रुपये की नियमित कमाई कर रहे हैं।
उच्च शिक्षा के बावजूद बिजनेस बना तीसरा विकल्प
फईम खान की शैक्षणिक पृष्ठभूमि काफी मजबूत रही है। उन्होंने छतरपुर के महाराजा छत्रसाल कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके साथ ही उन्होंने अरेबिक भाषा में डिप्लोमा हासिल किया और अंग्रेजी भाषा का भी अध्ययन किया। हालांकि, उनके जीवन में व्यापार करना पहली प्राथमिकता नहीं था, बल्कि यह उनका तीसरा विकल्प बनकर सामने आया।
साल 2011 में उन्होंने वर्ग 3 शिक्षक भर्ती परीक्षा पास की थी और वे सरकारी शिक्षक बन गए थे। उस समय मिलने वाला 2500 रुपये प्रति माह का मानदेय उन्हें वित्तीय दृष्टि से उपयुक्त नहीं लगा। कम वेतन के कारण उन्होंने इस पद पर योगदान न देने का मन बनाया और जॉइन नहीं किया।
पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते छूटा इंजीनियरिंग कॉलेज
शिक्षक पद छोड़ने के उपरांत फईम खान ने प्री इंजीनियरिंग टेस्ट यानी पीईटी परीक्षा दी और उसमें भी सफलता प्राप्त की। इस परीक्षा के जरिए उन्हें ग्वालियर का प्रतिष्ठित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज अलॉट हो गया था। लेकिन घर की परिस्थितियों ने उन्हें शहर छोड़ने की अनुमति नहीं दी।
परिवार में उनके पिता ही एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे, जबकि उनके बड़े भाई पहले से जबलपुर रहकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। इसके अलावा, फईम खान कभी गृह नगर से बाहर नहीं रहे थे, इसलिए उन्हें बाहर अकेले रहने का कोई अनुभव भी नहीं था। पारिवारिक हालात और पिता का संबल बनने के उद्देश्य से उन्होंने घर पर ही रुकने का निर्णय लिया, जिससे इंजीनियरिंग का दूसरा विकल्प भी समाप्त हो गया।
थोक काम से किंग प्लाई फोम के विस्तार तक
पहले दोनों रास्ते बंद होने के बाद उन्होंने साल 2013 में औपचारिक तौर पर कारोबार को ही अपना मुख्य पेशा बना लिया। व्यापार की शुरुआत उन्होंने अपने घर से ही थोक में फोम का काम करके की थी। साल 2012 के बाद उन्होंने दुकान लेकर फुटकर में फोम की बिक्री शुरू कर दी और धीरे-धीरे इसमें प्लाईवुड तथा हार्डवेयर का सामान भी जोड़ लिया। व्यापारिक क्षेत्र से उनका जुड़ाव करीब 20 वर्षों का रहा है।
व्यापार में लगातार सक्रिय रहते हुए उन्होंने रियल एस्टेट के क्षेत्र में भी कदम रखा और प्लॉटिंग का काम शुरू किया। इसके साथ वे अन्य साइड बिजनेस भी संभालते रहे। हाल ही में उन्होंने अपने कारोबार को बड़ा रूप देने के लिए 30 लाख रुपये की लागत से 2 दुकानें खरीदीं और 'किंग प्लाई फोम' नाम से एक विस्तृत प्रतिष्ठान की स्थापना की।
व्यापार में विश्वास, जीएसटी और कमाई का गणित
कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए ग्राहकों का अटूट भरोसा जीतना और उन्हें सही दाम पर गुणवत्तापूर्ण सामान देना सबसे अहम होता है। फईम खान के अनुसार, प्लाई फोम के कारोबार में उन्हें लगभग 10 प्रतिशत का शुद्ध मुनाफा मिलता है। वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी लागू होने से पहले यह मार्जिन 15 प्रतिशत हुआ करता था, जो बाद में घटकर 10 प्रतिशत रह गया।
वे मानते हैं कि सरकारी या निजी नौकरी में स्थिरता और एक तय आमदनी होती है, लेकिन व्यवसाय में जितनी अधिक लगन और मेहनत लगाई जाए, आमदनी की संभावनाएं उतनी ही बढ़ जाती हैं। आज वे केवल प्लाई फोम के काम से ही हर माह 40 से 50 हजार रुपये की आय सहजता से अर्जित कर रहे हैं।



















