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गौरीगंज की रेनू सिंह ने मोटे अनाज से बना डाला महीने के 30 से 40 हजार रुपये का कारोबारसक्सेस स्टोरी
20 जुल॰ 2026, 1:10 am (101 दिन पहले)· 2

गौरीगंज की रेनू सिंह ने मोटे अनाज से बना डाला महीने के 30 से 40 हजार रुपये का कारोबार

अमेठी के गौरीगंज की रेनू सिंह मक्का और बाजरा जैसे मोटे अनाज से नमकीन, पेड़ा, लड्डू और बिस्कुट बनाकर हर महीने 30 से 40 हजार रुपये कमा रही हैं, साथ ही गांव की दूसरी महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं।

देश में मोटे अनाज को बढ़ावा देने की मुहिम अब गांव-गांव तक असर दिखा रही है, और अमेठी के गौरीगंज की रहने वाली रेनू सिंह इसकी एक जीती-जागती मिसाल हैं। वे मक्का और बाजरा जैसे मोटे अनाज से कई तरह के प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं और इसी काम से हर महीने अच्छी कमाई कर रही हैं।

नमकीन से लेकर पेड़े तक, हर दिन तैयार होते हैं दर्जनों डिब्बे

रेनू सिंह बाजार से मोटा अनाज खरीदकर लाती हैं और फिर उसी से नमकीन, पेड़ा, लड्डू, बिस्कुट, पट्टी और आटा जैसे कई प्रोडक्ट बनाती हैं। एक दिन में वे 8 से 10 डिब्बे अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार कर लेती हैं, जिनमें पेड़ा, बर्फी, लड्डू और नमकीन शामिल हैं। तैयार माल पर वे अपने समूह का लोगो लगाती हैं और उसके बाद ही उसकी बिक्री शुरू करती हैं, ताकि ग्राहकों को उनके उत्पाद की पहचान आसानी से हो सके।

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स्वयं सहायता समूह और प्रेरणा कैंटीन से भी सहारा

रेनू का कहना है कि स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके काम को नई रफ्तार मिली है। मोटे अनाज के प्रोडक्ट बनाने के साथ-साथ वे प्रेरणा कैंटीन भी चलाती हैं, जहां से रोजाना 500 से 1000 रुपये तक की बिक्री आराम से हो जाती है। रेनू के मुताबिक मोटे अनाज से बने प्रोडक्ट की बिक्री से उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये की कमाई हो जाती है।

बीमारियों से बचाता है मोटा अनाज

रेनू बताती हैं कि मोटा अनाज सेहत के लिहाज से भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। उनका कहना है कि अगर मोटे अनाज से बने इन उत्पादों को रोजाना के खानपान में शामिल कर लिया जाए तो शरीर कई बीमारियों से दूर रह सकता है।

गांव की दूसरी महिलाओं को भी मिल रहा काम

रेनू सिंह के मुताबिक इस काम से सिर्फ उन्हें ही नहीं, बल्कि गांव की कई और महिलाओं को भी रोजगार मिल रहा है। गांव की महिलाएं उनके पास आती हैं, अपने हिस्से का उत्पाद खुद तैयार करती हैं और फिर अपने स्तर पर उसकी बिक्री भी करती हैं। इससे उन महिलाओं को भी आर्थिक फायदा हो रहा है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

सवाल-जवाब

रेनू सिंह कहां की रहने वाली हैं?
वे अमेठी के गौरीगंज की रहने वाली हैं।
रेनू किन अनाजों से प्रोडक्ट बनाती हैं?
वे मक्का और बाजरा जैसे मोटे अनाज से नमकीन, पेड़ा, लड्डू, बिस्कुट, पट्टी और आटा बनाती हैं।
रेनू एक दिन में कितने प्रोडक्ट तैयार करती हैं?
वे एक दिन में 8 से 10 डिब्बे अलग-अलग प्रोडक्ट तैयार कर लेती हैं।
रेनू हर महीने कितनी कमाई करती हैं?
मोटे अनाज के प्रोडक्ट से उन्हें हर महीने 30 से 40 हजार रुपये की कमाई होती है।
प्रेरणा कैंटीन से कितनी बिक्री होती है?
प्रेरणा कैंटीन से रोजाना 500 से 1000 रुपये तक की बिक्री हो जाती है।
क्या इस काम से गांव की अन्य महिलाओं को भी फायदा हो रहा है?
हां, गांव की महिलाएं उनके पास आकर अपने हिस्से का प्रोडक्ट बनाती हैं और खुद उसकी बिक्री करती हैं।
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