उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में स्थित मुगलसराय की गल्ला मंडी इन दिनों एक अनूठे कृषि आधारित स्टार्टअप के चलते खासी चर्चा में है। उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद आमतौर पर युवा महानगरों के कॉर्पोरेट दफ्तरों का रुख करते हैं, लेकिन इसी धारणा को बदलते हुए आशीष यादव ने पारंपरिक व्यापार की राह चुनी है। उन्होंने फाइनेंस और मार्केटिंग में एमबीए पूरा करने के बाद करीब डेढ़ वर्ष तक कॉर्पोरेट फाइनेंस सेक्टर में अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, नौकरी के दौरान ही उनके भीतर खुद का उद्यम स्थापित करने का विचार लगातार बना रहा। इसी सोच के साथ उन्होंने स्थिर नौकरी को अलविदा कह दिया और शुद्ध खानपान से जुड़ा उद्यम शुरू करने का फैसला किया।
कॉर्पोरेट करियर के बाद क्यों चुना पारंपरिक उत्पाद
आशीष यादव ने अपने उद्यम को 'राम जी गुड़ वाले' नाम दिया है। उनका प्राथमिक उद्देश्य ग्राहकों तक रासायनिक मिलावट से दूर, पूरी तरह शुद्ध और उच्च गुणवत्ता वाला गुड़ पहुंचाना था। सेवा क्षेत्र में काम करते हुए उन्हें महसूस हुआ कि नौकरी के सीमित दायरे में रहने के बजाय अपना काम शुरू करना चाहिए। उन्होंने बाजार की जरूरतों का अध्ययन करते हुए कई व्यावसायिक विकल्पों का मूल्यांकन किया। इस विश्लेषण के बाद उन्होंने पाया कि गुड़ एक ऐसा सदाबहार उत्पाद है जिसकी मांग हर मौसम और हर घर में लगातार बनी रहती है। इसके अलावा, इस व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे सीधे उत्पादन केंद्र से उठाकर ग्राहकों तक बिना किसी बिचौलिए के पहुंचाया जा सकता है।
अयोध्या और लखीमपुर खीरी से स्थापित की सीधी सप्लाई चेन
गुड़ उत्पादन की बारीकियों और उसकी निर्माण प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर समझने के लिए आशीष यादव ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों का व्यापक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने अयोध्या और लखीमपुर खीरी जिलों के ग्रामीण इलाकों का रुख किया। अयोध्या में उनके एक परिचित का पारंपरिक कोल्हू संचालित होता है, जहां गन्ने के ताजे रस से उनकी आंखों के सामने गुड़ तैयार किया जाता है। सप्लाई चेन को पारदर्शी बनाए रखने के लिए उन्होंने इसी स्थान से सीधे गुड़ मंगाकर मुगलसराय की गल्ला मंडी में आपूर्ति शुरू की। उत्पादन स्थल से सीधा जुड़ाव होने के कारण उन्हें उत्पाद की शुद्धता, भट्ठी के तापमान और पारंपरिक निर्माण विधि की पूरी जानकारी रहती है।
पचास रुपये से नब्बे रुपये प्रति किलो तक की किस्में
बाजार में हर वर्ग की पसंद को ध्यान में रखते हुए दुकान पर कई तरह की किस्में उपलब्ध कराई गई हैं। साधारण गुड़ की शुरुआती कीमत लगभग 50 रुपये प्रति किलो रखी गई है। इसके अलावा खास स्वाद पसंद करने वाले ग्राहकों के लिए 90 रुपये प्रति किलो की दर से चॉकलेटी गुड़ भी उपलब्ध है। बुजुर्ग खरीदारों की सहूलियत के लिए नरम गुड़ की विशेष व्यवस्था की गई है, जिसे आसानी से तोड़ा और इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके साथ ही सर्दियों और स्वास्थ्य की दृष्टि से तिल और मूंगफली के मिश्रण वाला विशेष गुड़ भी तैयार कराया जाता है। इसमें गुड़ के साथ भुनी हुई मूंगफली और तिल मिलाए जाते हैं, जिससे इसका स्वाद और पोषक गुणवत्ता काफी बढ़ जाती है।
गुड़ की बनावट, रंग और शुद्धता की पहचान
पारंपरिक गुड़ की खरीदारी करते समय अक्सर उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठता है कि इसमें कभी-कभार छोटे कण क्यों नजर आते हैं। इस तकनीकी पहलू पर आशीष यादव बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों में गुड़ पूरी तरह खुले वातावरण में कोल्हू और भट्ठी पर पकाया जाता है। इसी वजह से हवा या भट्ठी के धुएं के अति सूक्ष्म कण कभी-कभार इसमें समाहित हो जाते हैं। हालांकि, यदि किसी उत्पाद में असामान्य रूप से अधिक मिलावट या अवांछित तत्व दिखाई दें, तो सतर्क रहने की आवश्यकता है। खरीदारों को सलाह दी जाती है कि वे गुड़ की खरीदारी करते समय उसकी प्राकृतिक बनावट, सौंधी गंध, रंग और उसके स्रोत की प्रामाणिकता की ठीक से जांच करें।
एक साल पुराना गन्ने का प्राकृतिक सिरका
गुड़ के अतिरिक्त इस प्रतिष्ठान पर गन्ने के रस से निर्मित पारंपरिक सिरका भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इस सिरके को लंबे समय तक प्राकृतिक फर्मेंटेशन प्रक्रिया से गुजारकर तैयार किया जाता है। आशीष यादव के अनुसार, वे ग्राहकों को करीब एक वर्ष पुराना परिपक्व सिरका उपलब्ध कराते हैं, जिसका निर्माण पूरी तरह से पारंपरिक पद्धति से किया गया है। किसी भी खाद्य उत्पाद के पाचन या अन्य स्वास्थ्य लाभों के संबंध में विशेषज्ञों और चिकित्सकों की राय लेना सदैव बेहतर माना जाता है।
निवेश, टर्नओवर और व्यापार का वित्तीय ढांचा
इस कारोबार की वित्तीय संरचना काफी नपी-तुली रखी गई है। आशीष यादव ने लगभग ₹3 लाख की प्रारंभिक पूंजी लगाकर इस उद्यम की शुरुआत की थी। वर्तमान में उनके कारोबार का मासिक टर्नओवर करीब ₹2.5 लाख तक पहुंच चुका है, जिस पर लगभग 8 प्रतिशत का शुद्ध मुनाफा प्राप्त होता है। यह व्यवसाय स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी योगदान दे रहा है, जिसके चलते अप्रत्यक्ष रूप से 4 लोग इससे जुड़े हुए हैं। उत्पादों के वितरण के लिए दोहरी रणनीति अपनाई गई है, जिसके तहत थोक विक्रेताओं के साथ-साथ खुदरा ग्राहकों को भी माल की सीधी बिक्री की जाती है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते परिष्कृत चीनी के मुकाबले गुड़ की मांग में आने वाले दिनों में और तेजी आने की पूरी संभावना दिखाई दे रही है।



















