महाराष्ट्र के वाशिम जिले में इंसानियत और ईमानदारी का एक मिसाल कायम करने वाला मामला सामने आया है। राज्य परिवहन यानी एसटी बस के एक सतर्क और कर्तव्यनिष्ठ कंडक्टर राजू वाणी ने लगभग दो वर्ष पूर्व बस में छूटे 24 हजार रुपये नकद और महत्वपूर्ण कागजातों से भरा बैग उसकी असली मालिक बुजुर्ग महिला को सौंप दिया है। लंबे समय तक महिला का सुराग न मिलने के बावजूद राजू वाणी ने हार नहीं मानी और संयोगवश दोबारा उसी बस में सफर करने आईं महिला के आधार कार्ड से उनकी पहचान कर मेहनत की पूरी कमाई सुरक्षित वापस दिलवा दी।
बस में मिला था रुपयों और जरूरी कागजातों से भरा बैग
यह पूरा मामला 24 मई 2024 का है, जब कंडक्टर राजू वाणी छत्रपति संभाजीनगर से वाशिम आ रही एसटी बस में अपनी सेवा दे रहे थे। यात्रा समाप्त होने के बाद जब सभी सवारी बस से उतर गईं, तो राजू वाणी को बस की एक सीट पर लावारिस अवस्था में पड़ा एक बैग दिखाई दिया। जब उन्होंने बैग की जांच की, तो उसमें 24 हजार रुपये नकद, इलाज से जुड़ी जरूरी दवाइयां, अस्पताल के कागजात और एक छोटी सी पर्ची मिली जिस पर कासाबाई गायकवाड़ लिखा हुआ था।
डिपो प्रबंधन को सौंपी राशि और जारी रखी महिला की तलाश
घटना के तुरंत बाद ईमानदारी का परिचय देते हुए राजू वाणी ने उस बैग और उसमें रखे 24 हजार रुपयों को वाशिम बस डिपो के प्रबंधन के पास जमा करा दिया। हालांकि, रुपयों को आगार में जमा कराने के बाद भी उनकी जिम्मेदारी खत्म नहीं हुई। वे भली-भांति जानते थे कि किसी बुजुर्ग महिला के लिए इलाज के पर्चे, दवाइयां और इतनी बड़ी रकम कितनी मायने रखती है। इसी सोच के साथ उन्होंने कासाबाई गायकवाड़ नाम को अपने जेहन में बसा लिया और लगातार अपने स्तर पर महिला की तलाश में जुटे रहे।
आधार कार्ड ने खोला दो साल पुराना राज
समय बीतता गया और करीब दो साल बाद एक दिन किस्मत ने फिर से वही मौका ला खड़ा किया। राजू वाणी वाशिम से अकोला जाने वाली एसटी बस में कंडक्टर के रूप में तैनात थे। इसी दौरान एक बुजुर्ग महिला बस में सवार हुईं। नियमानुसार टिकट जारी करते समय जब राजू वाणी ने पहचान की पुष्टि के लिए महिला का आधार कार्ड देखा, तो उस पर कासाबाई गायकवाड़ लिखा हुआ था। नाम पढ़ते ही राजू वाणी को दो साल पुरानी वह घटना याद आ गई और उन्हें संदेह हुआ कि यह वही महिला हो सकती हैं।
सत्यापन के बाद डिपो में सौंपी गई मेहनत की कमाई
राजू वाणी ने तुरंत महिला से विनम्रतापूर्वक पूछा कि क्या कुछ महीने या साल पहले बस यात्रा के दौरान उनका पैसों और दवाइयों से भरा बैग गुम हुआ था। बुजुर्ग महिला ने तुरंत हां में जवाब देते हुए बताया कि उनका 24 हजार रुपये, अस्पताल के दस्तावेज और दवाइयों वाला पॉकेट बस में खो गया था। महिला के जवाब से पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद राजू वाणी उन्हें वाशिम बस आगार ले गए और वहां सुरक्षित रखे 24 हजार रुपये तथा बैग पूरी औपचारिकता के साथ बुजुर्ग महिला को सौंप दिए।
ईमानदारी और इंसानियत की चौतरफा सराहना
अपनी खोई हुई जमापूंजी और इलाज के कागजात वापस पाकर बुजुर्ग महिला की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए और उन्होंने कंडक्टर का सहृदय आभार व्यक्त किया। वाशिम बस डिपो प्रबंधन ने राजू वाणी की इस अभूतपूर्व ईमानदारी, सतर्कता और जनसेवा की भावना का संज्ञान लेते हुए उनका औपचारिक सम्मान किया। स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने भी इस घटना को एसटी निगम की साख और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने वाली मिसाल करार दिया है।



















