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मजदूरी से लाखों के कारोबार तक: अनपढ़ अल्बीना एक्का ने चीकू की खेती से रच दी कामयाबी की मिसालसक्सेस स्टोरी
3 जुल॰ 2026, 6:33 am (119 दिन पहले)· 2

मजदूरी से लाखों के कारोबार तक: अनपढ़ अल्बीना एक्का ने चीकू की खेती से रच दी कामयाबी की मिसाल

रांची के पलांडू गांव की अल्बीना एक्का न पढ़ पातीं न लिख पातीं, फिर भी 2000 चीकू के पौधों से उन्होंने रोज़ एक टन फल पैदा करने वाला और लाखों की कमाई देने वाला कारोबार खड़ा कर दिया।

झारखंड की राजधानी रांची से करीब 15 किलोमीटर दूर बसे पलांडू गांव में रहने वाली अल्बीना एक्का की कहानी हर उस इंसान के लिए हौसला है, जो हालात को अपनी कमज़ोरी मान बैठता है। अल्बीना अंगूठा छाप हैं, उन्हें न पढ़ना आता है और न लिखना, लेकिन आज वे एक कामयाब बिजनेस वुमन बन चुकी हैं। उन्होंने कभी 2000 चीकू के पौधे लगाए थे, जो अब बड़े पेड़ बन चुके हैं और रोज़ाना एक टन तक फल दे रहे हैं। यही चीकू बंगाल समेत कई राज्यों तक सप्लाई होता है।

अल्बीना खुद इस खेती को संभालती हैं और उनके साथ 25 से ज़्यादा लोग काम करते हैं। उनकी महीने की कमाई अब लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है। वे बताती हैं कि उनके पास 2 एकड़ ज़मीन है, लेकिन यह ज़मीन उनकी अपनी नहीं है। यह उन्हें सरकार की एक योजना के तहत लीज़ पर मिली है और इसी पर उन्होंने चीकू की बागवानी शुरू की। इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग भी दी गई। चूंकि ज़मीन लीज़ पर है, इसलिए मुनाफे का 20 प्रतिशत हिस्सा सरकार को देना पड़ता है।

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ऑर्गेनिक खाद से उगता है बेहतरीन चीकू

अल्बीना का कहना है कि उनके चीकू की क्वालिटी बहुत शानदार होती है, क्योंकि इसकी खेती में ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल किया जाता है। रोज़ 25 लोग बागान की देखभाल में जुटे रहते हैं। यहां का फल बंगाल से लेकर रामगढ़, लातेहार, लोहरदगा, धनबाद, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा तक व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं। एक दिन में करीब एक टन तक चीकू तैयार होता है और पूरा का पूरा हाथों-हाथ बिक भी जाता है।

मजदूरी से मालकिन बनने तक का सफर

अल्बीना बताती हैं कि कभी वे दूसरों के खेतों में मज़दूरी किया करती थीं। पढ़ाई-लिखाई से कोसों दूर रहने के बावजूद आज वे एक कारोबारी बन गई हैं। उनके बच्चे पहले सरकारी स्कूल में पढ़ते थे, लेकिन अब वे उन्हें प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं। उनके बच्चे निजी संस्थान से एमबीए की पढ़ाई कर रहे हैं और एक को तो नौकरी भी मिल चुकी है। आज उनके पास अपनी गाड़ी और स्मार्टफोन समेत हर वो सुविधा है, जिसकी कभी उन्होंने कल्पना तक नहीं की थी।

हिम्मत हो तो रास्ते खुद खुलते हैं

अल्बीना का मानना है कि अगर इंसान के भीतर हिम्मत और हौसला हो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं। बस मेहनत करने और आगे बढ़ने का जुनून होना चाहिए। वे कहती हैं कि बहाने तो हज़ार मिल जाएंगे, लेकिन जिस दिन इंसान बहाने बनाना छोड़ देता है, उसी दिन से रास्ते अपने आप खुलते चले जाते हैं। आज उनकी महीने की कमाई आराम से लाख रुपये पार कर जाती है और उन्होंने अपना पक्का मकान भी बनवा लिया है।

सवाल-जवाब

अल्बीना एक्का कौन हैं?
वे रांची के पास पलांडू गांव की रहने वाली महिला हैं, जो अंगूठा छाप हैं और चीकू की खेती से लाखों का कारोबार चला रही हैं।
अल्बीना ने कितने चीकू के पौधे लगाए थे?
उन्होंने 2000 चीकू के पौधे लगाए थे, जो अब बड़े पेड़ बन चुके हैं।
रोज़ कितना चीकू पैदा होता है?
उनके बागान में एक दिन में करीब एक टन तक चीकू तैयार होता है और पूरा बिक जाता है।
उनकी महीने की कमाई कितनी है?
अल्बीना की महीने की कमाई एक लाख रुपये के पार पहुंच चुकी है।
ज़मीन उनकी अपनी है या नहीं?
2 एकड़ की यह ज़मीन उनकी अपनी नहीं है, बल्कि सरकार की योजना के तहत लीज़ पर मिली है और मुनाफे का 20 प्रतिशत सरकार को देना पड़ता है।
चीकू कहां-कहां सप्लाई होता है?
यह बंगाल, रामगढ़, लातेहार, लोहरदगा, धनबाद, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा तक व्यापारी खरीदकर ले जाते हैं।
उनके साथ कितने लोग काम करते हैं?
उनके बागान में 25 से ज़्यादा लोग काम करते हैं और रोज़ देखभाल में जुटे रहते हैं।
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