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मजदूरी छोड़ खुद का कारोबार शुरू किया, बेकोबार के राजकुमार साव अब कमा रहे महीने के 5 लाख रुपयेसक्सेस स्टोरी
20 जुल॰ 2026, 8:21 am (101 दिन पहले)· 1

मजदूरी छोड़ खुद का कारोबार शुरू किया, बेकोबार के राजकुमार साव अब कमा रहे महीने के 5 लाख रुपये

कोडरमा के बेकोबार निवासी राजकुमार साव कभी चेन्नई में मजदूरी करते थे, आज अपनी झाड़ू फैक्ट्री से हर महीने 4 से 5 लाख रुपये कमा रहे हैं और पांच लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं.

झारखंड के कोडरमा जिले के बेकोबार गांव में रहने वाले राजकुमार साव कभी रोजी-रोटी के लिए चेन्नई की एक फैक्ट्री में मजदूरी करते थे. आज वही राजकुमार अपने ही जिले में झाड़ू निर्माण का कारोबार चला रहे हैं और हर महीने करीब 4 से 5 लाख रुपये कमा रहे हैं. मेहनत, सीखा हुआ हुनर और सही वक्त पर लिया गया फैसला किसी की जिंदगी को किस तरह बदल सकता है, राजकुमार की यह कहानी इसी की मिसाल है.

चेन्नई की मजदूरी से सीखा हुनर

राजकुमार बताते हैं कि कुछ साल पहले वे काम की तलाश में अपने गांव से चेन्नई चले गए थे. वहां एक कंपनी में उन्होंने लगातार तीन साल तक झाड़ू बनाने का काम किया. इसी दौरान उन्होंने अलग-अलग डिजाइन, गुणवत्ता और वजन के झाड़ू बनाने की बारीकियां सीखीं. तीन साल के इस अनुभव ने उन्हें इतना आत्मविश्वास दे दिया कि उन्होंने नौकरी छोड़कर अपना खुद का काम शुरू करने का फैसला कर लिया.

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मई 2026 में शुरू हुई अपनी फैक्ट्री

चेन्नई से लौटने के बाद राजकुमार ने मई 2026 में कोडरमा के मोरियावां रोड पर अपनी झाड़ू निर्माण इकाई खोली. शुरुआत बेहद छोटे स्तर पर हुई थी. लेकिन झाड़ू की गुणवत्ता अच्छी होने और डिजाइन आकर्षक होने की वजह से मांग लगातार बढ़ती चली गई. आज हालत यह है कि उनकी इकाई में ऐसे कई मॉडल और डिजाइन के झाड़ू तैयार हो रहे हैं, जो पहले झारखंड में कहीं नहीं बनते थे. इसी वजह से आज उनकी फैक्ट्री कोडरमा के स्थानीय कारोबार में एक अलग पहचान बना चुकी है.

रोजाना 300 झाड़ू, दस से ज्यादा मॉडल

राजकुमार के मुताबिक एक झाड़ू तैयार करने में करीब तीन मिनट लगते हैं और उनकी इकाई में रोजाना लगभग 300 झाड़ू बनाए जाते हैं. फैक्ट्री में अलग-अलग ब्रांड नाम, डिजाइन और वजन के झाड़ू तैयार होते हैं. इनमें जेबरा, डबल लॉक, स्टील, 5डी स्टील, 7 स्टार और हीरो जैसे मॉडल शामिल हैं. इसके अलावा चौड़ी पट्टी वाला नारियल झाड़ू, सामान्य नारियल झाड़ू, तीन तार वाला झाड़ू और छोटा झाड़ू भी यहां बनाया जाता है. हर मॉडल का अपना अलग इस्तेमाल और पहचान है, जिससे ग्राहकों के पास अपनी जरूरत के मुताबिक चुनने के लिए भरपूर विकल्प रहते हैं.

24 से 57 रुपये तक की कीमत, बढ़ता कारोबार

इन झाड़ुओं की कीमत करीब 24 रुपये से लेकर 57 रुपये तक रखी गई है, जिससे ग्राहकों को अपने बजट और जरूरत के हिसाब से विकल्प मिल जाता है. यहां तैयार झाड़ू सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आसपास के जिलों में भी भेजे जा रहे हैं. अच्छी गुणवत्ता और वाजिब कीमत के चलते कारोबार लगातार आगे बढ़ रहा है और फिलहाल हर महीने करीब 4 से 5 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है.

खुद के साथ पांच परिवारों को भी मिला सहारा

राजकुमार ने अपनी मेहनत से सिर्फ अपनी जिंदगी नहीं संवारी, बल्कि पांच स्थानीय लोगों को भी स्थायी रोजगार दिया है. इससे गांव के आसपास रोजगार के नए मौके बने हैं. उनकी कहानी इलाके के दूसरे युवाओं को भी खुद का काम शुरू करने के लिए प्रेरित कर रही है. इस तरह बेकोबार का यह छोटा कारोबार अब गांव के लिए रोजगार का एक भरोसेमंद जरिया बन चुका है.

सवाल-जवाब

राजकुमार साव कौन हैं?
राजकुमार साव कोडरमा जिले के बेकोबार गांव के रहने वाले हैं, जो अब अपनी झाड़ू निर्माण इकाई के मालिक हैं.
राजकुमार पहले क्या करते थे?
वे चेन्नई की एक कंपनी में तीन साल तक झाड़ू बनाने का काम करने वाले मजदूर थे.
उन्होंने अपना कारोबार कब और कहां शुरू किया?
उन्होंने मई 2026 में कोडरमा के मोरियावां रोड पर अपनी झाड़ू निर्माण इकाई शुरू की.
उनकी इकाई रोजाना कितने झाड़ू बनाती है?
उनकी इकाई में रोजाना करीब 300 झाड़ू तैयार किए जाते हैं.
फैक्ट्री में कौन-कौन से मॉडल के झाड़ू बनते हैं?
यहां जेबरा, डबल लॉक, स्टील, 5डी स्टील, 7 स्टार, हीरो, नारियल झाड़ू, तीन तार झाड़ू और छोटा झाड़ू जैसे कई मॉडल तैयार होते हैं.
झाड़ुओं की कीमत क्या है?
झाड़ुओं की कीमत करीब 24 रुपये से लेकर 57 रुपये तक है.
राजकुमार हर महीने कितना कमा रहे हैं?
उनकी इकाई से हर महीने करीब 4 से 5 लाख रुपये का कारोबार हो रहा है.
उन्होंने कितने लोगों को रोजगार दिया है?
राजकुमार ने पांच स्थानीय लोगों को स्थायी रोजगार दिया है.
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