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नौसेना में नाविक रहे मयंक सचान 15 से ज्यादा बार हुए फेल, फिर ऐसे क्रैक की यूपीएससी सीएपीएफसक्सेस स्टोरी
25 सित॰ 2026, 4:57 pm (2 मिनट पहले)· 0

नौसेना में नाविक रहे मयंक सचान 15 से ज्यादा बार हुए फेल, फिर ऐसे क्रैक की यूपीएससी सीएपीएफ

कानपुर के एक साधारण परिवार से आने वाले मयंक सचान ने नेवी में 15 साल सेवा और दर्जनों असफलताओं के बाद यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 343 हासिल की है.

प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान लगातार मिलने वाली असफलताएं अक्सर युवाओं का हौसला तोड़ देती हैं. ज्यादातर अभ्यर्थी दो या तीन बार असफल होने पर रास्ता बदल लेते हैं या निराशा के घेरे में आ जाते हैं. उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले मयंक सचान की दास्तान इसके बिल्कुल उलट है. उन्होंने जीवन में 15 से अधिक प्रतियोगी परीक्षाओं में नाकामी झेली, दो बार एसएसबी इंटरव्यू में बाहर हुए और सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा में भी असफल रहे. इन सबके बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई और भारतीय नौसेना में 15 वर्षों तक नाविक की जिम्मेदारी निभाने के बाद आखिरकार यूपीएससी सीएपीएफ 2025 में सफलता का परचम लहराया.

तंगहाली और सरकारी स्कूल से हुई शुरुआती पढ़ाई

मयंक सचान की पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद साधारण रही है. उनके पिता एक निजी फैक्ट्री में बतौर इलेक्ट्रीशियन काम करते थे. घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे महंगे निजी संस्थानों या इंजीनियरिंग जैसे खर्चीले पाठ्यक्रमों का बोझ उठा सकें. परिवार में दो भाई-बहनों की देखरेख और सीमित आमदनी के कारण चुनौतियां लगातार बनी रहीं. इन कठिन परिस्थितियों के बीच मयंक ने अपनी शुरुआती शिक्षा एक सरकारी स्कूल से पूरी की. उन्होंने बचपन से ही अभावों को करीब से देखा, लेकिन इन हालात को अपने सपनों के आड़े नहीं आने दिया.

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नौसेना में भर्ती और नौकरी के साथ उच्च शिक्षा

घर की माली हालत सुधारने और देश सेवा के अपने संकल्प को पूरा करने के लिए मयंक सचान ने कम उम्र में ही भारतीय नौसेना की राह चुनी. नौसेना में उनका चयन नाविक यानी सेलर के पद पर हुआ. सैन्य सेवा में शिफ्ट ड्यूटी और कठिन दिनचर्या के बावजूद मयंक ने अपनी पढ़ाई से नाता नहीं तोड़ा. अपनी सर्विस के दौरान ही उन्होंने उच्च शिक्षा जारी रखने का फैसला किया. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय यानी इग्नू के माध्यम से लोक प्रशासन विषय में पहले ग्रेजुएशन और उसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की. ड्यूटी के साथ किताबों से यह जुड़ाव आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बना.

दर्जनों बार मिली नाकामी, पर नहीं मानी हार

नौसेना में सेवा करते हुए मयंक सचान का सपना सैन्य अधिकारी बनने का था. उन्होंने अधिकारी वर्ग में जाने के लिए प्रयास शुरू किए, लेकिन उनका सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा. उन्होंने दो बार सर्विस सिलेक्शन बोर्ड यानी एसएसबी इंटरव्यू का सामना किया. एक बार उन्होंने सीडीएस के जरिए और दूसरी बार डायरेक्ट कमीशन के तहत एसएसबी दिया, लेकिन दोनों ही बार वे अंतिम रूप से चयनित नहीं हो सके. इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा का रुख किया, जहां वे प्रारंभिक परीक्षा में ही असफल हो गए. यूपीएससी सीएपीएफ की लिखित परीक्षा में भी वे अपने शुरुआती दो प्रयासों में पास नहीं हो पाए. विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं को मिलाकर वे 15 से अधिक बार असफल रहे, लेकिन उन्होंने कभी प्रयास बंद नहीं किए.

नेवी का कड़ा अनुशासन और सीएपीएफ 2025 में मिली कामयाबी

मयंक सचान के अनुसार भारतीय नौसेना में बिताए गए 15 सालों ने उनके व्यक्तित्व और मानसिक क्षमता को पूरी तरह बदल दिया. समुद्र के बीच रहने और नौसेना के कठोर अनुशासन ने उन्हें सिखाया कि विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य कैसे बनाए रखा जाता है. बार-बार मिलने वाली नाकामियों के बाद भी वे विचलित नहीं हुए, बल्कि अपनी कमजोरियों की समीक्षा करते रहे. इसके बाद उन्होंने पूरे समर्पण के साथ यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा में अपना तीसरा प्रयास दिया. इस बार उनकी रणनीति और अटूट मेहनत रंग लाई. मयंक सचान ने ऑल इंडिया रैंक 343 हासिल करते हुए यूपीएससी सीएपीएफ 2025 परीक्षा में सफलता प्राप्त की.

सवाल-जवाब

मयंक सचान ने यूपीएससी सीएपीएफ 2025 में कौन सी रैंक हासिल की?
मयंक सचान ने यूपीएससी सीएपीएफ 2025 परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 343 हासिल की है.
मयंक सचान ने भारतीय नौसेना में कितने समय तक सेवा की?
उन्होंने भारतीय नौसेना में नाविक के पद पर 15 वर्षों तक देश की सेवा की.
मयंक सचान ने अपनी उच्च शिक्षा कहां से पूरी की?
उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से लोक प्रशासन में स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की.
मयंक सचान को सीएपीएफ परीक्षा में कितनी बार असफलता मिली?
उन्हें यूपीएससी सीएपीएफ की लिखित परीक्षा में शुरुआती दो प्रयासों में असफलता मिली और उन्होंने तीसरे प्रयास में परीक्षा पास की.
मयंक सचान का संबंध किस शहर से है और उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या थी?
वे उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं और उनके पिता एक निजी फैक्ट्री में इलेक्ट्रीशियन का काम करते थे.
अधिकारी बनने के लिए मयंक ने कौन से साक्षात्कार दिए थे?
उन्होंने सीडीएस और डायरेक्ट कमीशन के जरिए दो बार एसएसबी साक्षात्कार दिए थे, लेकिन दोनों बार उनका चयन नहीं हो सका था.
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