उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जनपद स्थित दियरा गांव के रहने वाले दीपक निषाद ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो अभाव भी रास्ते की रुकावट नहीं बन सकते। बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले दीपक के पिता नाव चलाने का पारंपरिक कार्य करते हैं। घर की तंगहाली और सीमित संसाधनों के बावजूद दीपक ने हार नहीं मानी। उन्होंने न केवल अपने कमाए पैसों से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की, बल्कि पिछले 12 वर्षों के लंबे सफर में पूरे सुल्तानपुर जिले का कोना-कोना छानकर 2 लाख से अधिक तस्वीरें अपने कैमरे में दर्ज कर लीं। आज उनकी यह मेहनत और कला क्षेत्र के तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा की एक मिसाल बन चुकी है।
आर्थिक तंगी से ग्रेजुएशन तक का कठिन सफर
दीपक निषाद का शुरुआती जीवन चुनौतियों और आर्थिक विषमताओं से भरा हुआ था। पारिवारिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि आगे की पढ़ाई या किसी नए व्यवसाय के लिए आसानी से धन जुटाया जा सके। उनके पिता नाव चलाकर परिवार का गुजर-बसर करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए दीपक ने खुद जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पढ़ाई को बीच में छोड़ने के बजाय मेहनत की और खुद के कमाए पैसों से ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में ऐसा काम करने की इच्छा जागी, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें और अपने परिवार का हाथ बंटा सकें। इसी तलाश के दौरान उनका रुझान फोटोग्राफी की ओर हुआ।
संसाधनों की कमी और पत्नी का संबल
फोटोग्राफी को करियर या जुनून के रूप में अपनाना दीपक के लिए आसान नहीं था। एक अच्छा कैमरा और उससे जुड़े जरूरी उपकरण खरीदना उनके लिए आर्थिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। कई बार संसाधनों के अभाव और आर्थिक तंगी ने उन्हें निराश भी किया और उनका हौसला डिगने लगा। ऐसे कठिन वक्त में उनकी पत्नी ने उनका सबसे बड़ा सहारा बनकर उनका साथ दिया। जब भी परिस्थितियां प्रतिकूल हुईं, उनकी पत्नी ने उन पर अटूट भरोसा जताया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पत्नी से मिले इस मानसिक और भावनात्मक संबल ने दीपक को नई ऊर्जा दी और वे अपने कैमरे के साथ सुल्तानपुर की सड़कों और पगडंडियों पर निकल पड़े।
12 साल की मेहनत और 2 लाख से ज्यादा तस्वीरें
अपनी पत्नी के प्रोत्साहन के बाद दीपक ने सुल्तानपुर जनपद के गांव, कस्बों, खेतों, नदियों के घाटों, ऐतिहासिक विरासतों और धार्मिक स्थलों का रुख किया। उन्होंने आम इंसान के रोजमर्रा के जीवन, खुशियों और संघर्ष से जुड़े अनगिनत खूबसूरत लम्हों को अपने कैमरे में कैद करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते तस्वीरें खींचना उनके जीवन का सबसे अहम हिस्सा और जुनून बन गया। बीते 12 सालों में उन्होंने 2,00,000 से भी अधिक तस्वीरें क्लिक की हैं। उनकी तस्वीरों का दायरा केवल कुदरती नजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनमें सुल्तानपुर की समृद्ध संस्कृति, ग्रामीण जीवन की वास्तविक झलकियां और लोक परंपराएं जीवंत हो उठती हैं।
सीमित संसाधनों वाले युवाओं के लिए प्रेरणा
आज दीपक निषाद सुल्तानपुर और आसपास के इलाकों में एक जाने-माने फोटोग्राफर के रूप में पहचाने जाते हैं। वे उन अनगिनत युवाओं के लिए एक जीवंत उदाहरण बन चुके हैं, जो साधनों की कमी या आर्थिक तंगी का बहाना बनाकर अपने सपनों को बीच में ही छोड़ देते हैं। उनकी जीवन यात्रा यह सिखाती है कि किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमेशा बड़ी शुरुआत या भारी बजट की जरूरत नहीं होती। यदि व्यक्ति के पास दृढ़ इच्छाशक्ति, कड़ी मेहनत और परिवार का विश्वास हो, तो वह विपरीत से विपरीत परिस्थितियों से निकलकर भी समाज में अपनी एक विशिष्ट पहचान बना सकता है।



















