झारखंड के रांची शहर की रहने वाली 55 साल की अनीता ने यह साबित कर दिया है कि अपने हुनर को कारोबार में बदलने के लिए उम्र कभी बाधा नहीं बनती। वे पिछले 20 वर्षों से नियमित रूप से माला जाप कर रही हैं और इसी अभ्यास के कारण उन्हें एक हाथ से पेंटिंग बनाने का अनोखा अभ्यास हो गया है। एक हाथ में माला संभालते हुए और दूसरे हाथ से कैनवास पर रंग बिखेरते हुए वे कांच की बेहद आकर्षक पेंटिंग्स तैयार करती हैं।
कांच और लकड़ी से सजी कलात्मक रचनाएं
अनीता की बनाई कलाकृतियों में लकड़ी और कांच के संयोजन से बने झरोखे विशेष आकर्षण का केंद्र हैं, जिनमें पूरी तरह कांच का बारीकी से काम किया गया है। इसके अलावा वे श्रीनाथ की विशेष पेंटिंग भी तैयार करती हैं, जिन्हें बनाने के लिए कांच के बेहद छोटे-छोटे टुकड़ों का इस्तेमाल होता है। इन कृतियों में केवल प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जाता है और हर पेंटिंग की फिनिशिंग पूरी तरह से हाथ से की जाती है। एक सिंगल पेंटिंग को तैयार करने में उन्हें लगभग 3 से 4 घंटे का समय लगता है।
हिचकिचाहट से लेकर दूसरे राज्यों में बढ़ती मांग तक
अनीता पिछले 20 सालों से इन सुंदर वस्तुओं का निर्माण कर रही थीं, लेकिन शुरुआत में अपनी इस कला को लोगों के सामने लाने में उन्हें झिझक महसूस होती थी। अब वे पूरी निडरता के साथ अपने इस शौक को जी रही हैं और इसे एक नियमित व्यवसाय का रूप दे चुकी हैं। उनकी बनाई पेंटिंग्स की मांग अब विभिन्न जिलों के साथ-साथ दूसरे राज्यों तक फैल चुकी है। संभ्रांत वर्ग के लोग उनकी इस कलाकृतियों को काफी पसंद कर रहे हैं। बाजार में उनकी एक पेंटिंग 5,000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक की कीमत में बिकती है। भारी मांग के कारण उनके पास समय की कमी बनी रहती है, इसलिए वे काम के साथ-साथ माला जाप का क्रम भी जारी रखती हैं।



















