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सीकर के रेतीले खेत में लहलहाया चंदन का बगीचा, किसान मनोज हुड्डा का प्रयोग बना मिसालसक्सेस स्टोरी
3 जुल॰ 2026, 1:02 pm (27 दिन पहले)· 5

सीकर के रेतीले खेत में लहलहाया चंदन का बगीचा, किसान मनोज हुड्डा का प्रयोग बना मिसाल

सीकर जिले के गांगियासर गांव के किसान मनोज हुड्डा ने रेतीली जमीन पर कर्नाटक से मंगवाए 103 चंदन के पौधे लगाकर अनोखी मिसाल कायम की है, जिससे आसपास के किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।

राजस्थान के सीकर जिले से खेती से जुड़ी एक दिलचस्प खबर सामने आई है, जहां रेतीले धोरों पर सदियों से बाजरा और सरसों उगाने वाले इलाके में एक युवा किसान ने चंदन की खेती शुरू कर सबको चौंका दिया है। गांगियासर गांव के मनोज हुड्डा ने अपनी रेतीली जमीन पर चंदन के पौधे लगाकर यह साबित कर दिया है कि सही योजना और वैज्ञानिक सोच के साथ रेगिस्तान की मिट्टी भी अच्छा मुनाफा दे सकती है।

बदलाव की तरफ बढ़ता राजस्थान का किसान

राजस्थान की पहचान लंबे समय से रेतीले धोरों, बाजरे और सरसों की खेती से जुड़ी रही है, लेकिन बदलते वक्त के साथ प्रदेश के किसान अब परंपरागत फसलों से आगे बढ़कर नई और ज्यादा मुनाफा देने वाली खेती की तरफ रुख कर रहे हैं। सीकर जिले के गांगियासर गांव से सामने आया यह मामला इसी बदलाव की एक बानगी है। जिस जमीन पर लोग कभी चंदन की खेती की कल्पना तक नहीं कर सकते थे, वहां आज चंदन के हरे भरे पौधे लहलहा रहे हैं। इलाके में इसे अपनी तरह का अनोखा और पहला प्रयोग माना जा रहा है। मनोज का कहना है कि अगर खेती वैज्ञानिक तरीके से और सही योजना के साथ की जाए, तो रेगिस्तान की धरती भी किसानों को बेहतर मुनाफा दे सकती है।

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मिट्टी और पानी की जांच के बाद ही उठाया कदम

मनोज हुड्डा बताते हैं कि चंदन की खेती शुरू करने से पहले उन्होंने जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया। सबसे पहले उन्होंने अपने खेत की मिट्टी और पानी की वैज्ञानिक जांच करवाई। जब जांच रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने खेती के लिए परिस्थितियां अनुकूल बताईं, तभी उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया। यह पूरा प्रयोग एक दोस्त की सलाह से शुरू हुआ, जिसके बाद मनोज ने चंदन की खेती के बारे में विस्तार से जानकारी जुटाई और पूरी तैयारी के साथ इसकी शुरुआत की।

कर्नाटक से मंगवाए 103 पौधे, आज सभी सुरक्षित

मनोज हुड्डा ने कर्नाटक से 103 चंदन के पौधे मंगवाकर अपने खेत में लगाए। करीब एक साल पहले लगाए गए ये सभी 103 पौधे आज सुरक्षित हैं और अच्छी तरह विकसित हो रहे हैं। पौधों की इस सफलता ने मनोज का हौसला और बढ़ा दिया है। उनका कहना है कि शुरुआत में कई लोगों ने इस प्रयोग को जोखिम भरा बताया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार पौधों की देखभाल में जुटे रहे। नियमित सिंचाई, सही पोषण और विशेषज्ञों की वैज्ञानिक सलाह के मुताबिक प्रबंधन की बदौलत आज सारे पौधे स्वस्थ हालत में हैं।

12 साल में तैयार होगा पेड़, मिल सकता है लाखों का मुनाफा

मनोज के मुताबिक चंदन की खेती एक लंबी अवधि का निवेश है, लेकिन इसका फायदा भी उतना ही बड़ा है। सही देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में करीब 12 साल बाद तैयार होने वाला एक चंदन का पेड़ लाखों रुपये तक की कीमत दे सकता है। यही वजह है कि देश के कई राज्यों के किसान अब चंदन की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

आसपास के किसानों के लिए बना प्रेरणा का जरिया

मनोज हुड्डा का यह प्रयोग अब आसपास के किसानों के लिए भी मिसाल बनता जा रहा है। कई किसान उनके खेत पर पहुंचकर चंदन की खेती की बारीकियां समझ रहे हैं और इसकी संभावनाओं को जान रहे हैं। मनोज का मानना है कि अगर किसान परंपरागत खेती के साथ साथ नई और ज्यादा कीमत वाली फसलों को भी अपनाएं, तो उनकी आमदनी में अच्छा खासा इजाफा हो सकता है। उन्होंने अपने दम पर यह साबित कर दिया है कि मजबूत इरादों, वैज्ञानिक सोच और मेहनत के बूते रेतीले धोरों में भी चंदन की खुशबू फैलाई जा सकती है।

सवाल-जवाब

मनोज हुड्डा कहां के रहने वाले हैं?
वे राजस्थान के सीकर जिले के गांगियासर गांव के रहने वाले हैं।
उन्होंने चंदन के कितने पौधे लगाए हैं?
उन्होंने कर्नाटक से मंगवाकर 103 चंदन के पौधे अपने खेत में लगाए हैं।
ये पौधे कब लगाए गए थे?
करीब एक साल पहले।
चंदन का पेड़ तैयार होने में कितना समय लगता है?
सही देखभाल और अनुकूल परिस्थितियों में करीब 12 साल का समय लगता है।
चंदन की खेती से कितना मुनाफा हो सकता है?
उचित देखभाल में तैयार एक चंदन का पेड़ लाखों रुपये तक की कीमत दे सकता है।
मनोज को चंदन की खेती का विचार कहां से आया?
यह विचार उन्हें उनके एक दोस्त की सलाह से मिला।
खेती शुरू करने से पहले मनोज ने क्या सावधानी बरती?
उन्होंने पहले अपने खेत की मिट्टी और पानी की वैज्ञानिक जांच करवाई और अनुकूल रिपोर्ट आने के बाद ही खेती शुरू की।
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