दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों के आगमन से पहले जमशेदपुर समेत विभिन्न जगहों पर घरों की साफ-सफाई, मरम्मत और रंग-रोगन की तैयारियां तेजी से शुरू हो जाती हैं। हर कोई चाहता है कि त्योहार के पावन मौके पर उसका आशियाना चमकता हुआ और नया नजर आए, लेकिन कई बार दीवारों पर उभरी सीलन, काई का जमाव और पेंट की उखड़ती पापड़ी पूरी खूबसूरती पर पानी फेर देती है। ऐसे में बिना किसी ठोस जानकारी के केवल रंगों के आकर्षण में आकर पेंट खरीद लेना आपकी जेब पर काफी भारी पड़ सकता है। पेंटिंग की प्रक्रिया केवल ब्रश चलाने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह दीवारों की गहराई से जांच करने, सही सामग्री चुनने और सतह को ठीक से तैयार करने का काम है, जैसा कि पेंट विशेषज्ञ अजीत ने स्पष्ट किया है।
बाहरी दीवारों पर मौसम की मार से सुरक्षा के लिए मजबूत विकल्प
घर की बाहरी दीवारें साल भर कड़ी धूप, तेज बारिश, आंधी और वातावरणीय नमी के सीधे संपर्क में रहती हैं। मौसम की इस निरंतर मार को झेलने के लिए सामान्य पेंट पूरी तरह नाकाफी साबित होते हैं। विशेषज्ञ अजीत का कहना है कि बाहरी सतहों के लिए हमेशा एक्सटीरियर इमल्शन अथवा वेदरप्रूफ पेंट का ही चयन करना सबसे समझदारी भरा कदम है। इस तरह के पेंट मौसम के कड़े उतार-चढ़ाव को सहने की क्षमता रखते हैं, जिससे दीवारों का रंग कई वर्षों तक फीका नहीं पड़ता और मकान की संरचना सुरक्षित बनी रहती है। बाजार में मिलने वाले कई उन्नत और प्रीमियम एक्सटीरियर पेंट में पानी को रोकने वाले सुरक्षात्मक घटक और एंटी-फंगल खूबियां भी पहले से मौजूद होती हैं, जो बाहरी सतह को अतिरिक्त मजबूती देती हैं। हालांकि, अगर दीवार की संरचना में भीतर से सीलन या पानी रिसने का पुराना रोग मौजूद है, तो उस पर सीधे महंगा पेंट पोत देने भर से कोई जादुई समाधान नहीं मिलने वाला है।
कमरों और हॉल के लिए मनपसंद फिनिश वाले इंटीरियर इमल्शन
घर के अंदरूनी हिस्सों, जैसे बेडरूम, हॉल और ड्राइंग रूम की बात करें तो यहां इंटीरियर इमल्शन सबसे बेहतरीन और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरता है। इस श्रेणी में उपयोगकर्ताओं को मैट, सॉफ्ट शीन और सिल्क जैसी कई तरह की आकर्षक फिनिश आसानी से मिल जाती हैं। जहां मैट फिनिश दीवारों की मामूली कमियों को छिपाकर उन्हें एक बेहद सादा, शांत और सुरुचिपूर्ण स्वरूप प्रदान करती है, वहीं सिल्क या शीन फिनिश वाली दीवारों पर एक हल्की प्राकृतिक चमक रहती है, जिसे पोछना और साफ-सुथरा रखना काफी सरल हो जाता है। जिन घरों में नन्हे बच्चे होते हैं या रोजमर्रा के काम के दौरान दीवारों पर दाग-धब्बे लगने की अधिक आशंका रहती है, वहां वॉशेबल इमल्शन बहुत काम आता है क्योंकि उस पर लगे निशानों को बिना रंग खराब किए गीले कपड़े से मिटाया जा सकता है। इसके अलावा प्रीमियम श्रेणी के आधुनिक इमल्शन में गंध बेहद कम होती है और उनमें कम वीओसी वाले सुरक्षित विकल्प मिलते हैं, जिससे कमरे के भीतर की हवा दूषित नहीं होती और परिवार के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ता।
सीलन, दरारों और काई की जड़ पर चोट करना सबसे जरूरी
बरसात का मौसम बीतने के बाद कई मकानों की बाहरी दीवारों पर हरी-काली काई जम जाती है, जबकि कमरों के भीतर की दीवारों पर पेंट फूलकर पापड़ी के रूप में झड़ने लगता है। अजीत की सलाह है कि इस तरह से खराब हो चुकी दीवारों पर तुरंत नया पेंट लगाने की जल्दबाजी कतई न करें, बल्कि पहले यह पता लगाएं कि पानी आ कहां से रहा है। छत के ढलान पर पानी ठहरना, पाइपलाइन में छिपा हुआ लीकेज, बाहरी प्लास्टर में बाल जितनी बारीक दरारें या फिर जमीन के तल से ऊपर चढ़ने वाली नमी अक्सर इस खराबी के पीछे मुख्य कारण होते हैं। सबसे पहले किसी कुशल कारीगर से पानी के रिसाव और सीपेज को पूरी तरह बंद करवाएं। इसके बाद दीवार पर जमी काई, उखड़ते हुए पुराने पेंट और ढीली पड़ चुकी पापड़ी को खुरचकर पूरी तरह साफ करें और सतह को धूप व हवा में भली-भांति सूखने दें। दीवार के पूरी तरह सूख जाने के बाद ही आवश्यकतानुसार एंटी-फंगल ट्रीटमेंट, पेशेवर वॉटरप्रूफिंग और मजबूत प्राइमर का इस्तेमाल करें।
पुट्टी, प्राइमर और वॉटरप्रूफिंग से तैयार होती है मजबूत नींव
किसी भी दीवार पर अंतिम रंग लगाने से पहले उसकी सतह को चरणबद्ध तरीके से तैयार करना सबसे आवश्यक चरण माना जाता है। दीवार के प्लास्टर में मौजूद छोटे-मोटे गड्ढों और खुरदरेपन को समतल करने के लिए पुट्टी लगाई जाती है, जिससे सतह एकदम चिकनी बन जाती है। इसके उपरांत लगाया जाने वाला प्राइमर दीवार और नए पेंट के बीच एक मजबूत रासायनिक पकड़ बनाने का काम करता है, ताकि रंग बाद में पपड़ी बनकर न उतरे। बाहरी दीवारों के लिए स्थानीय मौसम के अनुकूल प्राइमर और संरचना की जरूरत के मुताबिक सही वॉटरप्रूफिंग सिस्टम का चयन किया जाना चाहिए। वहीं रसोई और बाथरूम जैसे अत्यधिक नमी वाले संवेदनशील कोनों में उचित वेंटिलेशन का प्रबंध करना और भाप या पानी के मूल स्रोतों को समय रहते ठीक करना अनिवार्य है।
डिस्टेंपर, इमल्शन और टेक्सचर पेंट की खूबियों में अंतर
बजट को ध्यान में रखकर काम कराने वाले मकान मालिकों के लिए डिस्टेंपर आज भी एक किफायती माध्यम बना हुआ है, लेकिन अगर लंबे समय तक चलने वाले टिकाऊपन और धब्बों को साफ करने की क्षमता की तुलना की जाए, तो डिस्टेंपर किसी भी अच्छे इमल्शन के मुकाबले काफी पीछे छूट जाता है। इमल्शन पेंट दीवारों को प्रीमियम और टिकाऊ फिनिश देने के साथ-साथ रंगों के अनगिनत खूबसूरत विकल्प उपलब्ध कराता है। दूसरी ओर, यदि आप अपने लिविंग रूम या मुख्य दीवार को कोई खास डिजाइनर लुक देना चाहते हैं, तो टेक्सचर पेंट का उपयोग दीवारों को मनचाहा उभार और कलात्मक स्वरूप प्रदान करता है। दीवारों से अलग लकड़ी और लोहे की खिड़कियों, दरवाजों और सुरक्षा ग्रिल पर सामान्य दीवार वाला पेंट नहीं टिकता, इसलिए उनके बचाव और चमक के लिए विशेष रूप से तैयार इनेमल अथवा निर्धारित मेटल व वुड पेंट का ही प्रयोग करना चाहिए।
रंग और कीमत से आगे बढ़कर जांचें पेंट की वास्तविक गुणवत्ता
बाजार से पेंट खरीदते समय अधिकांश लोग केवल शेड कार्ड में दिख रहे मनमोहक रंगों और बाल्टी की कीमत पर ही ध्यान केंद्रित करते हैं, जो एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। विशेषज्ञ अजीत के अनुसार, खरीदारी करते वक्त पेंट की वास्तविक गुणवत्ता, प्रति लीटर मिलने वाला कवरेज क्षेत्र, उसकी अनुमानित उम्र और उसे लगाए जाने वाले स्थान की प्रकृति की पड़ताल करना बेहद आवश्यक है। हमेशा अपनी दीवार की मौजूदा दशा को देखकर ही पेंटिंग सामग्री तय करें और यदि कोई भ्रम हो तो अनुभवी विशेषज्ञों की राय लेने में संकोच न करें। एक सफल और सुंदर पेंटिंग का अर्थ केवल दीवार पर रंग की परत चढ़ाना नहीं है, बल्कि नमी से बचाव और सतह की सही तैयारी ही इसकी असली सफलता है। यदि आप आने वाले त्योहारों में अपने घर का कायाकल्प करना चाहते हैं, तो ऐन मौके की हड़बड़ी से बचने के लिए अभी से योजना बनाकर काम शुरू करें ताकि रोशनी के पर्व तक आपका आशियाना पूरी तरह दमक उठे।



















