स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते वक्त कई बार स्क्रीन के ऊपरी हिस्से में स्टेटस बार या डायनेमिक आइलैंड के पास अचानक से छोटे-छोटे हरे, नारंगी और नीले रंग के डॉट्स ब्लिंक करते नजर आते हैं। बहुत से लोग इन रंगों को केवल डिस्प्ले की कोई तकनीकी खराबी या फिर नेटवर्क कनेक्टिविटी से जुड़ी सामान्य समस्या मानकर इनकी तरफ ध्यान नहीं देते हैं। हालांकि, असलियत में ये दिखने में बेहद छोटे डॉट्स असल में बेहद महत्वपूर्ण प्राइवेसी इंडिकेटर होते हैं जो मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले यूजर की व्यक्तिगत गोपनीयता और सुरक्षा की निगरानी करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
डिजिटल तकनीक के क्षेत्र की दो सबसे दिग्गज कंपनियों ऐपल और गूगल ने अपने ऑपरेटिंग सिस्टम्स में इस सुरक्षा फीचर को विशेष रूप से शामिल किया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि स्मार्टफोन में इंस्टॉल कोई भी थर्ड-पार्टी एप्लीकेशन यूजर की जानकारी और सहमति के बिना उसकी किसी भी निजी गतिविधि पर चुपचाप नजर न रख सके या उसका डेटा न चुरा सके। स्क्रीन पर दिखने वाले हर एक रंग का अपना एक अलग और निश्चित अर्थ होता है जो उस वक्त फोन के हार्डवेयर के इस्तेमाल की स्थिति को साफ तौर पर दर्शाता है।
जब भी स्मार्टफोन की स्क्रीन पर हरी लाइट चमकती है, तो इसका सीधा अर्थ यह होता है कि डिवाइस का कैमरा इस समय चालू स्थिति में है। यूजर जब खुद फोन का कैमरा खोलकर तस्वीरें लेते हैं या फिर व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, फेसटाइम जैसी विभिन्न एप्लीकेशन पर किसी से वीडियो कॉल के जरिए बात करते हैं, तब यह हरी बत्ती दिखाई देती है। इसके अलावा, यदि किसी समय फोन का कैमरा और माइक्रोफोन दोनों का इस्तेमाल एक साथ चल रहा हो, तब भी स्क्रीन पर यह ग्रीन डॉट ही नजर आता है.
वहीं दूसरी तरफ, जब स्क्रीन पर नारंगी रंग की लाइट जलती हुई दिखाई देती है, तो इसका मतलब होता है कि फोन का माइक्रोफोन एक्टिव है और काम कर रहा है। सामान्य वॉयस कॉल पर बात करते समय, फोन में कोई वॉयस रिकॉर्डिंग चालू होने की स्थिति में, या फिर सिरी और गूगल असिस्टेंट जैसे वॉयस कमांड आधारित फीचर्स का उपयोग करते वक्त यह ऑरेंज डॉट स्क्रीन के कोने पर उभर आता है।
इन दोनों के अलावा कई बार नीले रंग का इंडिकेटर भी स्क्रीन पर सामने आता है, जो तब सक्रिय होता है जब फोन में लोकेशन सर्विस यानी जीपीएस, वॉयस कंट्रोल या फिर स्क्रीन शेयरिंग और स्क्रीन मिररिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं काम कर रही होती हैं। गूगल मैप्स के अतिरिक्त जब भी कोई कैब बुकिंग या फूड डिलीवरी से जुड़ी एप्लीकेशन बैकग्राउंड में आपकी लोकेशन ट्रैक करती है, तब यह ब्लू डॉट स्क्रीन पर दिखाई दे सकता है.
मोबाइल फोन इस्तेमाल करते वक्त कुछ खास परिस्थितियों में सतर्क रहना बेहद जरूरी हो जाता है। यदि आप किसी भी तरह से कैमरा इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं और ना ही फोन पर किसी से बातचीत कर रहे हैं, इसके बावजूद अगर स्क्रीन पर लगातार ग्रीन या ऑरेंज डॉट ब्लिंक कर रहा है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इसका मतलब यह हो सकता है कि बैकग्राउंड में चुपचाप चल रहा कोई संदिग्ध ऐप आपकी मर्जी के बिना आपके कैमरा या माइक का इस्तेमाल कर रहा है। ऐसी स्थिति में फोन के अंदर किसी खतरनाक मैलवेयर या स्पायवेयर के मौजूद होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।
यह पता लगाने के लिए कि आखिर कौन-सा एप्लीकेशन इन सेंसिटिव फीचर्स का इस्तेमाल कर रहा है, बेहद आसान प्रक्रिया अपनाई जा सकती है। जैसे ही ये लाइट्स स्क्रीन पर दिखाई दें, यूजर को स्क्रीन के ऊपर से नीचे की तरफ स्वाइप करके कंट्रोल सेंटर ओपन करना चाहिए। वहां पर तुरंत साफ तौर पर यह जानकारी मिल जाती है कि कौन-सा ऐप इस समय कैमरा या माइक्रोफोन का उपयोग कर रहा है। यदि कोई ऐसा संदिग्ध या गैर-जरूरी एप्लीकेशन दिखाई दे जिसका उस वक्त कोई काम न हो, तो तुरंत फोन की सेटिंग्स में जाकर प्राइवेसी एंड सिक्योरिटी सेक्शन को खोलना चाहिए। इसके बाद उस खास ऐप को दिए गए कैमरा और माइक्रोफोन के एक्सेस को तुरंत बंद कर देना चाहिए या जरूरत न होने पर उस एप्लीकेशन को अपने फोन से हमेशा के लिए डिलीट कर देना चाहिए।



















