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मानसून में नैनीताल की गलियों में मिलने वाले जंगली और बागानी फलों का ये है पूरा जायकाट्रैवल टिप्स
4 जुल॰ 2026, 10:26 am (116 दिन पहले)· 5

मानसून में नैनीताल की गलियों में मिलने वाले जंगली और बागानी फलों का ये है पूरा जायका

बरसात के मौसम में नैनीताल के बाजार आड़ू, प्लम, खुमानी, नाशपाती, सेब के साथ हिसालु, किलमोड़ा और घिंघारु जैसे जंगली फलों से भर जाते हैं, जिनका स्वाद पहाड़ों की असली पहचान बताता है।

बादलों से घिरी पहाड़ियां, भीगी हरियाली और ठंडी हवा के बीच बरसात के मौसम में नैनीताल की रौनक अलग ही दिखती है। इस मौसम में मल्लीताल, तल्लीताल और आसपास के बाजार रंग-बिरंगे पहाड़ी फलों से पट जाते हैं और यही वजह है कि यहां आने वाले पर्यटक सिर्फ झीलों और पहाड़ों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि बाजार में मिलने वाले ताजे फलों का स्वाद लेकर पहाड़ी जीवन को करीब से महसूस करते हैं। आड़ू, प्लम, खुमानी, नाशपाती और सेब जैसे बागानी फलों के साथ-साथ हिसालु, किलमोड़ा और घिंघारु जैसे जंगली फल भी इन दिनों बाजारों की शोभा बढ़ाते हैं।

आड़ू की मिठास और खुशबू

नैनीताल और आसपास के पहाड़ी गांवों में बरसात के मौसम में आड़ू खूब उगता है। हल्के लाल और पीले रंग का यह फल अपनी तेज खुशबू और रस से भरे स्वाद के लिए पहचाना जाता है। स्थानीय बागानों से सीधे बाजार पहुंचने वाला यह आड़ू पर्यटकों की नजर तुरंत खींच लेता है। पहाड़ों की ठंडी जलवायु में पका यह फल मैदानी इलाकों में मिलने वाले आड़ू से स्वाद में काफी अलग होता है। इसे कच्चा खाने के अलावा लोग इससे जूस, जैम और तरह-तरह की मिठाइयां भी बनाते हैं। मानसून में नैनीताल आने वाले किसी भी यात्री को यह पहाड़ी आड़ू जरूर चखना चाहिए।

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प्लम यानी आलूबुखारे की खट्टी-मीठी पहचान

बरसात के दिनों में नैनीताल के बाजारों में प्लम यानी आलूबुखारा भी खूब बिकता दिखता है। इसका खट्टा-मीठा स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोगों को भाता है। यह फल गहरे लाल, बैंगनी और पीले रंग में मिलता है और दिखने में जितना आकर्षक लगता है, स्वाद में उतना ही खास साबित होता है। पहाड़ी प्लम की ताजगी और रस इसे बाजार के आम फलों से अलग खड़ा करता है। नैनीताल क्षेत्र में यह फल रामगढ़-मुक्तेश्वर इलाके में सबसे ज्यादा उगाया जाता है और स्थानीय लोग इसे नमक-मिर्च के साथ खाना भी पसंद करते हैं। नैनीताल की यात्रा में प्लम का स्वाद लेना ट्रिप को और यादगार बना सकता है।

खुमानी यानी एप्रिकॉट का रसीला स्वाद

पहाड़ी इलाकों में खुमानी यानी एप्रिकॉट बरसात के मौसम का बेहद लोकप्रिय फल माना जाता है। इस दौरान पेड़ों पर पीले और नारंगी रंग के छोटे-छोटे फल लदे नजर आते हैं, जिनका स्वाद हल्का मीठा और रसीला होता है। नैनीताल के आसपास के गांवों और स्थानीय बाजारों में खुमानी आसानी से मिल जाती है। कई परिवार इसे धूप में सुखाकर भी रखते हैं ताकि मौसम बीतने के बाद भी इसका स्वाद लिया जा सके। खुमानी से जैम, चटनी और अलग-अलग तरह की मिठाइयां भी तैयार की जाती हैं। नैनीताल आने वाले पर्यटकों को खुमानी का स्वाद जरूर चखना चाहिए।

पहाड़ी नाशपाती की अलग महक

बरसात के मौसम में पहाड़ी नाशपाती भी बाजारों की शान बढ़ाती है। आकार में भले ही छोटी हो, लेकिन स्वाद में यह बेहद मीठी और रस से भरी होती है, जिसकी वजह से यह स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों की भी पसंदीदा बन जाती है। पहाड़ी मिट्टी और यहां के मौसम में उगने के कारण इसकी खुशबू मैदानी नाशपाती से बिल्कुल जुदा होती है। नैनीताल के मुक्तेश्वर और रामगढ़ इलाकों में नाशपाती की खेती प्रमुखता से होती है, वहीं इसे पहाड़ी नूण यानी खास तरह के नमक के साथ खाने पर इसका मजा दोगुना हो जाता है। नैनीताल आने वाले किसी भी यात्री को इस पहाड़ी फल का स्वाद जरूर लेना चाहिए।

सेब की कुरकुरी मिठास

सेब का जिक्र आते ही जेहन में सीधे पहाड़ों की तस्वीर उभर आती है। नैनीताल और पूरे कुमाऊं क्षेत्र में अलग-अलग मौसम में सेब की कई किस्में उगाई जाती हैं। बरसात के दौरान बाजारों में मिलने वाले स्थानीय सेब आकार में भले ही छोटे हों, लेकिन इनका स्वाद बेहद खास होता है। इनकी मिठास और कुरकुरापन लोगों को खासा पसंद आता है, और पहाड़ी बागानों से सीधे आने वाले ये सेब हमेशा ताजे और खुशबूदार बने रहते हैं। नैनीताल की यात्रा के दौरान इन पहाड़ी सेब का स्वाद लेना न भूलें।

हिसालु, किलमोड़ा और घिंघारु जैसे जंगली फलों की सौगात

हिसालु पहाड़ों में मिलने वाला एक जंगली फल है, जो बरसात के मौसम में खासतौर पर नजर आता है। पीले और नारंगी रंग का यह छोटा फल स्वाद में हल्का खट्टा-मीठा होता है। मुक्तेश्वर के रहने वाले नीरज के मुताबिक, पहाड़ी ढलानों और जंगलों के आसपास उगने वाला हिसालु स्थानीय लोगों के बचपन की यादों से गहरे तौर पर जुड़ा हुआ है। इसे पेड़ से ताजा तोड़कर खाने का अपना ही मजा है, और कई जगहों पर स्थानीय लोग इसे बाजारों में बेचते भी हैं। नैनीताल के आसपास घूमते हुए अगर हिसालु दिख जाए, तो इसका स्वाद जरूर चखना चाहिए। इसी तरह किलमोड़ा भी पहाड़ों का एक ऐसा जंगली फल है, जिसका स्वाद और पहचान दोनों अलग हैं। गहरे बैंगनी रंग का यह फल बरसात के मौसम में पहाड़ी जंगलों और ढलानों पर देखने को मिलता है। नीरज बताते हैं कि स्थानीय लोग इसे नमक या मसाले के साथ खाना पसंद करते हैं। किलमोड़ा का स्वाद हल्का खट्टा और कसैला होता है, जो इसे बाकी फलों से अलग बनाता है और इसे पहाड़ी जीवनशैली से जुड़े स्वाद का प्रतीक माना जाता है। वहीं घिंघारु पहाड़ी क्षेत्रों में मिलने वाला छोटा लेकिन खास जंगली फल है, जिसका रंग लाल या गहरा लाल होता है और स्वाद हल्का खट्टा-मीठा लगता है। बरसात के मौसम में गांवों और जंगलों के आसपास घिंघारु के पेड़ नजर आते हैं और स्थानीय लोग इसे बचपन से खाते आ रहे हैं, इसलिए इसे पहाड़ों की देसी सौगात भी माना जाता है। इसकी खुशबू और स्वाद में पहाड़ी मिट्टी की अलग पहचान महसूस होती है। नैनीताल की ट्रिप के दौरान घिंघारु जैसे जंगली फलों को चखना पहाड़ी संस्कृति को करीब से जानने का एक अच्छा मौका बन सकता है।

सवाल-जवाब

बरसात में नैनीताल के बाजारों में कौन-कौन से पहाड़ी फल मिलते हैं?
आड़ू, प्लम, खुमानी, नाशपाती और सेब के अलावा हिसालु, किलमोड़ा और घिंघारु जैसे जंगली फल भी मिलते हैं।
नैनीताल में ये फल किन बाजारों में सबसे ज्यादा मिलते हैं?
मल्लीताल और तल्लीताल के बाजारों के साथ-साथ रामगढ़-मुक्तेश्वर इलाके में ये फल प्रमुखता से मिलते हैं।
प्लम यानी आलूबुखारा नैनीताल में सबसे ज्यादा कहां उगता है?
यह फल रामगढ़-मुक्तेश्वर इलाके में सबसे ज्यादा उगाया जाता है।
हिसालु और किलमोड़ा किस तरह के फल हैं?
ये पहाड़ों में मिलने वाले जंगली फल हैं, जो बरसात के मौसम में जंगलों और ढलानों पर उगते हैं।
पहाड़ी नाशपाती को स्थानीय लोग किस तरह खाना पसंद करते हैं?
इसे पहाड़ी नूण यानी खास नमक के साथ खाने पर इसका स्वाद दोगुना हो जाता है।
क्या इन पहाड़ी फलों से कोई और चीजें भी बनाई जाती हैं?
हां, आड़ू और खुमानी से जूस, जैम, चटनी और मिठाइयां भी तैयार की जाती हैं।
मुक्तेश्वर के नीरज ने हिसालु के बारे में क्या बताया?
उन्होंने बताया कि हिसालु स्थानीय लोगों के बचपन की यादों से जुड़ा हुआ फल है और इसे ताजा तोड़कर खाने का अलग ही मजा है।
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