दुनिया भर में इंडोनेशिया को सबसे अधिक मुस्लिम आबादी वाले देश के रूप में जाना जाता है, लेकिन इसके मुख्य भूभाग से दूर स्थित बाली एक ऐसा अनूठा द्वीप है जहां लगभग 90 प्रतिशत आबादी हिंदू धर्म को मानती है। यहां के लोग सदियों पुरानी अपनी सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं को पूरी तरह जीवंत रखे हुए हैं। इस द्वीप के हर घर में मंदिर बने हुए हैं और हजारों मंदिर तो सदियों पुराने हैं। इसी वजह से बाली को देवताओं का द्वीप भी कहा जाता है। प्राकृतिक सुंदरता की छटा बिखेरने वाले इस स्थान पर दुनिया भर के सैलानी हनीमून मनाने के लिए भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। यदि आप भी भारत से बाली की यात्रा करने की सोच रहे हैं, तो यहां आने वाले खर्च और घूमने लायक जगहों की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
भौगोलिक स्थिति और इतिहास
बाली द्वीप इंडोनेशिया के मुख्य हिस्से से अलग, दक्षिण-पूर्व एशिया में सुंडा द्वीप समूह के बीच स्थित है। इसके पश्चिम में बाली जलडमरूमध्य इसे मुख्य भूभाग यानी जावा द्वीप से अलग करता है और दक्षिण में विशाल हिंद महासागर फैला हुआ है। यह द्वीप ज्वालामुखी के उद्गार से बना था और इसके बीच के हिस्से में ऊंचे पर्वत मौजूद हैं। अंडमान निकोबार से बाली की दूरी लगभग 3000 किलोमीटर है। पुराने समय में भारत के लोग कोलकाता या मद्रास बंदरगाह से स्टीमर के जरिए इंडोनेशिया की यात्रा करते थे, जहां मुख्य बंदरगाहों तक पहुंचने में लगभग 5 से 10 दिन का समय लग जाता था।
हवाई यात्रा और रूट की जानकारी
आज के समय में समुद्री मार्ग से यात्रा करने के बजाय लोग हवाई मार्ग का उपयोग करते हैं। नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और चेन्नई से बाली जाना बेहद आसान है। नई दिल्ली से बाली के लिए रोजाना डायरेक्ट फ्लाइट उपलब्ध हैं। बाली की राजधानी डेनपसार में नूराह राय इंटरनेशनल एयरपोर्ट स्थित है। इसके अलावा एक लोंपोक एयरपोर्ट भी है, लेकिन वहां भारत से कभी-कभार ही उड़ानें आती हैं। भारत से बाली पहुंचने में लगभग 7 घंटे का समय लगता है। हालांकि कई यात्री मलेशिया या सिंगापुर के रास्ते से भी बाली जाते हैं, क्योंकि वहां से आसानी से डायरेक्ट फ्लाइट मिल जाती हैं और किराए में भी बचत होती है। कुछ लोग पहले इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता जाते हैं और वहां से बाली की उड़ान लेते हैं, लेकिन जकार्ता से बाली की हवाई दूरी करीब 1000 किलोमीटर होने के कारण यह रास्ता थोड़ा लंबा पड़ जाता है।
फ्लाइट और ठहरने का खर्च
यदि आप भारत के किसी भी हवाई अड्डे से सीधे बाली की उड़ान लेते हैं, तो एक तरफ का किराया औसतन 15 से 20 हजार रुपये यानी दोनों तरफ का कुल किराया 30 से 40 हजार रुपये तक बैठ सकता है। हालांकि एयरलाइंस के ऑफर्स के अनुसार टिकट सस्ते भी मिल जाते हैं। मलेशिया या सिंगापुर के रास्ते जाने पर भी टिकट की लागत कम हो सकती है, जिसके लिए थोड़ी रिसर्च की आवश्यकता होती है। बाली में लगभग 1500 रुपये प्रतिदिन में ठीक-ठाक होटल मिल जाते हैं, जबकि 2 से 3 हजार रुपये में बेहतर मिड-रेंज होटल उपलब्ध हो जाते हैं। यदि दो लोग यात्रा कर रहे हैं, तो प्रति व्यक्ति 1500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से एक बहुत अच्छा कमरा मिल सकता है।
खानपान और स्थानीय परिवहन
खाने-पीने पर प्रति व्यक्ति रोजाना कम से कम 500 रुपये खर्च होने का अनुमान है। यदि आप 4 रातों की योजना बना रहे हैं, तो कुल पांच दिनों के प्रवास के दौरान प्रति व्यक्ति लगभग 10 हजार रुपये होटल का किराया और 5 हजार रुपये खाने-पीने का खर्च आएगा। बाली में घूमने के लिए यदि आप चार दिनों तक टैक्सी या कार ड्राइवर किराए पर लेते हैं, तो रोजाना के हिसाब से लगभग 5 लाख से 7 लाख इंडोनेशियाई रुपिया चुकाने होंगे, जो भारतीय मुद्रा में औसतन 3 हजार रुपये प्रतिदिन के बराबर बैठते हैं। इस प्रकार पांच दिनों में ट्रांसपोर्टेशन पर करीब 15 हजार रुपये खर्च होंगे।
कुल बजट और प्रमुख दर्शनीय स्थल
फ्लाइट के 35 हजार रुपये, होटल के 10 हजार रुपये, खाने के 5 हजार रुपये और ट्रांसपोर्ट के 15 हजार रुपये को जोड़ लिया जाए, तो कुल खर्च लगभग 65 हजार रुपये तक पहुंचता है। दो लोगों के साथ यात्रा करने पर यह खर्च कुछ कम भी हो सकता है। इसके अलावा खरीदारी और अन्य खर्चों को मिलाकर 4 रातों की इस यात्रा के लिए 70 से 80 हजार रुपये का सामान्य बजट मानकर चलना चाहिए, हालांकि खर्च आपकी अपनी इच्छा और क्षमता पर निर्भर करता है। इसके अलावा बाली में कई विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक स्थल हैं। जतिलुविह राइस टेरेस यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल है, जहां विशाल हरियाली के बीच ट्रैकिंग करना पर्यटकों को एक बेहद सुकून भरा अनुभव देता है और यहां की सुबक सिंचाई प्रणाली सदियों पुरानी कृषि संस्कृति का प्रतीक है। इसी तरह बेडुलुक में स्थित उलु दातू बेरतन मंदिर भी यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट का हिस्सा है, जो शांत बेरतन झील के पानी के बीच तैरता हुआ प्रतीत होता है और अपने पारंपरिक वास्तुकला के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
यात्रा के दौरान घूमने के अन्य मुख्य स्थान
चार दिनों की अपनी यात्रा के दौरान पर्यटक पहले दिन उबुद के प्रसिद्ध मंकी फॉरेस्ट, तेगाललालांग राइस टेरेस और कला बाजार की सैर कर सकते हैं। दूसरे दिन माउंट बातुर या उलुवातु मंदिर जाकर कैचान डांस का आनंद लिया जा सकता है। इसके बाद तीसरे दिन मशहूर धान लॉट और बेडुलुक स्थित मंदिरों को देखा जा सकता है, और चौथे दिन नूसा दुआ या सेमिन्याक के खूबसूरत बीच पर relax करते हुए समय बिताया जा सकता है। बाली के हर कोने में संस्कृति और प्रकृति का अनूठा संगम देखने को मिलता है, जो हर यात्री के मन में गहरी छाप छोड़ जाता है।



















