कंगना रनौत के बेरोजगार वाले बयान पर सौरव दास की अनोखी प्रतिक्रिया, खुद की तुलना ऋतिक रोशन से कीभारत में लॉन्च हुआ एक्सक्लूसिव मिनी कनवर्टिबल का स्टारडस्ट एडिशन, कीमत 62.90 लाख रुपये30 जुलाई 2026 को मूलांक 9 के जातकों को मंगल से मिलेगी नई ऊर्जा, जिम्मेदारियों को पूरा कर हासिल करेंगे बढ़तअयोध्या के विद्वानों के अनुसार चातुर्मास में जप दान और तप से क्यों मिलता है कई गुना पुण्यबांकीपुर उपचुनाव के दौरान जन सुराज कार्यकर्ताओं की हिरासत पर भड़के प्रशांत किशोर, बीजेपी पर लगाया पुलिस के गलत इस्तेमाल का आरोपराम भक्तों को अब चढ़ावे की रसीद तुरंत मिलेगी, ट्रस्ट ने वेबसाइट में किया बदलावलाइव: संसद के मानसून सत्र का 9वां दिन: लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट जज विधेयक पर चर्चा, राज्यसभा में पेपर लीक विरोधी बिल पेशसावन के त्योहार पर बरेली के अजंता स्वीट्स में शुद्ध देसी घी के पारंपरिक और आधुनिक स्वाद वाले घेवर की भारी मांगनितेश तिवारी की रामायण पार्ट 1 का 4 मिनट का ट्रेलर जारी, रावण और दिव्य सफेद हाथी ऐरावत की भिड़ंत ने बढ़ाई उत्सुकतासावन कांवड़ यात्रा के चलते दिल्ली गाजियाबाद से हरिद्वार तक बदला ट्रैफिक रूट, सफर पर निकलने से पहले जानें एडवाइजरी
मानसून के दौरान भूलकर भी न बनाएं इन 6 जगहों पर जाने का ट्रिप, जान पर बन सकती है बातयात्रा
11 जुल॰ 2026, 1:12 am (19 दिन पहले)· 2

मानसून के दौरान भूलकर भी न बनाएं इन 6 जगहों पर जाने का ट्रिप, जान पर बन सकती है बात

मानसून के दौरान भारत के कुछ प्रमुख पर्यटन स्थल जोखिम भरे हो सकते हैं। भूस्खलन, अचानक आई बाढ़ और खराब दृश्यता के चलते इन 6 डेस्टिनेशंस पर यात्रा टालना ही समझदारी है।

बारिश के मौसम में प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में होती है, लेकिन यही वह समय है जब यात्रा के दौरान अनपेक्षित खतरे भी बढ़ जाते हैं। मानसून की खूबसूरती के पीछे छिपे जोखिमों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है, क्योंकि अचानक आने वाली बाढ़, बादल फटने और भूस्खलन जैसी घटनाएं जान-माल के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं। अगर आप आने वाले महीनों में किसी ट्रिप की प्लानिंग कर रहे हैं, तो इन 6 डेस्टिनेशंस से फिलहाल दूरी बनाए रखना ही बेहतर होगा।

उत्तराखंड: केदारनाथ और बद्रीनाथ

उत्तराखंड के ये धार्मिक स्थल श्रद्धा और आस्था के बड़े केंद्र हैं, लेकिन मानसून के दौरान यहां का रास्ता अत्यधिक खतरनाक हो जाता है। भारी वर्षा के कारण पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन का खतरा निरंतर बना रहता है, जिसके कारण अक्सर सड़कें कई दिनों तक बंद रहती हैं। इसके अतिरिक्त, इस इलाके में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ की घटनाएं पर्यटकों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं, इसलिए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लें।

ये भी पढ़ें

हिमाचल प्रदेश: मनाली और स्पीति घाटी

हिमाचल प्रदेश की वादियां मानसून में बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाती हैं। ब्यास नदी का जलस्तर बारिश के दौरान इतनी तेजी से बढ़ता है कि यह अपने आसपास बसे इलाकों को भी अपनी चपेट में ले लेती है। स्पीति घाटी की दुर्गम सड़कों पर पत्थरों के गिरने और कीचड़ के कारण फिसलन भरी स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे गाड़ियों के गहरी खाइयों में गिरने का डर हमेशा बना रहता है।

कोंकण और मुंबई के तटीय इलाके

तटीय इलाकों में समुद्र की लहरें मानसून के दौरान रौद्र रूप धारण कर लेती हैं, जो पर्यटकों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। कोंकण तट और मुंबई के तटीय क्षेत्रों में अरब सागर में ऊंची और खतरनाक लहरें उठती हैं, जिनसे दूर रहना ही समझदारी है। इसके अलावा, मुंबई और उसके आसपास भारी बारिश से सड़कों पर भीषण जल-जमाव हो जाता है, जिससे आवाजाही पूरी तरह बाधित हो जाती है और सामान्य जीवन पर गहरा असर पड़ता है।

केरल: वायनाड और मुन्नार

केरल में मानसून की दस्तक बहुत शक्तिशाली होती है। वायनाड और मुन्नार जैसे सुंदर हिल स्टेशनों पर मानसून के दौरान मडस्लाइड यानी कीचड़ खिसकने और भूस्खलन की घटनाएं आम हो जाती हैं। भारी बारिश के चलते पहाड़ी रास्तों पर दृश्यता यानी विजिबिलिटी लगभग शून्य हो जाती है, जिससे वाहन चलाना जान जोखिम में डालने जैसा है।

मेघालय: चेरापूंजी और मौसिनराम

चेरापूंजी और मौसिनराम को दुनिया के सबसे अधिक वर्षा वाले स्थानों के रूप में जाना जाता है। हालांकि ये जगहें अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन मानसून के दौरान यहां होने वाली मूसलाधार बारिश आपको बाहर निकलने का मौका तक नहीं देती। कोहरे और लगातार गिरते पानी के कारण आप न तो झरनों का आनंद ले पाएंगे और न ही प्राकृतिक नजारों को देख पाएंगे, जिससे यात्रा का उद्देश्य ही विफल हो सकता है।

असम: काज़ीरंगा नेशनल पार्क

यदि आप मानसून के दौरान वाइल्डलाइफ सफारी का सपना देख रहे हैं, तो असम जाने का विचार टाल दें। इस मौसम में ब्रह्मपुत्र नदी का पानी काज़ीरंगा नेशनल पार्क के एक बड़े हिस्से में भर जाता है, जिससे वहां बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस पूरे मौसम के दौरान पार्क को बंद कर दिया जाता है, जिससे वहां सफारी की कोई संभावना नहीं रहती।

सवाल-जवाब

मानसून में किन जगहों पर जाने से बचना चाहिए?
मानसून में केदारनाथ, बद्रीनाथ, मनाली, स्पीति घाटी, कोंकण, मुंबई के तटीय इलाके, वायनाड, मुन्नार, चेरापूंजी, मौसिनराम और काज़ीरंगा नेशनल पार्क जाने से बचना चाहिए।
काज़ीरंगा नेशनल पार्क मानसून में क्यों बंद रहता है?
ब्रह्मपुत्र नदी का पानी काज़ीरंगा नेशनल पार्क में भर जाने के कारण बाढ़ की स्थिति बन जाती है, इसलिए सुरक्षा के लिए इसे बंद रखा जाता है।
पहाड़ी इलाकों में मानसून में ड्राइविंग क्यों खतरनाक है?
भारी बारिश के कारण सड़कों पर भूस्खलन, कीचड़, और विजिबिलिटी कम होने से गाड़ियों के फिसलकर गहरी खाइयों में गिरने का खतरा रहता है।
क्या मानसून में तटीय इलाकों की यात्रा सुरक्षित है?
नहीं, मानसून के दौरान समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरें और मुंबई जैसे शहरों में जल-जमाव के कारण तटीय इलाकों की यात्रा असुरक्षित हो सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR