उत्तराखंड के पर्वतीय एवं मैदानी भूभाग में मानसून के अति-आक्रामक रुख से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। भारतीय मौसम पूर्वानुमान विभाग (IMD) की ओर से 03 सितंबर हेतु नैनीताल और अल्मोड़ा सहित राज्य के अनेक सीमांत एवं पहाड़ी जनपदों के लिए भारी से अत्यधिक भारी वर्षा की आशंका व्यक्त करते हुए रेड अलर्ट जारी किया है। लगातार जारी मूसलाधार बारिश तथा जगह-जगह हो रहे भूस्खलन के कारण पूरे कुमाऊं और गढ़वाल मंडल में आम नागरिकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून द्वारा जारी पूर्वानुमान बुलेटिन के अनुसार उत्तरकाशी, टिहरी, देहरादून, चमोली, नैनीताल, चम्पावत, पिथौरागढ़, ऊधम सिंह नगर तथा बागेश्वर जिलों में गर्जना के साथ तेज आकाशीय बिजली गिरने और अतिवृष्टि होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। पर्वतीय मार्गों पर दरकती पहाड़ियों और गिरते पत्थरों के चलते स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है। बीते 24 घंटों के दौरान कुमाऊं मंडल के विभिन्न इलाकों में वर्षा जनित हादसों में 6 लोगों की दुखद जान चली गई, जिसके पश्चात शासन ने उफनती नदियों के तटवर्ती क्षेत्रों एवं भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में निवास कर रहे परिवारों को फौरन सुरक्षित स्थलों पर जाने की हिदायत दी है। इसके अतिरिक्त, समूचे कुमाऊं क्षेत्र में 95 सड़कें मलबे की वजह से बंद हैं, जिससे कई दूरस्थ गांवों का जिला मुख्यालयों से संपर्क टूट चुका है।
अल्मोड़ा और रानीखेत बेल्ट: शिक्षण संस्थानों में छुट्टी और 15 ग्रामीण सड़कें ठप
अल्मोड़ा जिले में मूसलाधार वर्षा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मौसम विभाग ने अल्मोड़ा शहर के अतिरिक्त रानीखेत, चौखुटिया, भिकियासैंण, द्वाराहाट, भनोली तथा कटारमल समेत प्रमुख क्षेत्रों में अति-मूसलाधार वर्षा का अलर्ट जारी किया है। पहाड़ियों से लगातार आ रहे मलबे और पत्थरों के कारण जिले के 15 मुख्य व ग्रामीण रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे अंदरूनी इलाकों का आवागमन बाधित हो गया है। अल्मोड़ा शहर व आसपास के क्षेत्रों से होकर बहने वाली कोसी नदी का पानी तीव्र गति से ऊपर उठ रहा है। आपदा के खतरे को देखते हुए अल्मोड़ा के जिलाधिकारी ने 03 सितंबर को जिले भर के तमाम निजी, सरकारी एवं गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों, महाविद्यालयों व आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विद्यार्थियों की रक्षा से कोई समझौता न हो। इसके साथ ही नैनीताल, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी जिला स्तरीय अधिकारियों को 24 घंटे सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्थानीय लोगों तथा पर्यटकों से आग्रह किया है कि बिना किसी अति-आवश्यक काम के वे ऊंचाई पर स्थित सड़कों या उफनती नदियों के निकट जाने का जोखिम न लें।
नैनीताल और हल्द्वानी में जलप्रलय: 200 मिमी से अधिक वर्षा और गौला बैराज का जलप्रवाह
नैनीताल सरोवर नगरी और इसके मैदानी प्रवेश द्वार हल्द्वानी में मूसलाधार बारिश के चलते हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। नैनीताल जिले में पिछले 24 घंटों में औसतन 89 मिमी वर्षा हुई है, जबकि अकेले नैनीताल शहर में बारिश का आंकड़ा 200 मिमी के आंकड़े को पार कर गया है। 100 मिमी से अधिक वर्षा मुक्तेश्वर एवं कैंची धाम क्षेत्र में रिकॉर्ड की गई है। जलभराव और भूस्खलन के कारण पूरे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। नैनीताल स्थित गौला बैराज से जलस्तर नियंत्रित करने के लिए 27 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे रातभर तराई के निचले इलाकों में हड़कंप मचा रहा। हल्द्वानी, रामनगर, भीमताल, भवाली तथा कोटाबाग के तमाम नदी-नाले उफान पर हैं। गौला नदी के तीव्र प्रवाह के चलते लालकुआं, बिंदुखत्ता व शांतिपुरी इलाकों में बड़े पैमाने पर भू-कटान हो रहा है, जिससे खेती योग्य जमीन नदी में समाती जा रही है।
ऊधम सिंह नगर की मैदानी बस्तियां संकट में: नदियां उफान पर और फसलों का नुकसान
कुमाऊं के पर्वतीय इलाकों में बरस रहे मूसलाधार बादलों का सीधा प्रभाव ऊधम सिंह नगर जिले के तराई क्षेत्रों पर पड़ रहा है। पहाड़ी क्षेत्रों से बहकर आ रहे पानी की वजह से जिले में कोसी, गौला, नंधौर, दाबका तथा कैलाश नदियां खतरे के निशान के निकट पहुंच चुकी हैं। शांतिपुरी तथा लालकुआं के तराई इलाके में कृषि खेतों में पानी समाने से खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रशासन की लाउडस्पीकर युक्त मुनादी गाड़ियां नदी किनारे बसी बस्तियों में लगातार सायरन बजाकर लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दे रही हैं। राहत व बचाव दल स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं ताकि जलस्तर अचानक बढ़ने पर जानमाल के नुकसान को रोका जा सके।
कुमाऊं में 95 मार्ग बंद: रणनीतिक सीमावर्ती सड़कें बाधित, पर प्रमुख हाईवे खुले
पहाड़ों में बारिश का सबसे ज्यादा असर सड़क यातायात पर पड़ा है। कुमाऊं मंडल में भूस्खलन और मलबा आने के कारण कुल 95 सड़कें बंद हैं। रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण तवाघाट-धारचूला एवं गूंजी-तवाघाट सीमावर्ती सड़कों पर भी मलबे के कारण वाहनों का चलना बंद हो गया है। जिलों के आंकड़े देखें तो नैनीताल जिले में 47 सड़कें बंद हैं, जिनमें 3 स्टेट हाईवे, 3 डिस्ट्रिक्ट रोड और 41 ग्रामीण संपर्क रास्ते शामिल हैं। नैनीताल के गर्जिया-बेतालघाट-खैरना, खनस्यू-पतलोट तथा काठगोदाम-सिमलियाबैड प्रांतीय राजमार्ग भारी मलबे से बंद पड़े हैं। हालाँकि इस आपदा के मध्य राहत भरी बात यह सामने आई है कि तमाम मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग खुले हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की जेसीबी मशीनों ने टनकपुर-चंपावत-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग, हल्द्वानी-अल्मोड़ा मार्ग तथा हल्द्वानी-नैनीताल हाईवे से निरंतर मलबा हटाकर आवागमन सुचारु रखा है।
देहरादून, विकासनगर और चमोली का हाल: मकान ढहे और 8 सितंबर तक वर्षा का पूर्वानुमान
देहरादून राजधानी और समीपवर्ती विकासनगर इलाके में पिछले दिनों हुई अतिवृष्टि का असर अभी बना हुआ है। विकास नगर तहसील के बिधोली, कंडोली, शुद्धोवाला, प्रेमनगर, नवाबगढ़ तथा हरबर्टपुर समेत कई ग्रामीण क्षेत्रों में काफी तबाही देखने को मिली है। अनेक पक्के मकान भरभरा कर गिर गए, जबकि रिहायशी बस्तियों में जलभराव होने से घरेलू सामान पूरी तरह नष्ट हो गया। मौसम विभाग ने आज भी देहरादून में तेज वर्षा और बिजली चमकने का अनुमान व्यक्त किया है। स्थानीय नगर निगम व जिला प्रशासन पानी भरे इलाकों में पंप सेट लगाकर पानी निकालने और प्रभावित परिवारों को राहत सामग्री देने में जुटे हैं। उधर सीमावर्ती जनपद चमोली में बीते 24 घंटों के दौरान रुक-रुक कर हो रही वर्षा का दौर बना हुआ है। बुधवार सुबह कुछ देर धूप खिलने से लोगों ने राहत महसूस की थी, लेकिन दोपहर बाद फिर आसमान में बादलों का जमावड़ा हो गया। बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर संवेदनशील जगहों पर ऊपर से पत्थर गिरने का खतरा बना हुआ है। मौसम केंद्र के अनुसार राज्य में बारिश का यह दौर आगामी 8 सितंबर तक बना रह सकता है, जिससे सभी अधिकारियों को अलर्ट रहने की हिदायत दी गई है।



















