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अरावली की सुंदर पहाड़ियों पर ट्रैकिंग का बढ़ा क्रेज, जयपुर के ये मुख्य रूट्स मानसून में बने युवाओं की पहली पसंदयात्रा
29 अग॰ 2026, 2:10 pm (60 दिन पहले)· 2

अरावली की सुंदर पहाड़ियों पर ट्रैकिंग का बढ़ा क्रेज, जयपुर के ये मुख्य रूट्स मानसून में बने युवाओं की पहली पसंद

मानसून आते ही जयपुर के आसपास की अरावली पहाड़ियां हरी-भरी हो उठी हैं। नाहरगढ़, जयगढ़, जलमहल और आमागढ़ जैसे 10 से 15 ट्रैकिंग ट्रैक्स पर पर्यटकों और स्थानीय युवाओं का जमावड़ा लग रहा है।

मानसून के महीने की शुरुआत होते ही राजस्थान की ऐतिहासिक अरावली पर्वत श्रृंखला एक अद्भुत हरे-भरे रूप में तब्दील हो जाती है। बारिश की फुहारों के बीच पहाड़ियों की प्राकृतिक सुंदरता और हरियाली युवाओं से लेकर हर उम्र के प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर खींचने लगती है। जयपुर शहर के चारों तरफ फैली अरावली की चोटियाँ इन दिनों ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए सबसे पसंदीदा ठिकाना बनी हुई हैं। गुलाबी नगरी में करीब 10 से 15 छोटे-बड़े ट्रैकिंग रूट्स मौजूद हैं, लेकिन इनमें से कुछ चुनिंदा ट्रैक्स ऐसे हैं जहाँ मानसून के मौसम में स्थानीय निवासियों और बाहर से आने वाले पर्यटकों का भारी हुजूम देखने को मिलता है। इन रास्तों पर घूमना न केवल सेहत के लिए एक बेहतरीन कसरत साबित होता है, बल्कि फोटोग्राफी और मानसिक शांति के लिहाज़ से भी यह एक शानदार अनुभव प्रदान करता है।

नाहरगढ़, जयगढ़ और आमेर की ऐतिहासिक किलाबंदी वाले रास्ते

जयपुर में मानसून के दौरान सबसे अधिक लोकप्रिय और आसानी से तय किए जाने वाले रास्तों में नाहरगढ़, जयगढ़ और आमेर की घाटियाँ शामिल हैं। इन इलाकों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ की प्राचीन किलों की दीवारें कई किलोमीटर तक पहाड़ियों की चोटियों पर दूर-दूर तक फैली हुई हैं। इन पक्के और पथरीले रास्तों पर पैदल चलना काफ़ी सुगम होता है, जिससे नए ट्रैकर्स भी यहाँ बिना किसी बड़ी चुनौती के चढ़ाई कर सकते हैं। ऊँचाई पर पहुँचने के बाद हरी-भरी घाटियों के बीच से पूरे जयपुर शहर का मनोरम नज़ारा और व्यवस्थित बसावट दिखाई देती है। यही वजह है कि रील्स बनाने, फोटोग्राफी करने और वीडियोग्राफी के शौकीन युवाओं के बीच यह पूरा क्षेत्र पहली पसंद बना हुआ है।

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जलमहल के पीछे की वादियाँ, घने जंगल और बहते झरने

शहर के बीचों-बीच स्थित प्रसिद्ध जलमहल के पीछे की अरावली पहाड़ियों का नज़ारा बारिश के दिनों में बिल्कुल अलग और रमणीय हो जाता है। अगर आप घने जंगलों, प्राकृतिक जलधाराओं और छोटे-छोटे झरनों के बीच ट्रैकिंग का आनंद लेना चाहते हैं, तो जलमहल के आसपास की पहाड़ियाँ सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। यहाँ चट्टानों से घिरे शांत और हरे-भरे रास्ते ट्रैकर्स को एक अलग ही सुकून का अहसास कराते हैं। इस मार्ग पर आगे बढ़ते हुए गुर्जर घाटी से लेकर वैष्णो देवी मंदिर तक कई प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर भी रास्ते में आते हैं, जो इस ट्रैक को प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ एक आध्यात्मिक अनुभव भी प्रदान करते हैं।

सफारी क्षेत्र और चुनौतीपूर्ण ट्रैकिंग पॉइंट्स

जयपुर शहर की सीमाओं से लगी अरावली श्रृंखला में 4 प्रमुख लेपर्ड सफारी क्षेत्र भी स्थित हैं। घने जंगलों में फैली इन सफारियों में झालाना सफारी, आमागढ़ सफारी और बिड़ पापड़ सफारी प्रमुख हैं। हालांकि सफारी के मुख्य रास्तों से अलग हटकर पर्यटकों के लिए विशेष ट्रैकिंग पॉइंट्स भी विकसित किए गए हैं। इन रास्तों में आमागढ़ ट्विन टावर ट्रेल, हथनी कुंड, नटाटा वैली, चौर घाटी और आमेर सागर से कुकस तक फैला चट्टानी रास्ता काफी प्रसिद्ध है। विशेष तौर पर आमागढ़ और हथनी कुंड के इलाकों में पुराने टावरों तक जाने वाली सीधी चढ़ाई वाले रास्ते एडवेंचर के शौकीन युवाओं को काफ़ी आकर्षित करते हैं।

धार्मिक आस्था से जुड़े प्राचीन पहाड़ी मार्ग

प्राकृतिक सुंदरता के अलावा जयपुर के कई ट्रैकिंग रूट्स धार्मिक महत्व भी रखते हैं। अरावली की घनी झाड़ियों और पहाड़ियों के बीच बने ये प्राचीन मंदिर मार्ग श्रद्धालुओं और ट्रैकर्स दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। इनमें गलताजी क्षेत्र में स्थित घाट के बालाजी, खोले के हनुमान जी मंदिर के आसपास फैली पहाड़ियाँ, पापड़ के हनुमान जी के पास का जंगल और गलता गेट की पहाड़ियाँ प्रमुख हैं। इन ऐतिहासिक स्थलों तक पहुँचने के लिए सामान्यतः कोई पक्का सड़क मार्ग नहीं है, इसलिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पथरीले पहाड़ी रास्तों से होकर ही गुज़रना पड़ता है।

मानसून में सुरक्षित ट्रैकिंग के लिए ज़रूरी सावधानियाँ

मानसून में पहाड़ियों की सुंदरता जितनी मनमोहक होती है, उतने ही जोखिम भी बढ़ जाते हैं। ऐसे में अरावली के जंगलों में ट्रैकिंग करते समय कुछ विशेष सावधानियाँ बरतना बेहद ज़रूरी है

  • अकेले जाने से बचें: अनजान या घने जंगलों वाले रास्तों पर कभी भी अकेले न निकलें, हमेशा 4-5 लोगों का समूह बनाकर ही ट्रैकिंग करें।
  • स्थानीय गाइड का सहयोग लें: जिन रास्तों की पूरी जानकारी न हो, वहाँ किसी स्थानीय नागरिक या जानकार गाइड को अपने साथ ज़रूर रखें।
  • सही जूतों का चयन: गीली चट्टानों और फिसलन भरे रास्तों पर चलने के लिए हमेशा अच्छी ग्रिप वाले ट्रैकिंग शूज़ का ही इस्तेमाल करें।
  • ज़रूरी सामग्री साथ रखें: अपने बैग में पर्याप्त पीने का पानी, ओआरएस और हल्का सूखा भोजन ज़रूर रखें।
  • वन विभाग के नियमों का पालन: वन्यजीव संरक्षण और अपनी सुरक्षा के लिए वन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करें और प्रतिबंधित क्षेत्रों में न जाएँ।

सवाल-जवाब

जयपुर में मानसून के समय ट्रैकिंग के लिए सबसे लोकप्रिय जगहें कौन सी हैं?
नाहरगढ़, जयगढ़, जलमहल के पीछे की पहाड़ियाँ, आमागढ़ ट्विन टावर ट्रेल और गलताजी क्षेत्र सबसे लोकप्रिय ट्रैकिंग स्पॉट्स हैं।
क्या मानसून में नाहरगढ़ और जयगढ़ पर ट्रैकिंग करना आसान है?
हाँ, इन किलों की दीवारों के साथ बने पथरीले रास्ते सुगम हैं, इसलिए यहाँ शुरुआती ट्रैकर्स भी आसानी से चढ़ाई कर सकते हैं।
क्या अरावली जंगलों में अकेले ट्रैकिंग की जा सकती है?
सुरक्षा के लिहाज़ से अनजान या घने जंगलों में अकेले ट्रैकिंग न करने और हमेशा समूह में स्थानीय गाइड के साथ जाने की सलाह दी जाती है।
जयपुर की अरावली श्रृंखला में कितनी लेपर्ड सफारी स्थित हैं?
जयपुर में अरावली क्षेत्र के अंतर्गत 4 लेपर्ड सफारियाँ आती हैं, जिनमें झालाना, आमागढ़ और बिड़ पापड़ सफारी शामिल हैं।
जलमहल के पीछे ट्रैकिंग के दौरान कौन से प्रमुख स्थल रास्ते में आते हैं?
यहाँ प्राकृतिक झरनों और जंगलों के साथ-साथ गुर्जर घाटी से वैष्णो देवी मंदिर जैसे कई प्राचीन मंदिर रास्ते में आते हैं।
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