प्रकृति प्रेमियों और बच्चों के लिए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर में एक बेहद शांत और खूबसूरत ठिकाना तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. शहर के मध्य स्थित ऐतिहासिक कंपनी गार्डन में विकसित तितली पार्क इन दिनों लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है. सुबह की सैर पर निकलने वाले नागरिक हों या शाम के वक्त सुकून तलाशते परिवार, हर कोई इस खास पार्क में कुछ पल बिताने और उड़ती हुई रंगीन तितलियों को करीब से देखने पहुंच रहा है.
संरक्षण के इरादे से रखी गई थी नींव
पर्यावरण में तितलियों की कम होती तादाद और उनके अस्तित्व पर मंडराते संकट को देखते हुए इस अनूठी परियोजना की रूपरेखा तैयार की गई थी. नेताजी सुभाषचंद्र बोस उद्यान यानी कंपनी बाग परिसर में इस तितली पार्क का उद्घाटन 26 जनवरी 2020 को किया गया था. उस समय सहारनपुर के तत्कालीन कमिश्नर संजय कुमार ने इसे जनता को समर्पित किया था. इस पूरे प्रयास का प्राथमिक मकसद तितलियों की विभिन्न नस्लों को फलने-फूलने का सुरक्षित दायरा देना और उनका संरक्षण सुनिश्चित करना था.
चार एकड़ में फैला प्राकृतिक पर्यावास
यह तितली पार्क उद्यान विभाग के लगभग चार एकड़ भूभाग पर तैयार किया गया है. इस पूरे प्रोजेक्ट को सहारनपुर विकास प्राधिकरण और उद्यान विकास समिति के साझा प्रयासों से धरातल पर उतारा गया है. पार्क का पूरा बुनियादी ढांचा इस तकनीक और बारीकी से डिजाइन किया गया है, जिससे तितलियों को उनकी प्राकृतिक जरूरतों के हिसाब से सुरक्षित और अनुकूल माहौल मिल सके.
15 हजार से ज्यादा पौधों से सजा जीवनचक्र
पार्क के अंदर करीब 40 किस्म की तितलियों की वंशवृद्धि और पोषण के लिए विशेष वनस्पति लगाई गई है. इनके पूरे जीवनचक्र को ध्यान में रखते हुए 86 अलग-अलग किस्मों के कुल 15,590 होस्ट और नेक्टर पौधे रोपे गए हैं. ये खास पौधे तितलियों के अंडों से लेकर कैटरपिलर और वयस्क बनने तक के सफर में जरूरी भोजन और पराग मुहैया कराते हैं, जिससे उनका कुनबा प्राकृतिक रूप से बढ़ता रहे.
जागरूकता और घटती आबादी की चिंता
पार्क केवल सैर-सपाटे का स्थान नहीं है, बल्कि यहां आने वाले आगंतुकों को तितलियों के जीवनचक्र और उनके पर्यावरणीय महत्व की विस्तृत जानकारी भी मिलती है. पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन में तितलियां अत्यंत अहम भूमिका निभाती हैं. चिंताजनक पहलू यह है कि बीते तकरीबन 40 वर्षों के दौरान तितलियों की प्रजातियों में करीब 40 फीसदी तक की भारी कमी दर्ज की गई है. प्राकृतिक आवासों के विनाश, बढ़ते प्रदूषण और खेती में कीटनाशक दवाओं के अंधाधुंध छिड़काव ने इस खूबसूरत जीव पर गहरा नकारात्मक असर डाला है. ऐसे कठिन दौर में यह पार्क संरक्षण का व्यावहारिक उदाहरण बनकर प्रकृति की रक्षा का संदेश दे रहा है.



















