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भीम मल्ला और भुवनलक्ष्मी की वह कहानी, जिससे जुड़ा है नेपाल का चर्चित श्रापट्रेंड्स
4 सित॰ 2026, 6:48 pm (14 दिन पहले)· 2

भीम मल्ला और भुवनलक्ष्मी की वह कहानी, जिससे जुड़ा है नेपाल का चर्चित श्राप

नेपाल की राजनीतिक उठापटक और आपदाओं के बीच अक्सर एक पुराने श्राप की चर्चा होती है। इतिहास के पन्नों में दर्ज भीम मल्ला और उनकी पत्नी भुवनलक्ष्मी की यह गाथा सदियों से लोगों के बीच जीवित है।

जब भी पड़ोसी देश नेपाल में सियासी अस्थिरता, बार-बार सरकार बदलने के हालात या प्राकृतिक आपदाओं का जिक्र छिड़ता है, तो वहां की आम जुबान पर एक पुरानी कहावत जरूर आ जाती है। इस चर्चित कहावत को "सती ले सारेपेको देश" यानी उस राष्ट्र के रूप में पुकारा जाता है जिसे किसी सती स्त्री ने श्राप दिया हो। आधुनिक वैज्ञानिक दौर में भूस्खलन, भूकंप या बाढ़ जैसी तबाही के पीछे भौगोलिक स्थितियां और जलवायु बदलाव प्रमुख कारण माने जाते हैं, फिर भी यह लोककथा आज भी लोगों की स्मृतियों में गहरी जगह बनाए हुए है। इस पूरी किंवदंती की जड़ें सत्रहवीं शताब्दी के उस कालखंड में मिलती हैं जब काठमांडू घाटी में मल्ल राजवंश का शासनकाल चल रहा था।

सत्रहवीं शताब्दी का काठमांडू और राजनीतिक षड्यंत्र

वह दौर केवल राजाओं के वैभव और विलासिता का नहीं था, बल्कि महलों के भीतर गहरी महत्वाकांक्षाओं, आपसी ईर्ष्या और गुप्त चालों का दौर भी था। उस समय राजा लक्ष्मीनरसिंह मल्ल की राजसभा में काजी भीम मल्ल एक बेहद ताकतवर, लोकप्रिय और दक्ष सैन्य कमांडर के रूप में कार्य करते थे। उन्होंने तिब्बत के साथ नेपाल के व्यापारिक तथा कूटनीतिक संबंधों को सुधारने और बढ़ाने में बहुत अहम भूमिका निभाई थी। उनकी बढ़ती साख और जनता के बीच मिल रहे भारी समर्थन ने राजदरबार के अन्य प्रभावशाली लोगों और उनके विरोधियों को बेचैन करना शुरू कर दिया। इसी ईर्ष्या के चलते भीम मल्ल के प्रतिद्वंद्वियों ने राजा के कानों में उनके खिलाफ जहर घोलना शुरू कर दिया और यह साबित करने की कोशिश की कि यह मंत्री अब राजसिंहासन के लिए ही खतरा बन चुका है।

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एक वफादार कमांडर की अन्यायपूर्ण हत्या

दरबारी चालाकियों और मनगढ़ंत आरोपों के सामने राजा का विश्वास डगमगा गया और उन्होंने बिना किसी निष्पक्ष जांच या पड़ताल के अपने सबसे भरोसेमंद अधिकारी को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया। इसके बाद भीम मल्ल को मौत की सजा सुना दी गई, जो इतिहास के पन्नों में एक गंभीर और त्रासद अन्याय के रूप में दर्ज है। इस पूरी घटना के बाद उनकी पत्नी भुवनलक्ष्मी अकेली रह गईं और उनके जीवन का सब कुछ एक ही झटके में बिखर गया। उस समय की सामाजिक कुप्रथाओं के अनुसार विधवा महिलाओं को उनके पति की चिता के साथ सती होने के लिए बाध्य किया जाता था, और गहरे शोक में डूबी भुवनलक्ष्मी को भी इसी रास्ते पर धकेल दिया गया।

चिताओं के बीच दिया गया वह ऐतिहासिक श्राप

किंवदंतियों के अनुसार, जब भुवनलक्ष्मी अपने पति की चिता पर बैठने जा रही थीं, तब उनके भीतर का दर्द और आक्रोश अपने चरम पर था। अपने जीवन के अंतिम क्षणों में उन्होंने नेपाल की इस पूरी धरती और वहां के शासक वर्ग को एक भयंकर श्राप दिया। परंपराओं के मुताबिक उन्होंने कहा था कि जिस तरह एक निर्दोष और वफादार इंसान को बिना किसी गलती के मौत के घाट उतार दिया गया है, ठीक उसी तरह यह देश और इसकी सत्ता संभालने वाले लोग हमेशा उथल-पुथल, संघर्षों और त्रासदियों से घिरे रहेंगे। इसी दर्दनाक प्रसंग से उस मशहूर कहावत का जन्म हुआ जिसे आज भी लोग दोहराते हैं।

कहावत का वास्तविक अर्थ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण

समय बीतने के साथ यह अभिव्यक्ति केवल एक श्राप तक सीमित नहीं रही, बल्कि नेपाल के राजनीतिक इतिहास में बार-बार पैदा होने वाले संकटों का पर्याय बन गई। आज जब भी देश में राजनीतिक उठापटक होती है या कोई बड़ी आपदा आती है, तो लोग इस मुहावरे का जिक्र करके व्यवस्था की कमियों को याद करते हैं। हालांकि विज्ञान और भूगोल स्पष्ट रूप से यह मानते हैं कि नेपाल में आने वाली प्राकृतिक आपदाएं हिमालयी क्षेत्र की बेहद नाजुक भौगोलिक बनावट और जलवायु परिवर्तन का परिणाम हैं। फिर भी, यह ऐतिहासिक वृत्तांत हमें यह चेतावनी जरूर देता है कि जब सत्ता में बैठे लोग शक और अन्याय का रास्ता चुनते हैं, तो उसका खामियाजा पूरे राष्ट्र को भुगतना पड़ता है।

सवाल-जवाब

नेपाल से जुड़ी उस प्रसिद्ध कहावत का क्या नाम है?
इस प्रसिद्ध कहावत को "सती ले सारेपेको देश" कहा जाता है।
यह घटना किस शताब्दी की है?
यह पूरी घटना 17वीं शताब्दी के दौरान की है।
उस समय नेपाल की किस घाटी में किसका शासन था?
उस समय नेपाल की काठमांडू घाटी में मल्ल राजवंश का शासन था।
काजी भीम मल्ल कौन थे?
काजी भीम मल्ल राजा लक्ष्मीनरसिंह मल्ल के दरबार में एक प्रभावशाली मंत्री और सैन्य कमांडर थे।
भीम मัล्ल की पत्नी का क्या नाम था?
उनकी पत्नी का नाम भुवनलक्ष्मी था।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नेपाल की आपदाओं का क्या कारण माना जाता है?
विज्ञान के अनुसार नेपाल की आपदाएं हिमालयी क्षेत्र की नाजुक भौगोलिक बनावट और जलवायु परिवर्तन का परिणाम हैं।
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