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भारत और नेपाल में विजयादशमी के रंग अलग क्यों हैं, जानिए इसके पीछे की वजहट्रेंड्स
21 अक्तू॰ 2026, 2:42 pm (2 घंटे पहले)· 1

भारत और नेपाल में विजयादशमी के रंग अलग क्यों हैं, जानिए इसके पीछे की वजह

भारत में जहां दशहरा रावण दहन और रामलीला के लिए जाना जाता है, वहीं नेपाल में यह पर्व दशैं के रूप में परिवार के मिलन और टीका-जमरा की परंपरा के साथ मनाया जाता है।

भारत में दशहरे का नाम आते ही आसमान छूते रावण के पुतले, भव्य रामलीला और मेलों की रौनक आंखों के सामने आ जाती है। लेकिन अगर आप भारत के पड़ोसी देश नेपाल का रुख करें, तो यही त्योहार एक बिल्कुल अलग और अनोखे रूप में नजर आता है। नेपाल में इस पर्व को दशैं के नाम से जाना जाता है और यह केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, बल्कि एक लंबा सांस्कृतिक और पारिवारिक पर्व है। इस दौरान लोग अपने घरों की ओर लौटते हैं, परिवार के साथ वक्त बिताते हैं, देवी दुर्गा की आराधना करते हैं और बड़े-बुजुर्गों से आशीर्वाद लेते हैं। इस पूरे उत्सव में माथे पर लगाया जाने वाला लाल टीका और जौ के हरे अंकुर यानी जमरा विशेष पहचान रखते हैं।

नेपाल के दशैं और भारत के दशहरे में क्या है अंतर?

नेपाल में दशैं को साल का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। इस बड़े उत्सव की शुरुआत घटस्थापना के साथ होती है, जिसके बाद लगातार कई दिनों तक देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान फूलपाती, महाष्टमी और महानवमी जैसे कई पवित्र अवसर आते हैं जो इस उत्सव की भव्यता को और बढ़ाते हैं। इस पर्व का मुख्य आकर्षण विजयादशमी के दिन देखने को मिलता है, जब परिवार के छोटे और युवा सदस्य अपने से बड़ों के पास पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। बड़े लोग उनके माथे पर लाल टीका लगाते हैं और साथ में जमरा भेंट करते हैं। जमरा असल में जौ या अन्य अनाजों से उगाए गए हरे पौधे होते हैं जिन्हें इस पर्व में बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा, पूरे परिवार का एक जगह एकत्र होना, नए परिधान पहनना और मिलकर दावत खाना भी दशैं का एक अनिवार्य हिस्सा है।

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दूसरी तरफ, भारत में दशहरे की पहचान पूरी तरह से रामलीला और रावण दहन से जुड़ी हुई है। देश के अनगिनत शहरों, कस्बों और गांवों में नौ दिनों तक रामायण के प्रसंगों का मंचन किया जाता है। विजयादशमी के दिन रावण, उसके भाई कुंभकर्ण और पुत्र मेघनाद के विशाल पुतलों को आग के हवाले किया जाता है। यह परंपरा मुख्य रूप से बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक मानी जाती है। हालांकि, भारत के भीतर भी इस पर्व को मनाने के तौर-तरीके एक जैसे नहीं हैं। पश्चिम बंगाल में विजयादशमी का दिन दुर्गा पूजा के विसर्जन और समापन से जुड़ा होता है, जबकि कर्नाटक के मैसूर और हिमाचल प्रदेश के कुल्लू में भव्य और अनोखे जुलूस निकाले जाते हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर में मनाया जाने वाला दशहरा अपनी अनूठी स्थानीय परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है, जहां रावण दहन मुख्य कार्यक्रम नहीं होता है। इस तरह भारत के भीतर ही इस त्योहार के कई अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं।

आखिर दोनों देशों की परंपराएं अलग क्यों हैं?

इन दोनों पड़ोसी देशों में एक ही त्योहार को मनाने के तरीकों में आए इस अंतर के पीछे धार्मिक मान्यताएं, स्थानीय संस्कृति और लंबा इतिहास जिम्मेदार है। दशैं और दशहरा दोनों ही पर्वों में देवी दुर्गा की पूजा और विजयादशमी के दिन का विशेष महत्व है, लेकिन समय के बीतने के साथ हर क्षेत्र ने अपनी संस्कृति के हिसाब से उत्सव के तरीके विकसित कर लिए। नेपाल में इस पूरे पर्व का मुख्य केंद्र देवी दुर्गा की उपासना, पारिवारिक मेलजोल और बड़ों से मिलने वाले आशीर्वाद पर टिका हुआ है। इसके विपरीत, भारत के बड़े हिस्से में भगवान राम की रावण पर विजय को रामलीला और पुतला दहन के माध्यम से जीवंत किया जाता है। देश के कुछ हिस्सों में देवी दुर्गा की महिषासुर पर ऐतिहासिक जीत भी इस पर्व का मुख्य आधार बनती है। इसलिए इन दोनों त्योहारों को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग मान लेना गलत होगा, क्योंकि दोनों की मूल भावना में आस्था और बुराई पर अच्छाई की जीत का विचार समान रूप से मौजूद है, बस उन्हें अभिव्यक्त करने की शैली स्थानीय परंपराओं के अनुसार बदल जाती है.

दशैं और दशहरे का संदेश क्या है?

भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से अलग दिखने के बावजूद नेपाल और भारत दोनों ही जगहों पर यह पर्व आस्था, पारिवारिक जड़ों और एक नई शुरुआत का संदेश देता है। नेपाल में टीका और जमरा के साथ मिलने वाला आशीर्वाद आपसी रिश्तों की गहराई और मजबूती को दर्शाता है, जबकि भारत में रामलीला और रावण दहन समाज को यह संदेश देते हैं कि अंततः सच्चाई और अच्छाई की ही जीत होती है। दोनों ही परंपराएं अपने-अपने तरीके से समाज को जोड़ने और संस्कारों को आगे बढ़ाने का काम करती हैं.

सवाल-जवाब

नेपाल में विजयादशमी के त्योहार को किस नाम से जाना जाता है?
नेपाल में इस पर्व को दशैं के नाम से जाना जाता है।
दशैं की शुरुआत किस अनुष्ठान से होती है?
नेपाल में दशैं की शुरुआत घटस्थापना के साथ मानी जाती है।
नेपाल में दशैं के दौरान माथे पर क्या लगाया जाता है?
इस दौरान माथे पर लाल टीका लगाया जाता है और जमरा दिया जाता है।
जमरा क्या होते हैं?
जमरा जौ या दूसरे अनाजों के उगाए गए हरे अंकुर होते हैं जिन्हें इस पर्व में बहुत शुभ माना जाता है।
भारत में दशहरे की मुख्य पहचान क्या है?
भारत में दशहरे की सबसे लोकप्रिय पहचान रामलीला और रावण दहन है।
छत्तीसगढ़ के किस स्थान पर दशहरा अपनी अलग परंपराओं के लिए जाना जाता है?
छत्तीसगढ़ के बस्तर में दशहरा अपनी खास स्थानीय परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है।
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टिप्पणियाँ 4

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·1 घंटे पहले

नेपाल में परिवार के साथ इस तरह मिलने-जुलने और टीका लगवाने की परंपरा सचमुच बहुत प्यारी लगती है। क्या भारत के कुछ इलाकों में भी दशहरे पर ऐसा ही पारिवारिक टीका लगाने का रिवाज़ होता है?

Priya Sharma@priya-sharma·1 घंटे पहले

पूजा, बिल्कुल सही कहा आपने! मैं पिछले साल ही काठमांडू में थी और वहाँ इस तरह घर-घर जाकर आशीर्वाद लेने का अपना ही मज़ा है।

Meera Joshi@meera-joshi·1 घंटे पहले

परिवार के साथ ऐसा जुड़ाव देखकर बहुत सुकून मिला। क्या भारत में भी कहीं दशहरे पर नेपाल के दशैं जैसी ही पारिवारिक मिलन की कोई परंपरा है?

Nyra Kaif@nyra-kaif·1 घंटे पहले

मीरा, सही कहा आपने! नेपाल के दशैं में परिवार का यह मिलन कितना प्यारा है। क्या भारत में भी किसी परिवार ने इस बार बस्तर या मैसूर की परंपरा को ऐसे ही घर पर अपनाया होगा?

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