झारखंड के लातेहार जिले में मौजूद मशहूर बेतला नेशनल पार्क में वन्यजीव प्रेमियों के लिए जंगल सफारी को नए और कड़े सुरक्षा नियमों के साथ फिर से शुरू कर दिया गया है। प्राकृतिक आवास और पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पार्क प्रशासन ने इस मर्तबा नियमों में काफी सख्ती बरती है। जंगल के संवेदनशील वातावरण को साफ-सुथरा बनाए रखने के लिए पूरे सफारी क्षेत्र और पार्क परिसर को पूर्ण रूप से नो प्लास्टिक जोन घोषित किया गया है। यहां आने वाले सैलानियों को परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की प्लास्टिक सामग्री का उपयोग न करने का साफ निर्देश दिया गया है, और दिशा-निर्देशों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आर्थिक दंड की पुख्ता व्यवस्था भी लागू की गई है।
प्लास्टिक की बोतलों पर लगेगा रिफंडेबल सुरक्षा शुल्क
पार्क के अंदर पेयजल की प्लास्टिक बोतलें ले जाने वाले सैलानियों की निगरानी के लिए प्रशासन ने एक अनूठी व्यवस्था तैयार की है। डिप्टी डायरेक्टर प्रजेश कांत जैना के अनुसार, जो भी पर्यटक अपने साथ पानी की प्लास्टिक बोतल अंदर ले जाना चाहेंगे, उन्हें प्रवेश द्वार पर बने निर्धारित काउंटर पर एक तय शुल्क जमा कराना होगा। जब पर्यटक अपनी सफारी पूरी करके पार्क से बाहर निकलेंगे और वह खाली बोतल काउंटर पर वापस दिखाएंगे, तब उनकी जमा राशि पूरी तरह लौटा दी जाएगी। यदि कोई व्यक्ति बोतल अंदर ही छोड़ आता है या उसे वापस जमा करने में विफल रहता है, तो उसकी जमा की गई राशि जब्त कर ली जाएगी। इस सुरक्षा शुल्क प्रणाली का मुख्य मकसद जंगल के भीतरी हिस्सों में प्लास्टिक कचरा जमा होने से रोकना है।
कचरा फेंकने पर तुरंत काटा जाएगा ऑन-स्पॉट चालान
सफारी मार्ग अथवा मुख्य पार्क परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए गश्ती दलों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। जंगल सफारी के दौरान या परिसर में कहीं भी प्लास्टिक रैपर, पन्नी या बोतल खुले में फेंकते पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ मौके पर ही दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। नियम तोड़ने वाले सैलानियों का ऑन-द-स्पॉट चालान काटकर जुर्माना वसूला जाएगा। प्रशासन ने सभी आगंतुकों से गुजारिश की है कि वे वन क्षेत्र की पवित्रता और स्वच्छता बनाए रखने में सक्रिय सहयोग दें तथा किसी भी तरह की अपशिष्ट सामग्री को खुले में फेंकने से पूरी तरह परहेज करें।
पलामू टाइगर रिजर्व में वेस्ट मैनेजमेंट पर कड़ा रुख
पलामू टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाले इस संवेदनशील भूभाग में इस बार ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पार्क प्रबंधन का मुख्य लक्ष्य पर्यटकों की आवाजाही से पैदा होने वाले कचरे का सुनियोजित और वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करना है। अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि अगर समय रहते कचरे पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह वन्यजीवों के प्राकृतिक पर्यावास, उनके भोजन और पेयजल स्रोतों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इसी खतरे को भांपते हुए इस सीजन में वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली को पहले से कहीं ज्यादा सुदृढ़ बनाया गया है।
वन्यजीवों को छेड़ने और हथियार ले जाने पर कानूनी रोक
सफारी के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। पर्यटकों को जानवरों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने और उनके शांतिपूर्ण वातावरण में किसी भी प्रकार का दखल न देने की सख्त हिदायत दी गई है। यदि कोई पर्यटक जानवरों को चिढ़ाने, आवाजें निकालने या उनके प्राकृतिक व्यवहार में बाधा पहुंचाने की कोशिश करता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। इसके अतिरिक्त, जंगल सफारी के दौरान किसी भी प्रकार के घातक हथियार या असलहा ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। पार्क प्रबंधन का मुख्य ध्येय प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और वन्यजीवों को सुरक्षित रखते हुए जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देना है।




















