खराब खानपान और गतिहीन दिनचर्या के चलते मोटापा और जीवनशैली से जुड़ी कई गंभीर दिक्कतें लगातार बढ़ रही हैं। इस चुनौती से निपटने और पारंपरिक मोटे अनाज यानी मिलेट्स की अहमियत समझाने के लिए उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक शिक्षिका प्रीति शर्मा ने रचनात्मक पहल की है। उन्होंने एक विशेष ट्रेन मॉडल डिजाइन किया है, जिसकी मदद से वे छात्रों के साथ-साथ आम नागरिकों को पोषण, पारंपरिक अनाजों के औषधीय गुणों और संतुलित आहार की बारीकियों से रूबरू करा रही हैं।
ट्रेन मॉडल के जरिए मोटे अनाज की खूबियां समझाने की कोशिश
शिक्षिका प्रीति शर्मा ने इस प्रोजेक्ट में ट्रेन के अलग-अलग डिब्बों और हिस्सों का इस्तेमाल अलग-अलग अनाजों को प्रदर्शित करने के लिए किया है। इस विशेष ट्रेन में ज्वार और बाजरा समेत तमाम प्रमुख मिलेट्स और उनसे घर में तैयार किए जा सकने वाले पौष्टिक व्यंजनों को दर्शाया गया है। इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य यह साफ करना है कि मोटा अनाज किस तरह हमारी नियमित भोजन की थाली का स्वाभाविक और अनिवार्य हिस्सा बन सकता है।
प्रीति शर्मा का कहना है कि मिलेट्स शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों का प्राकृतिक खजाना हैं। इनमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम, आयरन और डायटरी फाइबर पाया जाता है। जब कोई व्यक्ति इन्हें अपने दैनिक भोजन में नियमित तौर पर शामिल करता है, तो उसे एक संपूर्ण संतुलित आहार प्राप्त होता है। इस ट्रेन मॉडल के जरिए विशेष रूप से बच्चों को यह सिखाया जा रहा है कि मोटे अनाज का सेवन करना हमारे स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है और रोजमर्रा के भोजन में इन्हें किन आसान तरीकों से पकाया और खाया जा सकता है।
शुरुआती उम्र में खानपान की सही समझ विकसित करना बेहद जरूरी
इस अनूठी परियोजना की रूपरेखा केवल बच्चों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए परिवार के बड़े सदस्यों को भी जागरूक करने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षिका प्रीति शर्मा के मुताबिक, अगर प्राथमिक स्तर पर ही बच्चों को पौष्टिक खानपान, मिलेट्स के स्वास्थ्य लाभ और बाजार में मिलने वाले मिलावटी खाद्य पदार्थों के नुकसान के बारे में स्पष्ट रूप से समझाया जाए, तो उनमें बचपन से ही एक सेहतमंद जीवनशैली की आदत पड़ जाती है।
इसके अलावा उन्होंने जैविक और रासायनिक खाद के फर्क को उजागर करने पर भी विशेष जोर दिया है। उनका मानना है कि विद्यार्थियों को खेती और खाद्य उत्पादन की बुनियादी प्रक्रियाओं से परिचित कराना बेहद जरूरी है। जब बच्चों को यह पता चलेगा कि उनकी थाली में आने वाला अनाज किस तरह उगाया जाता है और रासायनिक उर्वरकों के मुकाबले जैविक खेती से मिलने वाला भोजन कितना गुणकारी होता है, तब वे स्वस्थ खानपान की वास्तविक अहमियत को गहराई से समझ सकेंगे।
फास्ट फूड के दौर में मिलेट्स की खेती और खपत बढ़ाने पर बल
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग तेजी से फास्ट फूड और प्रसंस्कृत अथवा मिलावटी चीजों की तरफ आकर्षित हो रहे हैं, जिसके दुष्परिणाम स्वास्थ्य पर सीधे दिखाई देते हैं। ऐसे माहौल में मिलेट्स जैसे पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों के प्रति जनचेतना फैलाना समय की मांग बन चुका है। संतुलित खानपान और पौष्टिक चीजों का नियमित उपयोग करके कई तरह की शारीरिक बीमारियों से खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है।
जागरूकता के दायरे को व्यापक बनाने के लिए इस ट्रेन मॉडल को विभिन्न सार्वजनिक और शैक्षणिक स्थानों पर प्रदर्शित किया जा रहा है। इसका मकसद यह है कि अधिक से अधिक संख्या में लोग इस मॉडल को करीब से देख सकें और मोटे अनाज को अपनी रसोई में शामिल करने की प्रेरणा लें। इसके साथ ही इस पहल के माध्यम से किसानों को भी मिलेट्स की खेती का रकबा बढ़ाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि बाजार में पौष्टिक अनाजों की पैदावार में तेजी से इजाफा हो सके और आम नागरिकों तक मोटे अनाज से बने उत्पाद सुलभता से पहुंच सकें।





















