घर की बालकनी और छत की हरियाली में जब रंग-बिरंगे फूल जुड़ते हैं, तो पूरे आशियाने की खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है। खासकर बोगनवेलिया अपने चटख रंगों और दूर से चमकने वाले फूलों के लिए पहचाना जाता है। कम जगह में भी यह पौधा शानदार फैलाव लेता है और दीवारों से लेकर ग्रिल तक पर मनमोहक छटा बिखेर देता है। जब लोग अच्छी किस्म का बोगनवेलिया खरीदने किसी नर्सरी का रुख करते हैं, तो उन्हें एक पौधे के लिए 350 से 500 रुपये या कभी-कभी इससे भी ज्यादा रकम चुकानी पड़ जाती है। अगर आप अपने बगीचे में कई रंगों के बोगनवेलिया लगाना चाहते हैं, तो यह खर्च काफी बढ़ सकता है। थोड़ी सी सूझबूझ और बागवानी की सही तकनीक अपनाकर घर में मौजूद किसी भी स्वस्थ पौधे की छोटी सी टहनी से नए पौधे बेहद आसानी से उगाए जा सकते हैं।
मानसून का मौसम कटिंग लगाने के लिए क्यों रहता है सबसे मुफीद
बागवानी के शौकीनों के लिए जुलाई से सितंबर तक का समय टहनियों से नई पौध विकसित करने का सबसे बेहतरीन दौर माना जाता है। इस समयावधि में वातावरण में नमी की मात्रा काफी अधिक रहती है, जिससे मिट्टी में लगाई गई नई कटिंग जल्दी सूखती नहीं है और उसे पनपने के लिए प्राकृतिक अनुकूलता मिलती है। हवा की यही आद्रता तने को सूखने से बचाकर नई जड़ें फूटने की प्रक्रिया को आसान बना देती है। हालांकि, इस मौसम में बहुत अधिक बारिश या गमले में पानी जमा रहने से कटिंग गल भी सकती है। अनुकूल माहौल मिलने पर आमतौर पर कुछ ही हफ्तों के भीतर डंठल पर हरी पत्तियां और कोंपलें नजर आने लगती हैं। जड़ें विकसित होने की रफ्तार पौधे की वैरायटी, तापमान, नमी और नियमित देखभाल पर निर्भर करती है। इसलिए किसी तय तारीख के फेर में पड़ने के बजाय पौधे की हर हरकत और संकेत को समझना जरूरी होता है।
सही शाखा का चयन और गमले की मिट्टी तैयार करने का तरीका
डंठल से नया पौधा तैयार करने की सफलता इस बात पर टिकी होती है कि आपने किस तरह की टहनी चुनी है। किसी भी कमजोर, बीमार या अत्यधिक कोमल हरी शाखा को चुनने से बचना चाहिए। बहुत ज्यादा पुरानी या सूखी लकड़ी जैसी मोटी शाखा भी तेजी से जड़ें नहीं पकड़ती। इसके लिए ऐसी शाखा सबसे उपयुक्त मानी जाती है जो न तो बिल्कुल नई और नाजुक हो और न ही बहुत ज्यादा पुरानी और सख्त। एक साफ और धारदार औजार की मदद से टहनी को काटें और उसके निचले हिस्से पर मौजूद पत्तियों को पूरी तरह साफ कर लें।
इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण चरण मिट्टी की तैयारी का आता है। गमले की मिट्टी हल्की और ऐसी होनी चाहिए जिससे पानी तुरंत छनकर बाहर निकल जाए। बेहतर परिणामों के लिए दोमट मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी हुई जैविक खाद, बालू और कोकोपीट का संतुलित मिश्रण तैयार किया जा सकता है। गमले के तलवे में जल निकासी के लिए छेद यानी ड्रेनेज होल होना अनिवार्य है ताकि अतिरिक्त पानी जमा न हो। कटिंग को मिट्टी में बहुत ज्यादा गहराई तक नहीं दबाना चाहिए। टहनी को सीधा और मजबूती से खड़ा करके उसके आसपास की मिट्टी को उंगलियों से हल्के हाथ से दबा दें और फिर मिट्टी को पर्याप्त रूप से नम करने जितना पानी डालें।
कटिंग लगाने के शुरुआती दिनों में इन आम गलतियों से बचें
अक्सर लोग डंठल लगाते ही उसे छत पर तेज चिलचिलाती धूप में रख देते हैं और यह सोचकर रोज बाल्टी भर पानी डालते हैं कि इससे पौधा जल्दी बड़ा होगा। यह दोनों ही गलतियां कटिंग को पूरी तरह खराब कर सकती हैं। रोपाई के शुरुआती हफ्तों में गमले को ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहां भरपूर प्राकृतिक रोशनी तो आती हो, लेकिन दोपहर की सीधी और तीखी धूप उस पर न पड़े।
सिंचाई के मामले में भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। गमले में पानी केवल तभी डालें जब सतह की ऊपरी मिट्टी सूखी नजर आने लगे। हर रोज लगातार पानी डालने से जड़ों का विकास तेज नहीं होता, बल्कि मिट्टी लगातार गीली रहने के कारण जमीन के अंदर ही कटिंग में फफूंद लग सकती है और वह सड़ सकती है। जड़ों को सांस लेने के लिए हवा और हल्की नमी की जरूरत होती है, दलदल जैसी कीचड़ की नहीं।
नई पत्तियां निकलने पर कैसे करें पौधे की देखभाल
जब कुछ हफ्तों के धैर्य के बाद डंठल के ऊपरी हिस्से पर छोटी-छोटी नई कोंपलें और हरी पत्तियां फूटने लगें, तो यह इस बात का संकेत है कि तने ने अंदर जड़ें जमाना शुरू कर दिया है। इस नाजुक मोड़ पर पौधे को अचानक उठाकर तेज धूप में नहीं रखना चाहिए। पौधे को आहिस्ता-आहिस्ता अधिक धूप वाली जगह पर रखने की आदत डालें, जिससे वह बदलते मौसम और रोशनी के अनुसार खुद को ढाल सके।
जब नई शाखाएं अच्छी तरह विकसित होकर थोड़ी मजबूत हो जाएं, तब उस पौधे को सावधानी से निकालकर किसी बड़े गमले में रोपा जा सकता है। एक बार जड़ें पूरी तरह स्थापित हो जाने के बाद बोगनवेलिया को भरपूर खुली धूप मिलना जरूरी है। यह पौधा अपनी प्रकृति से ही धूप प्रेमी होता है और जितनी अच्छी धूप इसे मिलती है, आगे चलकर इसमें उतने ही घने और शानदार फूल खिलते हैं।
एक ही डंठल के भरोसे न रहें, बनाएं कई सारे विकल्प
कटिंग से बागवानी करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप एक ही स्वस्थ पौधे से कई अलग-अलग डंठलें काटकर कई गमलों में लगा सकते हैं। बागवानी के नियमों के अनुसार हर कटिंग का कामयाब होना तय नहीं होता। कई बार नमी या तापमान में हल्के बदलाव से कुछ टहनियां सूख जाती हैं। इसलिए हमेशा एक साथ तीन से चार कटिंग लगाना व्यावहारिक रणनीति मानी जाती है।
हर बार नर्सरी जाकर 350 से 500 रुपये का भारी खर्च करने के बजाय घर पर मौजूद स्वस्थ बोगनवेलिया से नई पौध तैयार करना न केवल किफायती है बल्कि बेहद संतोषजनक भी है। थोड़ी सी लगन, सही जल निकासी वाली मिट्टी, संयमित पानी और मानसून के अनुकूल मौसम का लाभ उठाकर आप अपने छोटे से बगीचे को अनगिनत रंगीन फूलों से सजा सकते हैं।


















