त्रिपुरा के उनाकोटी जिले की एक अदालत ने बिना किसी वैध दस्तावेज के भारतीय सीमा में प्रवेश करने के आरोप में पांच बांग्लादेशी नागरिकों को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने अवैध रूप से सीमा पार करने के इन दो अलग-अलग मामलों में सजा पाने वाले सभी दोषियों पर 10,000-10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यदि दोषी इस जुर्माने की राशि का भुगतान करने में असमर्थ रहते हैं, तो उन्हें दो महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
घुसपैठ का पहला मामला और गिरफ्तारियां
अदालत का यह फैसला दो अलग-अलग घुसपैठ की घटनाओं से जुड़ा हुआ है। पहले मामले में सुरक्षा बलों ने कैलाशहड़ के पैतुरबाजार मोटर स्टैंड से तीन बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया था। इनकी पहचान इमरान हुसैन, अरमान हुसैन और मणिर हुसैन के रूप में हुई है, जो मूल रूप से बांग्लादेश के कोमिला जिले के निवासी हैं। गिरफ्तारी के वक्त ये तीनों व्यक्ति दो भारतीय दलालों के साथ मौजूद थे, जिन्होंने अवैध रूप से सीमा पार करने में इनकी सहायता की थी।
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि इन तीनों पुरुषों ने इस साल 1 फरवरी को कैलाशहड़ में ईरानी पुलिस स्टेशन के तहत आने वाली रंगाउती सीमा के जरिए भारतीय क्षेत्र में प्रवेश किया था। उनके पास भारत आने के लिए कोई भी वैध पासपोर्ट, वीजा या यात्रा दस्तावेज उपलब्ध नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ मामला दर्ज किया और अदालत ने उन्हें इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट की धारा 21/23 और BNS की प्रासंगिक धाराओं के तहत दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
दूसरा मामला: नव निर्मित मकान से हिरासत में लिए गए लोग
अवैध घुसपैठ का दूसरा मामला पिछले साल 10 जून का है, जब पुलिस ने खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई करते हुए कैलाशहड़ में एक नए बने मकान से दो बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लिया था। पकड़े गए लोगों की पहचान शिउली बेगम और साहिद शेख के रूप में हुई है, जिनके साथ एक नाबालिग बच्चा भी मौजूद था। पूछताछ के दौरान दोनों ने सुरक्षा अधिकारियों के सामने स्वीकार किया कि उन्होंने बिना किसी कानूनी दस्तावेज के भारत में प्रवेश किया था और वे वापस बांग्लादेश लौटने की कोशिश कर रहे थे।
सुनवाई पूरी होने के बाद उनाकोटी की अदालत ने इन दोनों को भी अवैध प्रवेश का दोषी पाया। कोर्ट ने शिउली बेगम और साहिद शेख को दो साल की कड़ी कैद की सजा के साथ-साथ प्रत्येक पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाने का आदेश दिया। जुर्माना न भरने की स्थिति में इन्हें भी अतिरिक्त दो महीने जेल में गुजारने होंगे।



















