त्रिपुरा में स्थानीय दुग्ध उत्पादन को नई गति देने और बढ़ती घरेलू मांग को पूरा करने के लिए राज्य प्रशासन ने एक व्यापक रणनीति पर काम शुरू किया है। वर्तमान में राज्य के भीतर दूध का उत्पादन उपभोक्ताओं की कुल जरूरतों से कम है, जिसके चलते डेयरी बुनियादी ढांचे को बड़े पैमाने पर उन्नत करने की योजना बनाई गई है। पशु संसाधन विकास विभाग (एआरडीडी) के मंत्री सुधांशु दास ने गोमती सहकारी मिल्क यूनियन की बोर्ड बैठक के दौरान इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी, जहां दुग्ध आपूर्ति और प्रसंस्कृत उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने के उपायों पर चर्चा की गई।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड देगा तकनीकी सहयोग
राज्य सरकार ने दुग्ध प्रसंस्करण, संग्रह और आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक बनाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) से तकनीकी सहायता मांगी है। इस पहल को संस्थागत रूप देने के लिए कुछ महीने पहले एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए थे। यह समझौता त्रिपुरा सरकार के पशु संसाधन विकास विभाग, गोमती सहकारी मिल्क यूनियन और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच हुआ है। इस साझेदारी के माध्यम से वैज्ञानिक तरीकों से डेयरी प्रबंधन और दूध संकलन की क्षमता को विस्तार दिया जा रहा है।
मंत्री सुधांशु दास ने इस रणनीति पर जोर देते हुए कहा कि त्रिपुरा में दूध और उससे जुड़े उत्पादों का उत्पादन बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है क्योंकि राज्य में खपत मौजूदा उत्पादन से काफी अधिक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से मिलने वाली मदद और एनडीडीबी जैसी विशेषज्ञ तकनीकी संस्थाओं का मार्गदर्शन इस क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एनडीडीबी द्वारा उन्नत तकनीक, बुनियादी ढांचे और वितरण नेटवर्क के लिए संस्थागत मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। हितधारकों से प्राप्त सभी महत्वपूर्ण सुझावों को मिलाकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है ताकि पूरे राज्य में दूध की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।
गोमती यूनियन का नेटवर्क होगा 10,000 किसानों तक विस्तृत
दुग्ध आपूर्ति को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए गोमती सहकारी मिल्क यूनियन ने अपने संगठनात्मक ढांचे को बड़ा करने की योजना बनाई है। गोमती सहकारी मिल्क यूनियन के अध्यक्ष रतन घोष ने बताया कि वर्तमान में 6,642 दुग्ध उत्पादक किसान यूनियन से सीधे जुड़े हुए हैं। संस्था ने इस संख्या को बढ़ाकर 10,000 किसानों तक पहुंचाने का स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित किया है।
ग्रामीण स्तर पर दूध संकलन तंत्र को मजबूत करने के लिए बोर्ड 52 अतिरिक्त दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के गठन की प्रक्रिया पर भी विचार कर रहा है। रतन घोष के अनुसार, यूनियन का प्राथमिक ध्यान केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर है। इन योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों और डेयरी किसानों को वित्तीय व तकनीकी सहायता उपलब्ध कराकर उनकी आजीविका को बेहतर बनाने के प्रयास किए जाएंगे।



















