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पलामू के भीम चूल्हा में कोयल नदी पर नौका विहार दोबारा तैयार, सर्दियों में पर्यटकों का सफर होगा खासझारखंड
2 नव॰ 2026, 9:02 am (2 घंटे पहले)· 0

पलामू के भीम चूल्हा में कोयल नदी पर नौका विहार दोबारा तैयार, सर्दियों में पर्यटकों का सफर होगा खास

पलामू के मोहम्मदगंज स्थित ऐतिहासिक भीम चूल्हा में कोयल नदी पर बोटिंग सुविधा फिर शुरू की जा रही है, जहां अब तीन मोटर बोटों के जरिए पर्यटक प्राकृतिक नजारों का आनंद ले सकेंगे।

सर्दियों के आगमन के साथ ही प्राकृतिक वादियों और ऐतिहासिक धरोहरों की सैर करने के शौकीन लोग नई जगहों की तलाश में जुटने लगे हैं। झारखंड के पलामू जिले में स्थित मोहम्मदगंज प्रखंड का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल भीम चूल्हा इस बार सैलानियों के स्वागत के लिए नए आकर्षणों के साथ तैयार हो रहा है। करीब 170 टन वजनी विशाल पाषाण चूल्हे के लिए विख्यात यह स्थल हमेशा से लोगों के कौतूहल का केंद्र रहा है। अब शीतकालीन पर्यटन सत्र को देखते हुए कोयल नदी में नौका विहार की सुविधा फिर से बहाल की जा रही है। इस कदम से यहां पहुंचने वाले सैलानी न केवल पौराणिक मान्यताओं से जुड़े पत्थरों का दीदार कर सकेंगे, बल्कि नदी की तेज और शांत लहरों के बीच बोटिंग का रोमांच भी ले सकेंगे।

महाभारत कालीन गाथा और 170 टन का विशाल चूल्हा

पलामू के जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से लगभग 70 किलोमीटर की दूरी पर बसा भीम चूल्हा प्राकृतिक छटा और लोक आस्था का एक दुर्लभ संगम प्रस्तुत करता है। इस क्षेत्र को लेकर जनश्रुति है कि महाभारत काल में अपने अज्ञातवास के दौरान पांचों पांडव अपनी माता कुंती के साथ इसी वन क्षेत्र में ठहरे थे। ऐसी मान्यता है कि भोजन पकाने की व्यवस्था के लिए महाबली भीम ने तीन भीमकाय पत्थरों को संतुलित ढंग से जोड़कर एक बड़े चूल्हे का स्वरूप दिया था। वर्तमान में यह विशाल चूल्हा करीब 170 टन वजन का माना जाता है, जो अपनी बनावट और भव्यता के कारण वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और आम पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य बिंदु बना हुआ है। झारखंड के स्थानीय निवासियों के अतिरिक्त पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग इस विस्मयकारी संरचना को देखने पहुंचते हैं।

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हथिया बाबा और मंदिर प्रांगण की लोक कथाएं

भीम चूल्हा के मुख्य परिसर में पांचों पांडवों के साथ माता कुंती की प्रतिमाएं श्रद्धापूर्वक स्थापित की गई हैं। इस स्थल पर एक अन्य विशालकाय शिलाखंड मौजूद है, जिसे श्रद्धालु और स्थानीय निवासी हथिया बाबा कहकर पुकारते हैं। इस शिला से जुड़ी सदियों पुरानी लोक मान्यता है कि अज्ञातवास के समय पांडवों के काफिले के साथ जो विशाल हाथी आया था, वह समय चक्र और युग बदलने के प्रभाव से पाषाण प्रतिमा में तब्दील हो गया। इसके अलावा मंदिर के ठीक नीचे एक प्राचीन गुफा होने का भी उल्लेख मिलता है। आम लोगों का अटूट विश्वास है कि इसी कंदरा में पांडव भाइयों और माता कुंती ने अपने निर्वासन और गुप्त प्रवास के दिन व्यतीत किए थे।

वॉच टावर, सुरम्य पार्क और भीम बराज का विहंगम दृश्य

सैलानियों की सुविधा और क्षेत्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इस इलाके में खूबसूरत पार्क और ऊंचे वॉच टावर का निर्माण कराया गया है। ऐतिहासिक आख्यानों को जीवंत दिखाने के लिए चूल्हे की ऊपरी संरचना पर एक विशालकाय कराह की आकृति भी तैयार की गई है, जो देखने वालों को प्राचीन काल के विशाल खानपान के दृश्यों का स्मरण कराती है। वॉच टावर की ऊंचाई पर खड़े होकर देखने पर चारों ओर घने जंगलों की हरियाली, दूर तक फैली ऊंची पहाड़ियां, कलकल बहती कोयल नदी और भीम बराज का मनोरम फैलाव साफ दिखाई देता है। ठंडे मौसम के दौरान यह सुरम्य परिवेश पिकनिक मनाने आने वाले परिवारों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।

कोयल नदी में बोटिंग का विस्तार और मोटर बोट का प्रबंध

इस पर्यटन स्थल के सबसे प्रमुख आकर्षणों में कोयल नदी का तटवर्ती किनारा और भीम बराज शामिल हैं, जहां लोग घंटों बैठकर प्राकृतिक शांति का अनुभव करते हैं। इस बार के शीतकालीन अवकाश में यहां नौका विहार को नए रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। पर्यटक राहुल कुमार के अनुसार, पूर्व में यहां केवल 6 सीटर नौका की व्यवस्था थी, किंतु अब एक नई 8 सीटर नौका को भी बेड़े में सम्मिलित कर लिया गया है। इस प्रकार अब यहां कुल तीन मोटर बोट उपलब्ध हो चुकी हैं। इस व्यवस्था से एक ही समय में अधिक संख्या में सैलानी बिना लंबी प्रतीक्षा किए नदी के जलस्तर पर भ्रमण कर सकेंगे। बोटिंग के दौरान लोगों को नदी के बीच से पहाड़ी ढलानों और वन संपदा को बिल्कुल नजदीक से देखने का अवसर मिलेगा।

मोहम्मदगंज रेलवे स्टेशन से सहज आवागमन की राह

भीम चूल्हा तक पहुंचने के लिए परिवहन के दोनों प्रमुख साधन सुगम और अनुकूल हैं। रेल मार्ग से आने वाले यात्रियों के लिए सबसे समीपस्थ रेलवे स्टेशन मोहम्मदगंज है, जहां से पर्यटन स्थल की दूरी केवल 3 किलोमीटर रह जाती है। दूसरी तरफ सड़क मार्ग से यात्रा करने वाले लोगों के लिए मेदिनीनगर मुख्यालय से यह दूरी लगभग 70 किलोमीटर पड़ती है। यदि आप भी सर्दियों के इस मौसम में अपने परिजनों या मित्रों के साथ एक दिवसीय या सप्ताहांत पिकनिक की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं, तो 170 टन के ऐतिहासिक भीम चूल्हे का विस्मय, धार्मिक आस्था का परिवेश और कोयल नदी में गतिमान नौका विहार का यह सफर एक यादगार अनुभव बन सकता है।

सवाल-जवाब

भीम चूल्हा किस जिले और प्रखंड में स्थित है?
भीम चूल्हा झारखंड के पलामू जिले के मोहम्मदगंज प्रखंड में स्थित है।
भीम चूल्हा का अनुमानित वजन कितना बताया जाता है?
स्थानीय मान्यताओं और ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार इस भीमकाय चूल्हे का वजन लगभग 170 टन है।
कोयल नदी में अब कुल कितनी मोटर बोट संचालित हैं?
नई 8 सीटर नाव शामिल होने के बाद अब यहां कुल तीन मोटर बोट उपलब्ध हो चुकी हैं।
भीम चूल्हा के पास स्थित हथिया बाबा को लेकर क्या मान्यता है?
मान्यता है कि महाभारत काल में अज्ञातवास के दौरान पांडवों के साथ आया हाथी युग परिवर्तन के बाद पत्थर में बदल गया था।
भीम चूल्हा का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कौन सा है?
सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन मोहम्मदगंज है, जो इस पर्यटन स्थल से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर है।
मेदिनीनगर से भीम चूल्हा की सड़क मार्ग से दूरी कितनी है?
पलामू के जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से भीम चूल्हा की सड़क मार्ग से दूरी लगभग 70 किलोमीटर है।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

पलामू के इस ऐतिहासिक स्थल पर बोटिंग शुरू होने से सर्दियों की सैर का मज़ा यक़ीनन बढ़ जाएगा। वैसे जानना चाहता हूँ कि क्या नदी में सुरक्षा के भी कोई पुख़्ता इंतज़ाम किए गए हैं ताकि पर्यटक बिना किसी डर के घूम सकें?

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

अर्जुन जी, आपकी चिंता बिल्कुल सही है। पर्यटन तो बढ़ेगा ही, पर कोयल नदी में बोटिंग शुरू होने से पहले लाइफ जैकेट और गोताखोरों जैसे सुरक्षा इंतजामों की पुख्ता जानकारी भी सामने आनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

सर्दियों की छुट्टियों में घूमने के लिए पलामू की यह जगह अब और भी बढ़िया हो गई है। ऐतिहासिक भीम चूल्हा देखने के साथ कोयल नदी में बोटिंग का मज़ा अलग ही रहेगा, इस बार यहाँ ज़रूर जाना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

रोहन, बात तो सही है तुम्हारी। सर्दियों में पलामू के इस इलाके में सुरक्षा व्यवस्था ठीक रहे और पुलिस गश्त बढ़ती रहे तो परिवार के साथ जाना और भी सुरक्षित हो जाएगा।

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