गाजियाबाद में जाम से निपटने का नया फॉर्मूला: 504 आम नागरिक बने ट्रैफिक के 'मददगार सिपाही'uttar-pradesh
2 घंटे पहले· 2

गाजियाबाद में जाम से निपटने का नया फॉर्मूला: 504 आम नागरिक बने ट्रैफिक के 'मददगार सिपाही'

गाजियाबाद पुलिस ने शहर के बढ़ते ट्रैफिक और जाम से जूझने के लिए आम लोगों की 'ट्रैफिक वॉलंटियर फोर्स' खड़ी की है, जिसमें पहले चरण में 504 लोगों को चुनकर ट्रेनिंग दी गई है।

दिल्ली से सटे गाजियाबाद में गाड़ियों की संख्या जिस रफ्तार से बढ़ी है, उसी रफ्तार से सड़कों पर जाम भी रोजमर्रा की मुसीबत बन चुका है। इसी परेशानी का हल अब पुलिस अकेले नहीं, बल्कि शहर के लोगों के साथ मिलकर निकालने जा रही है। गाजियाबाद पुलिस ने आम नागरिकों को साथ लेकर एक 'ट्रैफिक वॉलंटियर फोर्स' तैयार की है, जिसका काम ट्रैफिक पुलिस का हाथ बंटाना, सड़क हादसों पर लगाम लगाना और लोगों को यातायात नियमों के लिए जागरूक करना होगा। अब शहर के व्यस्त चौराहों पर वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के बराबर खड़े होकर ये आम लोग भी ट्रैफिक संभालते दिखेंगे।

हजारों आवेदन, पर चुने गए सिर्फ 504

इस मुहिम से जुड़ने के लिए गाजियाबाद के हजारों लोग आगे आए थे। पुलिस ने हर आवेदक के बैकग्राउंड और चरित्र की बारीकी से छानबीन की, यानी पूरा पुलिस वेरिफिकेशन किया गया। तमाम जरूरी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद पहले चरण में 504 सबसे उपयुक्त लोगों को इस फोर्स के लिए चुना गया। इस टीम में शहर के पढ़े-लिखे युवा, कारोबारी, नौकरीपेशा लोग, सामाजिक कार्यकर्ता और कई संस्थाओं से जुड़े जिम्मेदार नागरिक शामिल हैं। खास बात यह है कि ये सभी बिना किसी निजी फायदे या लालच के, महज समाज सेवा की भावना से इस काम में उतरे हैं।

जाम खुलवाने से लेकर जान बचाने तक की ट्रेनिंग

चुने गए सभी 504 स्वयंसेवकों को गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस की ओर से खास प्रशिक्षण दिया गया है। उन्हें सिखाया गया कि भारी जाम में फंसी गाड़ियों को कैसे सुचारू रूप से निकाला जाए, सड़क सुरक्षा के नियम क्या हैं और राह चलते लोगों से किस तरह प्यार और सम्मान के साथ बात की जाए। इतना ही नहीं, इन्हें यह भी सिखाया गया है कि अगर सड़क पर कोई हादसा हो जाए तो एम्बुलेंस के पहुंचने से पहले घायल को प्राथमिक चिकित्सा देकर उसकी जान कैसे बचाई जा सकती है।

रिफ्लेक्टिव जैकेट, टोपी और आईकार्ड बनेंगे पहचान

ड्यूटी के दौरान इन वॉलंटियर्स की सुरक्षा और पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस विभाग ने इन्हें आधिकारिक पहचान पत्र, चमकदार रिफ्लेक्टिव जैकेट और एक खास टोपी दी है। इनकी तैनाती शहर के सबसे व्यस्त चौराहों, मुख्य बाजारों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और त्योहारों के मौके पर की जाएगी। जिन जगहों पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की कमी रहेगी, वहां ये वॉलंटियर मोर्चा संभालेंगे और किसी भी बड़ी गड़बड़ी की सूचना तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।

रौब झाड़ने या रील बनाने पर सख्त मनाही

पुलिस ने इन स्वयंसेवकों के लिए कुछ कड़े और साफ नियम भी तय किए हैं। कोई भी वॉलंटियर अपनी ड्रेस या आईकार्ड का इस्तेमाल किसी पर रौब जमाने के लिए नहीं कर सकेगा। ड्यूटी के वक्त आम लोगों से हमेशा तमीज और सम्मान से पेश आना अनिवार्य होगा। साथ ही, सोशल मीडिया पर रील्स बनाने या वाहवाही बटोरने के लिए विभाग से जुड़ी किसी भी आधिकारिक चीज के इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक रहेगी।

कांवड़ यात्रा में दिखेगा असली इम्तिहान

डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुण बिसेन के मुताबिक यह पूरी तरह एक स्वयंसेवी व्यवस्था है, जिसका मकसद जनता और पुलिस के बीच की दूरी को घटाना है। उन्होंने बताया कि सभी वॉलंटियर्स का चरित्र सत्यापन और ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। आने वाली कांवड़ यात्रा के दौरान, जब शहर में भारी भीड़ उमड़ती है, तब इन सभी की सेवाएं बड़े पैमाने पर ली जाएंगी। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में जरूरत के हिसाब से इस फोर्स का दायरा और बढ़ाया जाएगा। जो भी नागरिक इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहते हैं, वे ट्रैफिक पुलिस कार्यालय पहुंचकर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।

सवाल-जवाब

ट्रैफिक वॉलंटियर फोर्स में कितने लोग चुने गए हैं?
पहले चरण में हजारों आवेदकों में से 504 सबसे उपयुक्त लोगों को चुना गया है।
इन वॉलंटियर्स को क्या-क्या ट्रेनिंग दी गई है?
उन्हें जाम में गाड़ियां निकालना, सड़क सुरक्षा नियम, लोगों से सम्मान से बात करना और हादसे में घायल को प्राथमिक चिकित्सा देना सिखाया गया है।
इन्हें कहां तैनात किया जाएगा?
इन्हें शहर के सबसे व्यस्त चौराहों, मुख्य बाजारों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और त्योहारों तथा कांवड़ यात्रा के दौरान तैनात किया जाएगा।
इस फोर्स से कैसे जुड़ा जा सकता है?
जो भी नागरिक इसका हिस्सा बनना चाहते हैं, वे ट्रैफिक पुलिस कार्यालय जाकर अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
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