गोंडा जिले को एक बड़ा प्रशासनिक और ढांचागत तोहफा मिला है, जहां सोमवार के एक सार्वजनिक मंच से 520 करोड़ रुपये से अधिक लागत की कुल 69 विकास परियोजनाओं की शुरुआत की गई। इस सभा के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के पिछले राजनीतिक दौर की कार्यशैली पर कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने खासतौर पर समाजवादी पार्टी के शासनकाल को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि उनके सत्ता में रहने के दौरान राज्य में केवल अव्यवस्था और प्रशासनिक अस्थिरता को जगह मिली।
क्षेत्रीय असंतुलन खत्म करने का दावा
मुख्यमंत्री ने जनसभा में जोर देकर कहा कि मौजूदा दौर में बुनियादी सुविधाओं के वितरण में किसी भी इलाके के साथ पक्षपात नहीं बरता जा रहा है। उनके अनुसार, पहले बिजली और विकास के बड़े प्रोजेक्ट सिर्फ चुनिंदा तहसीलों या राजनीतिक रसूख वाले क्षेत्रों तक सीमित रहते थे। पूर्व में प्राथमिकताएं समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पैतृक गांव सैफई अथवा रामपुर जैसे इलाकों के इर्द-गिर्द सिमट कर रह जाती थीं।
प्रशासनिक आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अब राज्य के संपूर्ण 75 जिलों, 350 तहसीलों, 825 विकास खंडों तथा 762 नगरीय निकायों में एक समान गति से निर्माण कार्य और कल्याणकारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि गोंडा, बहराइच और बलरामपुर जैसे तराई और सीमावर्ती क्षेत्रों को भी अब बिना किसी रुकावट के उतनी ही बिजली मिल रही है, जितनी राज्य के किसी अन्य हिस्से को उपलब्ध कराई जाती है।
अनाज घोटाले और कानून-व्यवस्था का उल्लेख
सार्वजनिक वितरण प्रणाली और पूर्ववर्ती वित्तीय अनियमितताओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी गोंडा की धरती ने सपा शासन के दौर में सबसे बड़े खाद्यान्न घोटाले को झेला था। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि जरूरतमंदों के हक का राशन हड़पने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर अब गरीबों तक मुफ्त अनाज की शत-प्रतिशत पारदर्शी आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।
कानून-व्यवस्था और पूर्ववर्ती कार्यकालों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने गोरखपुर के अपने पिछले संबोधन का भी स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के चार कार्यकालों के दौरान राज्य को 1500 बार दंगों का सामना करना पड़ा था।
राजनीतिक दलों की प्राथमिकताओं में अंतर
मुख्यमंत्री ने भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी खेमे के दृष्टिकोण का तुलनात्मक विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भाजपा का मुख्य ध्येय आस्था का सम्मान करना और समाज के प्रत्येक नागरिक के दैनिक जीवन में स्थिरता तथा सुधार लाना है। इसके उलट, उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर हमला बोलते हुए टिप्पणी की कि इन दलों का राजनीतिक इतिहास अपराध और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बनकर रह गया है।



















