ग्रेटर नोएडा में करीब दस वर्षों से कानून की नजरों से बचकर भाग रहे एक शातिर चोर को बीटा 2 थाना पुलिस ने धर दबोचा है। बंद पड़े रिहायशी मकानों में सेंध लगाने वाले इस आदतन अपराधी तक पहुंचने के लिए पुलिस कर्मियों को इलाके के 250 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने पड़े। पकड़े गए आरोपी के पास से सोने और चांदी के कई कीमती आभूषण बरामद किए गए हैं, जिनका कुल अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 11 लाख रुपये है। इस धरपकड़ और मामले के खुलासे की पूरी जानकारी शुक्रवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में एडिशनल डीसीपी अभय मिश्रा ने सार्वजनिक की।
इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से मिली दादरी निवासी आरोपी की सटीक लोकेशन
पुलिस को मुखबिर तंत्र और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए आरोपी की गतिविधियों के बारे में पुख्ता सुराग मिले थे। इसी तकनीकी मदद के आधार पर बीटा 2 थाना पुलिस ने संबंधित थाना क्षेत्र में जाल बिछाकर आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस पूछताछ में पकड़े गए व्यक्ति की पहचान सारमिन उर्फ शम्भू के रूप में हुई है, जो दादरी थाना क्षेत्र स्थित बादशाह कॉलोनी की गली नंबर 2 का रहने वाला है। वह काफी लंबे वक्त से अलग-अलग इलाकों में अपना ठिकाना बदलकर पुलिस को लगातार चकमा दे रहा था।
सोने के तीन नेकलेस और चांदी के आभूषण बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस टीम ने आरोपी के कब्जे से भारी मात्रा में चोरी के गहने बरामद किए हैं। बरामद माल में सोने के 3 नेकलेस, माथे पर सजाने वाले 2 मांग टीका और कानों के ऊपर पहनी जाने वाली 2 बारीक चेन शामिल हैं। इसके अलावा चांदी के आभूषणों का एक बड़ा जखीरा भी जब्त किया गया है। चांदी की वस्तुओं में 2 पाजेब, 2 सेम्पल, गले का 1 हार, हाथ का 1 ब्रेसलेट, बच्चों के हाथ के 4 कड़े और 4 बिछुए शामिल हैं। बरामद किए गए इन सभी गहनों की कुल कीमत करीब 11 लाख रुपये आंकी गई है।
सूने घरों की रेकी और कई महीनों पहले की वारदातें कबूलीं
एडिशनल डीसीपी अभय मिश्रा के अनुसार, आरोपी दिन के समय कॉलोनियों में घूमकर ऐसे बंद पड़े मकानों की रेकी करता था जिनके मालिक बाहर गए होते थे। मौका मिलते ही वह ताले तोड़कर घर में रखे जेवरात समेट लेता था और उन्हें बेचकर अवैध कमाई से अपनी सुख-सुविधाएं जुटाता था। गहन पूछताछ में आरोपी ने ग्रेटर नोएडा के सेक्टर अल्फा 1 और अल्फा 2 में तकरीबन 7 से 8 महीने पहले की गई चोरी की वारदातों में अपनी संलिप्तता कबूल की है। इसके अतिरिक्त उसने ग्रेटर नोएडा इलाके में दर्ज कई अन्य चोरियों को भी अंजाम देने की बात स्वीकार की है।
ट्रैकिंग से बचने के लिए रखता था कीपैड वाला मोबाइल
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पुलिस की डिजिटल निगरानी से बचने के लिए बेहद सतर्क रहता था। वह कभी भी स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं करता था, बल्कि साधारण कीपैड वाले मोबाइल फोन का उपयोग करता था ताकि उसकी लोकेशन आसानी से ट्रैक न की जा सके। रिकॉर्ड के मुताबिक, आरोपी वर्ष 2016 में जेल से रिहा हुआ था और जेल से बाहर आते ही उसने दोबारा चोरी का नेटवर्क खड़ा कर लिया। गौतमबुद्ध नगर पुलिस के साथ-साथ कई अन्य पड़ोसी जिलों की पुलिस भी लंबे समय से उसकी तलाश कर रही थी, जिसका दस साल लंबा खेल अब खत्म हो गया है।





















