सहारनपुर जिले के सावलपुर नवादा गांव में स्थित कान्हा उपवन गौशाला पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नया मॉडल बनकर सामने आई है। सहारनपुर नगर निगम की देखरेख में चलने वाले इस परिसर में सड़कों पर लावारिस घूमने वाले 550 से ज्यादा गोवंश को न केवल आश्रय दिया जा रहा है, बल्कि उनके गोबर और गोमूत्र की मदद से उपयोगी वस्तुएं तैयार करके गौशाला को स्वावलंबी बनाने की मजबूत पहल भी जारी है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए अब यहां देसी गाय के गोबर से खास सीड बॉल का निर्माण शुरू किया गया है, जो बंजर या कूड़े-कचरे वाली खाली जगहों को भी हरी-भरी फुलवारी में बदल सकती हैं।
सीड बॉल का मकसद और निर्माण का तरीका
इस अनूठी पहल के पीछे का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को हरा-भरा बनाना और अपशिष्ट प्रबंधन को सार्थक रूप देना है। गाय के गोबर से बनी यह छोटी सी गेंद प्राकृतिक खाद और पोषक तत्वों से भरपूर होती है। जब इसे किसी खाली स्थान, मैदान या बगीचे में डाला जाता है, तो गोबर खाद का काम करता है और बारिश या नमी मिलते ही इसके भीतर बंद बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेते हैं। यदि किसी इलाके में कचरे का ढेर या उपेक्षित जमीन नजर आती है, तो वहां भी इस गेंद को फेंककर प्राकृतिक तरीके से हरियाली उगाई जा सकती है।
गेंदे से लेकर सब्जियों तक के बीजों का मेल
सीड बॉल निर्माण से जुड़े श्रवण कुमार के मुताबिक, इन बॉल्स को तैयार करने के लिए खास किस्म के बीजों का चयन किया जा रहा है। इनमें गेंदे के फूल के साथ-साथ इलायची और लौंग जैसी उपयोगी वनस्पतियों के बीज मिलाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त घरेलू रसोई में काम आने वाली सब्जियों जैसे हरी मिर्च, लौकी, तोरई, भिंडी और बैंगन के बीज भी इन बॉल्स के भीतर सुरक्षित रखे जाते हैं। जैसे ही ये सीड बॉल मिट्टी के संपर्क में आती हैं और नमी सोखती हैं, कुछ ही समय में इनसे नए स्वस्थ पौधे बाहर निकल आते हैं। श्रवण कुमार ने स्पष्ट किया कि परिसर में प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में ऐसी सीड बॉल ढाली जा रही हैं।
मात्र 10 रुपये कीमत और ऑनलाइन पहुंच
आम लोगों तक इस पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद को पहुंचाने के लिए इसकी कीमत बेहद किफायती, यानी मात्र 10 रुपये रखी गई है। स्थानीय स्तर पर सीधे गौशाला से खरीदारी के अलावा इसे ऑनलाइन कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़न पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है। इस सुविधा के चलते गौशाला के उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और बिहार समेत देश के कई राज्यों से लगातार सीड बॉल के ऑर्डर आ रहे हैं, जिससे गौशाला के लिए अच्छी आय पैदा हो रही है।
प्रदेश की अग्रणी गौशाला में शामिल
कान्हा उपवन गौशाला को उत्तर प्रदेश की नंबर एक गौशाला का दर्जा भी दिया जाता रहा है। इसकी कार्यप्रणाली और नवाचारों की वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस परिसर का दौरा और निरीक्षण कर चुके हैं। मुख्यमंत्री ने गोवंश के संरक्षण के साथ गोबर और गोमूत्र से विभिन्न उत्पाद बनाकर संस्था को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने के प्रयासों की सराहना की थी। आवारा पशुओं की सुरक्षा के साथ-साथ यह गौशाला अब देशभर में हरियाली फैलाने का जरिया बन चुकी है।



















