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जौनपुर में नेहरू के स्वागत के लिए रातभर में बन गया था अंग्रेजी टॉयलेट, इस घर में बसी हैं आज़ादी की यादेंउत्तर प्रदेश
23 जून 2026, 10:31 am (45 दिन पहले)· 2

जौनपुर में नेहरू के स्वागत के लिए रातभर में बन गया था अंग्रेजी टॉयलेट, इस घर में बसी हैं आज़ादी की यादें

जौनपुर के रासमंडल मोहल्ले में स्थित स्वर्गीय स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह के ऐतिहासिक आवास में पंडित जवाहरलाल नेहरू 1922 और 1937 में आए थे। नेहरू के आगमन से पहले उनकी ज़रूरत के अनुसार रातभर में अंग्रेजी शैली का शौचालय बनाया गया था, जो उस वक्त शहर में खूब चर्चा का विषय बना था।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर का नाम लेते ही दिमाग में शर्की सल्तनत की भव्य इमारतें और सदियों पुरानी ऐतिहासिक विरासत आ जाती है। लेकिन इस शहर के रासमंडल मोहल्ले में एक पुराना आवास अपने भीतर एक बिल्कुल अलग किस्म का इतिहास समेटे हुए है। स्वर्गीय स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह का यह मकान आज भी उस दौर की जीवंत गवाही देता है, जब देश आज़ादी के लिए लड़ रहा था और बड़े-बड़े नेता एक छत के नीचे मिला करते थे।

दो बार जौनपुर आए नेहरू

परिवार के सदस्यों ने TrendKia को बताया कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू वर्ष 1922 और 1937 में इस भवन में आए थे। उन दिनों यह आवास स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के मिलने-जुलने का एक अहम केंद्र था। जब भी नेहरू के जौनपुर आने की खबर फैलती, पूरे शहर में एक अलग ही उत्साह और हलचल देखने को मिलती थी। लोग बड़ी तादाद में उनकी एक झलक पाने के लिए जमा हो जाते थे।

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रातभर चला काम, तड़के तैयार हुआ अंग्रेजी टॉयलेट

घर की बहू डॉ. विमला सिंह ने TrendKia से बात करते हुए नेहरू के जौनपुर दौरे से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि जब नेहरू पहली बार इस भवन में आने वाले थे, तब उनके ठहरने की पूरी व्यवस्था पर खास ध्यान दिया गया। उस ज़माने में शहर के अधिकतर घरों में भारतीय शैली के शौचालय ही होते थे, लेकिन पंडित नेहरू को अंग्रेजी यानी पश्चिमी शैली के शौचालय की आदत थी। इसे देखते हुए उनके आगमन से ठीक पहले, सिर्फ एक दिन के भीतर, खासतौर पर अंग्रेजी टॉयलेट का निर्माण कराया गया। उस वक्त यह बात पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गई थी, क्योंकि ऐसी सुविधा उस दौर में बहुत कम जगह देखने को मिलती थी।

सादगी और एकजुटता का संदेश देते थे नेहरू

डॉ. विमला सिंह ने बताया कि जौनपुर प्रवास के दौरान नेहरू का व्यवहार बेहद सहज और आत्मीय था। उन्होंने यहां स्थानीय लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों से मुलाकात की तथा सभी को देश की आज़ादी के लिए मिलकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी। उनके विचारों और व्यक्तित्व का लोगों के दिलों पर गहरा असर पड़ा था।

इतिहास की जीती-जागती निशानी

यह ऐतिहासिक भवन आज भी उन लम्हों की याद को जीवित रखे हुए है, जब देश के महान नेता इन्हीं कमरों में बैठकर आज़ादी के सपनों को आकार दे रहे थे। यहां आने वाले लोग उन कमरों और जगहों को देखकर गर्व महसूस करते हैं, जहां कभी देश के अगुवा नेता पधारे थे। डॉ. विमला सिंह का कहना है कि यह मकान सिर्फ जौनपुर की धरोहर नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की उन अनमोल यादों का प्रतीक भी है, जिन्हें आने वाली पीढ़ियों तक सहेजकर पहुंचाना बेहद ज़रूरी है।

सवाल-जवाब

पंडित नेहरू जौनपुर के किस मोहल्ले में रुके थे?
वे रासमंडल मोहल्ले में स्थित स्वर्गीय स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह के ऐतिहासिक आवास में आए थे।
नेहरू जौनपुर कितनी बार आए और किन वर्षों में?
वे 1922 और 1937 में, यानी दो बार इस भवन में आए थे।
रातभर में अंग्रेजी टॉयलेट बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
पंडित नेहरू को अंग्रेजी शैली के शौचालय की आदत थी, जबकि उस दौर में अधिकतर घरों में भारतीय शैली के शौचालय होते थे, इसलिए उनके आगमन से पहले खासतौर पर इसका निर्माण कराया गया।
परिवार में किसने ये यादें साझा कीं?
घर की बहू डॉ. विमला सिंह ने TrendKia को नेहरू के दौरों से जुड़े ये किस्से बताए।
यह भवन स्वतंत्रता आंदोलन में किस भूमिका में था?
यह आवास स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं के मिलने-जुलने का मुख्य केंद्र था।
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