लखनऊ में संसद के उच्च सदन की दस रिक्त सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया अपने निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई है। नामांकन के अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी के आठ नेताओं ने अपने आधिकारिक दस्तावेज निर्वाचन प्राधिकारी के समक्ष पेश किए। इस दौरान राज्य के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और संगठन के शीर्ष रणनीतिकार भी मौजूद रहे। नामांकन प्रक्रिया के बाद अब प्रदेश की सभी दस सीटों पर बिना किसी मतदान के सर्वसम्मत जीत की रूपरेखा लगभग साफ हो चुकी है।
जातीय समीकरणों को साधते हुए मैदान में उतारे गए चेहरे
पार्टी की ओर से पर्चा दाखिल करने वालों में सामाजिक प्रतिनिधित्व को स्पष्ट रूप से प्राथमिकता दी गई है। अन्य पिछड़ा वर्ग से प्रदेश सरकार में काबीना मंत्री धर्मपाल सिंह, जो लोध समाज से आते हैं, उनके साथ प्रकाश पाल और कुर्मी समाज का प्रतिनिधित्व करने वालीं श्रुति गंगवार को स्थान मिला है। दलित समुदाय से विद्यासागर सोनकर तथा प्रियंका रावत को मौका दिया गया है। सामान्य वर्ग के अंतर्गत ब्राह्मण बिरादरी से राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पांडे को टिकट दिया गया, जबकि क्षत्रिय समाज से राम प्रताप सिंह चौहान ने पर्चा भरा। सूची में दो महिला प्रतिनिधियों की मौजूदगी भी सांगठनिक संतुलन की रणनीति को दर्शाती है।
दस्तावेजों की तकनीकी औपचारिकताएं और प्रक्रिया
निर्वाचन प्रक्रिया के संचालन की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी अजीत वर्मा ने बताया कि प्रत्येक प्रत्याशी ने अपने पर्चों के दो-दो प्रारूप पेश किए हैं। नियमानुसार हर प्रारूप पर दस विधायकों के प्रस्तावक के रूप में दस्तखत अनिवार्य थे, जिसे पूरा कर लिया गया है। इससे पहले समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकार राम गोपाल यादव और रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े धनराज परिमल नाथवानी अपनी दावेदारी दर्ज करा चुके हैं। मंगलवार को प्रक्रिया की समयसीमा समाप्त होने के साथ ही यदि कोई अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने नहीं आता, तो सभी दस उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है।
सपा की रणनीति और सियासी बयानबाजी
चुनावी गणित को लेकर कयास लगाए जा रहे थे कि मुख्य विपक्षी दल तीसरा चेहरा उतारकर मुकाबले को रोचक बना सकता है। हालांकि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से इन अटकलों पर विराम लगा दिया। राजधानी दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध विपक्षी विरोध में भाग ले रहे अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी तीन सीटों के फेर में पड़ने के बजाय राज्य विधानसभा की 403 सीटों के व्यापक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
इस रुख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने दावा किया कि सपा ने अगले विधानसभा संग्राम से पहले ही पराजय स्वीकार कर ली है। वहीं नामांकन प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रकाश पाल ने कहा कि केवल भाजपा ही वास्तव में 'पीडीए' का सम्मान करती है। इससे पहले सभी आठों प्रत्याशी विधानभवन मार्ग स्थित प्रांतीय मुख्यालय पहुंचे थे, जहां उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े सहित शीर्ष पदाधिकारियों से भेंट के उपरांत पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ वे नामांकन कक्ष के लिए रवाना हुए।























