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काशी स्टेशन के विस्तार में फंसी गंज शहीदा मस्जिद, रेलवे के नोटिस के जवाब में अंजुमन ने भी चस्पा किया अपना नोटिसउत्तर प्रदेश
17 जून 2026, 9:42 am (133 दिन पहले)· 5

काशी स्टेशन के विस्तार में फंसी गंज शहीदा मस्जिद, रेलवे के नोटिस के जवाब में अंजुमन ने भी चस्पा किया अपना नोटिस

वाराणसी में काशी स्टेशन के विस्तारीकरण के तहत रेलवे ने गंज शहीदा मस्जिद को अतिक्रमण बताकर हटाने का नोटिस चस्पा किया, जिसके जवाब में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने रेलवे के नोटिस को फर्जी करार दिया है।

वाराणसी में रेलवे और मस्जिद कमेटी के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। काशी स्टेशन के विस्तारीकरण के काम के बीच रेलवे प्रशासन ने गंज शहीदा मस्जिद पर नोटिस चस्पा कर दिया, और इसके साथ ही मुस्लिम समाज में हड़कंप मच गया। रेलवे का कहना है कि यह मस्जिद उसकी जमीन पर बनी है और इसे अतिक्रमण मानते हुए हटाने के लिए एक हफ्ते का समय दिया गया है।

नोटिस के जवाब में नोटिस

रेलवे की इस कार्रवाई का अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने तीखा जवाब दिया है। कमेटी ने गंज शहीदा मस्जिद के मुख्य द्वार पर अपना अलग नोटिस चस्पा कर दिया, जिसमें मस्जिद को मुस्लिम समाज की मिल्कियत बताया गया और रेलवे के नोटिस को फर्जी करार दिया गया। मामला यहीं नहीं रुका, कमेटी ने इस पूरे घटनाक्रम को कानून व्यवस्था बिगड़ने तक से जोड़ दिया।

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कमेटी का पक्ष

कमेटी के संयुक्त सचिव मोहम्मद सैयद यासीन ने अपना पक्ष रखते हुए नोटिस को सीधे तौर पर अवैध बताया। उनके मुताबिक उस नोटिस पर न तो कोई तारीख है, न किसी का दस्तखत है और न ही रेलवे का कोई लोगो लगा हुआ है। यासीन ने कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है कि अगर रेलवे ने भी इस तरह नोटिस चिपकाया है तो वह खुद कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है।

यासीन ने यह भी दावा किया कि नोटिस में जिस मुकदमे का जिक्र किया गया है, उसका इस नोटिस से कोई लेना-देना ही नहीं है। उनके अनुसार वह मुकदमा मस्जिद के पूरब दिशा में पड़ी जमीन को लेकर था, और यह केस खुद अंजुमन इंतजामिया ने उसी वक्त दाखिल किया था।

1880 के नक्शे का हवाला

कमेटी का दावा है कि रेलवे ने अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर खुद यह स्वीकार किया है कि मस्जिद मुसलमानों की मिल्कियत है। अंजुमन का कहना है कि अब वह इसी बिंदु को अदालत में चुनौती देगा। इसके समर्थन में कमेटी 1880 के एक नक्शे का हवाला दे रही है, जिसमें मस्जिद साफ तौर पर दिखाई देती है। कमेटी का तर्क है कि उस दौर में वहां रेलवे का कोई अस्तित्व ही नहीं था।

क्या है पूरा मामला

दरअसल वाराणसी के काशी स्टेशन का विस्तारीकरण किया जा रहा है। इसी विस्तार योजना के दायरे में रेलवे की जमीन पर बनी गंज शहीदा मस्जिद को रेलवे प्रशासन ने अतिक्रमण माना है। रेलवे ने मस्जिद पर नोटिस चस्पा कर उसे एक हफ्ते के भीतर हटाने को कहा है, जबकि मस्जिद कमेटी इसे अपनी संपत्ति बताते हुए अदालत का रास्ता अपनाने की तैयारी कर रही है।

सवाल-जवाब

रेलवे ने गंज शहीदा मस्जिद पर नोटिस क्यों चस्पा किया?
काशी स्टेशन के विस्तारीकरण के तहत रेलवे ने अपनी जमीन पर बनी इस मस्जिद को अतिक्रमण बताया है और इसे एक हफ्ते में हटाने को कहा है।
मस्जिद कमेटी का इस पर क्या जवाब है?
अंजुमन इंतजामिया मसाजिद ने जवाब में अपना नोटिस चस्पा कर मस्जिद को मुस्लिम समाज की मिल्कियत बताया और रेलवे के नोटिस को फर्जी करार दिया।
कमेटी रेलवे के नोटिस को अवैध क्यों मान रही है?
संयुक्त सचिव मोहम्मद सैयद यासीन के अनुसार नोटिस पर न कोई तारीख है, न दस्तखत और न ही रेलवे का कोई लोगो है।
कमेटी अदालत में किस आधार पर लड़ने की तैयारी कर रही है?
कमेटी के पास 1880 का एक नक्शा है जिसमें मस्जिद दिखती है, और उसका दावा है कि रेलवे ने शपथ पत्र में मस्जिद को मुसलमानों की मिल्कियत माना है।
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